पीएम केयर्स के पास 8 हजार 452 करोड़, खर्च सिर्फ 88 लाख, दान से ज्यादा आ रहा ब्याज
Aman Vaishnav | Aug 19, 2026, 12:15 IST
पीएम केयर्स
दो साल की देरी से आए पीएम केयर्स फंड के ऑडिट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। 8 हजार 452 करोड़ रुपए के कॉर्पस में से सिर्फ 88 लाख रुपए ही खर्च हुए। दान भी सालों से घट रहा है।
एक फंड। साढ़े आठ हजार करोड़ रुपए। और पूरे साल का खर्च सिर्फ 88 लाख रुपए। यह कोई मजाक नहीं, प्रधानमंत्री केयर्स फंड का ताजा ऑडिट है।
दो साल की देरी के बाद आखिरकार पीएम केयर्स फंड ने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के ऑडिटेड आंकड़े जारी किए हैं।
इनमें दो बातें साफ दिखती हैं। दान की रकम लगातार घट रही है। और जो पैसा फंड में पड़ा है, उसका इस्तेमाल लगभग रुका हुआ है।
बता दें कि 31 मार्च 2025 तक फंड में 8 हजार 452 करोड़ रुपए जमा थे। इसी साल सिर्फ 87 से 88 लाख रुपए खर्च हुए। यह कॉर्पस का 0.01% से भी कम है।
फंड में आने वाला पैसा दान से कम, ब्याज से ज्यादा आ रहा है। वहीं 93% रकम अब फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा है। और 324 करोड़ रुपए एजेंसियों ने वापस लौटाए, जिनकी कोई वजह नहीं बताई गई।
कोविड के दौरान जब देशभर में ऑक्सीजन की किल्लत थी, तब आम लोगों ने अपनी जेब से पैसा इस फंड में डाला था। सोचिए, अगर आपने भी उस वक्त दान दिया हो तो? यह जानने का हक आपको है कि वह पैसा कहां गया, और अब क्यों जमा पड़ा है।
खासकर तब जब देश में हर साल कोई ना कोई प्राकृतिक आपदा आती रहती है, जिसके लिए यही पैसा तुरंत काम आ सकता था।
बता दें कि पीएम केयर्स फंड मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था। शुरुआती हफ्तों में ही करीब 3 हजार करोड़ रुपए इसमें जमा हो गए थे।
पहले तीन साल में यह रकम बढ़कर करीब 13 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शुरुआत से ही इस फंड पर सवाल उठते रहे हैं। यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, इसलिए इसका ऑडिट कैग नहीं, बल्कि निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं।
फंड ने यह भी दावा किया कि यह RTI कानून के दायरे में नहीं आता, क्योंकि इसे निजी स्रोतों से पैसा मिलता है।
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आंकड़े देखें तो फंड की कहानी साफ हो जाती है। 2020-21 में फंड को 7 हजार 914 करोड़ रुपए मिले थे, कोविड की पहली लहर के दौरान। उस साल 3 हजार 976 करोड़ रुपए खर्च भी हुए लेकिन उसके बाद हर साल यह आंकड़ा गिरता चला गया।
2023-24 में सिर्फ 16 लाख रुपए खर्च हुए। 2024-25 में यह और घटकर 88 लाख रुपए पर आ गया, हालांकि उस साल फंड को 1,280 करोड़ रुपए मिले।
यहीं से मामला दिलचस्प होता है। फंड में पैसा घट नहीं रहा बल्कि हर साल बढ़ ही रहा है लेकिन यह बढ़ोतरी दान से नहीं ब्याज से हो रही है।
2024-25 में दान की रकम करीब 480 करोड़ रुपए रही, जबकि ब्याज से आमदनी 475 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यानी लोगों का दान और बैंक का ब्याज लगभग बराबर हो गए।
इसे यूं समझिए। जैसे किसी घर में हर महीने कमाई तो आ रही हो, लेकिन घर का कोई सामान इस्तेमाल ना हो, बस तिजोरी में जमा होता जाए।
2023-24 में सरकार ने फंड का ज्यादातर पैसा बचत खाते से निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल दिया। यही वजह है कि ब्याज से आमदनी अचानक बढ़ गई।
2023-24 और 2024-25 दोनों सालों में कॉर्पस का 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा मिला।
