ठेका घोटाले में अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट का झटका: CBI जांच के आदेश
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल के CM पेमा खांडू पर सीबीआई जांच का आदेश दिया है।
- आरोप है कि परिवार की कंपनियों को नियम तोड़कर सरकारी ठेके दिए गए थे।
- Save Mon Region Federation नाम की एनजीओ ने यह पीआईएल दायर की थी।
- सीबीआई को दो हफ्ते में प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
- 16 हफ्ते में सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में जमा करनी होगी।
News In Detail
CM पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट का झटका
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को ठेका घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई दो हफ्ते के भीतर इस मामले में प्रारंभिक जांच दर्ज करे।
यह आदेश सोमवार, 06 अप्रैल को एक जनहित याचिका (PIL - Public Interest Litigation) पर सुनवाई के बाद आया है। Save Mon Region Federation नाम की एनजीओ (NGO - Non-Governmental Organisation) ने यह याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले में 17 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था और अब वह फैसला सामने आ गया है।
क्या है आरोप?
याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े लोगों की कंपनियों को सरकारी ठेके नियमों को दरकिनार करके और ऊंची दरों पर दिए गए थे। कहा गया कि यह सब जानबूझकर और मनमाने तरीके से किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि सीबीआई नवंबर 2015 से 2025 तक के बीच हुए टेंडर (Tender) और कॉन्ट्रैक्ट (Contract) के आवंटन की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। खासतौर पर उन ठेकों की जांच होगी जिनका जिक्र याचिका में किया गया है।
जांच का दायरा रखा गया व्यापक
कोर्ट ने सीबीआई को सिर्फ तय समय तक सीमित नहीं रखा है। यदि जांच के दौरान जरूरी लगे तो एजेंसी इससे पहले या बाद के सौदों और लेन-देन की भी जांच कर सकती है। सीबीआई को भुगतान की प्रक्रिया यानी फ्लो ऑफ पेमेंट्स (Flow of Payments), टेंडर प्रक्रिया और सभी डीलिंग के हर पहलू की पड़ताल करने का निर्देश दिया गया है। यह इसलिए किया गया ताकि कोई भी संभावित अनियमितता नजरअंदाज न हो सके।
राज्य सरकार को भी सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को भी स्पष्ट हिदायत दी है। राज्य के मुख्य सचिव मनीष गुप्ता को एक सप्ताह के भीतर एक नोडल अधिकारी (Nodal Officer) नियुक्त करना होगा। यह अधिकारी सीबीआई के साथ पूरे मामले में समन्वय करेगा।
इसके साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि टेंडर कमेटी से जुड़े सभी रिकॉर्ड, वाउचर, प्रमाणपत्र और भुगतान से जुड़े दस्तावेज समय पर सीबीआई को दिए जाएं।
रिकॉर्ड नष्ट करने पर सख्त रोक
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में बहुत सख्त लहजे में कहा कि जांच से जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड, चाहे वह कागज पर हो या डिजिटल, नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश इसलिए दिया गया ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस स्तर पर की गई टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं। यह जांच सिर्फ यह तय करने के लिए है कि क्या इस मामले में स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं।
16 हफ्ते में देनी होगी स्टेटस रिपोर्ट
सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि वह 16 हफ्ते के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच की स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) कोर्ट में दाखिल करे। इस रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मामले में आगे नियमित जांच की जरूरत है या नहीं। यानी यह रिपोर्ट ही आगे की दिशा तय करेगी।
ये खबर भी पढ़िए...
लक्षद्वीप की गाड़ी, अरुणाचल की एनओसी और मध्यप्रदेश में वाहनों का रजिस्ट्रेशन
अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, 60 में से 46 सीटों पर कब्जा, सिक्किम में SKM ने मारी बाजी
चीन का बेतुका दावा- चीन का हिस्सा है अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन, इस मुद्दे पर भारत रहे शांत