CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी IAS मेधा रूपम को SC से मिली सुविधा पर उठे सवाल! वकीलों ने CJI से की ये मांग
Sandeep Kumar | Sept 25, 2026, 24:03 IST
CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी आईएएस मेधा रूपम
गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम से जुड़े NSA केस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई और मामले की लिस्टिंग को लेकर वकीलों के संगठन ने सवाल उठाए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला ?
- आईएएस मेधा रूपम NSA मामले को लेकर चर्चा में हैं।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजे का आदेश दिया था।
- मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के हिस्से पर रोक लगाई।
- वकीलों ने सुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें एक छात्र कार्यकर्ता को NSA मामले में मुआवजा देने का आदेश दिया था। मेधा रूपम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। कोर्ट ने जल्दी सुनवाई कर आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी। अब वकीलों के एक संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
वकीलों ने किया विरोध
हाईकोर्ट ने क्या दिया था आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने यह हिरासत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि आकृति को लगातार जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। कोर्ट के मुताबिक हिरासत का आदेश बिना ठोस सबूत के जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने मेधा रूपम और अन्य अधिकारियों को अपनी सैलरी से पांच लाख रुपये मुआवज़ा देने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसका आदेश सिर्फ कड़ी टिप्पणियों और मुआवजे तक सीमित है। बाकी मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है।
वकीलों की आपत्ति क्यों
एक और बड़ी आपत्ति सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को म्यूट करने पर है। आमतौर पर अदालत की सुनवाई सार्वजनिक होती है। वकील, पत्रकार और आम लोग इसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से देख सकते हैं। इस मामले में आवाज़ बंद कर दी गई, जिस पर एसोसिएशन ने सवाल उठाया है।
गलत मिसाल की आशंका
संगठन ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों का भरोसा बना रहना बेहद ज़रूरी है। फिलहाल यह मामला कानूनी और सार्वजनिक दोनों स्तर पर चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस पर सुप्रीम कोर्ट और कानूनी बिरादरी की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र रहेगी।
रोस्टर क्या कहता है?
ऐसे मामले वरिष्ठता क्रम में शुरुआती चार पीठों को सौंपे गए हैं। इनमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल है। जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ भी इनमें है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठें भी शामिल हैं। जस्टिस शर्मा के नियमित रोस्टर में ये मामले नहीं दिखते।
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