एक और चौंकाने वाला आंकड़ा है इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों से मिला रिफंड। 2024-25 में एजेंसियों ने 324.66 करोड़ रुपए फंड को वापस लौटाए, जबकि उस साल खर्च सिर्फ 0.88 करोड़ रुपए हुआ।
यह पैसा किन एजेंसियों को किस काम के लिए दिया गया था, और वापस क्यों आया, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह रिफंड किसी जवाबदेही से बचने के लिए किया गया। यह सवाल अभी अनुत्तरित है।
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बता दें कि पीएम केयर्स फंड प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत काम करता है। इसके ट्रस्टियों में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।
दूसरी तरफ आरटीआई कार्यकर्ता जैसे अंजलि भारद्वाज और कमोडोर लोकेश बत्रा वर्षों से फंड में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, भी इस देरी और कम खर्च पर सवाल उठा चुके हैं।
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फंड की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि यह पैसा भविष्य में कोविड जैसी किसी बड़ी आपदा के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। फंड ने दावा किया कि 2020 के बाद से कॉर्पस अभी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है।
दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि जब देश में हर साल बाढ़, भूकंप या दूसरी आपदाएं आती हैं, तो इतना बड़ा फंड जमा रखने का कोई मतलब नहीं। खासकर जब खर्च की रफ्तार 0.01% से भी कम हो।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस फंड की स्थापना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर चुका है। यह मामला अभी किसी सक्रिय अदालती कार्यवाही में नहीं है।
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फंड ने अभी वित्त वर्ष 2025-26 का ऑडिट अपलोड नहीं किया है। अगर पारदर्शिता को लेकर दबाव बढ़ता रहा, तो आने वाले सालों में ऑडिट जल्दी जारी होने की उम्मीद की जा सकती है।
वहीं जब तक इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों से जुड़े रिफंड और खर्च ना होने की वजह सार्वजनिक नहीं होती, सवाल बने रहेंगे।
बहुत कम लोगों को पता है कि पीएम केयर्स फंड से पहले भी एक राष्ट्रीय राहत कोष मौजूद था, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, जो 1948 से चला आ रहा है।
सवाल यही उठता है कि जब पहले से एक फंड मौजूद था, तो एक नया फंड बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। यह सवाल शुरू से विपक्ष और कार्यकर्ता उठाते रहे हैं।
अब आप क्या करें: पीएम केयर्स फंड की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट खुद पढ़ें और अपने राज्य में सक्रिय आरटीआई अभियानों को फॉलो करें।
क्यों अभी: यह ऑडिट सिर्फ एक दिन पहले ही सार्वजनिक हुआ है, और अभी बहस ताजा है।
आगे देखें: वित्त वर्ष 2025-26 का ऑडिट, जो अभी अपलोड होना बाकी है।
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दो साल की देरी के बाद आखिरकार पीएम केयर्स फंड ने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के ऑडिटेड आंकड़े जारी किए हैं।
इनमें दो बातें साफ दिखती हैं। दान की रकम लगातार घट रही है। और जो पैसा फंड में पड़ा है, उसका इस्तेमाल लगभग रुका हुआ है।
समझें क्या है मामला
फंड में आने वाला पैसा दान से कम, ब्याज से ज्यादा आ रहा है। वहीं 93% रकम अब फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा है। और 324 करोड़ रुपए एजेंसियों ने वापस लौटाए, जिनकी कोई वजह नहीं बताई गई।
यह आपसे क्यों जुड़ा है?
खासकर तब जब देश में हर साल कोई ना कोई प्राकृतिक आपदा आती रहती है, जिसके लिए यही पैसा तुरंत काम आ सकता था।
पहले क्या था
पहले तीन साल में यह रकम बढ़कर करीब 13 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शुरुआत से ही इस फंड पर सवाल उठते रहे हैं। यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, इसलिए इसका ऑडिट कैग नहीं, बल्कि निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं।
फंड ने यह भी दावा किया कि यह RTI कानून के दायरे में नहीं आता, क्योंकि इसे निजी स्रोतों से पैसा मिलता है।
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क्या हुआ और क्यों
2023-24 में सिर्फ 16 लाख रुपए खर्च हुए। 2024-25 में यह और घटकर 88 लाख रुपए पर आ गया, हालांकि उस साल फंड को 1,280 करोड़ रुपए मिले।
यहीं से मामला दिलचस्प होता है। फंड में पैसा घट नहीं रहा बल्कि हर साल बढ़ ही रहा है लेकिन यह बढ़ोतरी दान से नहीं ब्याज से हो रही है।
2024-25 में दान की रकम करीब 480 करोड़ रुपए रही, जबकि ब्याज से आमदनी 475 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यानी लोगों का दान और बैंक का ब्याज लगभग बराबर हो गए।
इसे यूं समझिए। जैसे किसी घर में हर महीने कमाई तो आ रही हो, लेकिन घर का कोई सामान इस्तेमाल ना हो, बस तिजोरी में जमा होता जाए।
2023-24 में सरकार ने फंड का ज्यादातर पैसा बचत खाते से निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल दिया। यही वजह है कि ब्याज से आमदनी अचानक बढ़ गई।
2023-24 और 2024-25 दोनों सालों में कॉर्पस का 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा मिला।
एक और चौंकाने वाला आंकड़ा है इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों से मिला रिफंड। 2024-25 में एजेंसियों ने 324.66 करोड़ रुपए फंड को वापस लौटाए, जबकि उस साल खर्च सिर्फ 0.88 करोड़ रुपए हुआ।
यह पैसा किन एजेंसियों को किस काम के लिए दिया गया था, और वापस क्यों आया, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह रिफंड किसी जवाबदेही से बचने के लिए किया गया। यह सवाल अभी अनुत्तरित है।
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कौन-कौन involved है
दूसरी तरफ आरटीआई कार्यकर्ता जैसे अंजलि भारद्वाज और कमोडोर लोकेश बत्रा वर्षों से फंड में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, भी इस देरी और कम खर्च पर सवाल उठा चुके हैं।
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दोनों sides की बात
दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि जब देश में हर साल बाढ़, भूकंप या दूसरी आपदाएं आती हैं, तो इतना बड़ा फंड जमा रखने का कोई मतलब नहीं। खासकर जब खर्च की रफ्तार 0.01% से भी कम हो।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस फंड की स्थापना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर चुका है। यह मामला अभी किसी सक्रिय अदालती कार्यवाही में नहीं है।
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आगे क्या होगा
वहीं जब तक इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों से जुड़े रिफंड और खर्च ना होने की वजह सार्वजनिक नहीं होती, सवाल बने रहेंगे।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
सवाल यही उठता है कि जब पहले से एक फंड मौजूद था, तो एक नया फंड बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। यह सवाल शुरू से विपक्ष और कार्यकर्ता उठाते रहे हैं।
अब आप क्या करें
क्यों अभी: यह ऑडिट सिर्फ एक दिन पहले ही सार्वजनिक हुआ है, और अभी बहस ताजा है।
आगे देखें: वित्त वर्ष 2025-26 का ऑडिट, जो अभी अपलोड होना बाकी है।
FAQ
- पीएम केयर्स फंड में अभी कितना पैसा जमा है?
31 मार्च 2025 तक फंड में 8 हजार 452 करोड़ रुपए जमा थे, जिसमें से 93% फिक्स्ड डिपॉजिट में है। - 2024-25 में पीएम केयर्स फंड से कितना पैसा खर्च हुआ?
सिर्फ 87 से 88 लाख रुपए खर्च हुए, जो कुल कॉर्पस का 0.01% से भी कम है। - पीएम केयर्स फंड का ऑडिट कैग क्यों नहीं करता?
फंड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, इसलिए इसका ऑडिट निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं, कैग नहीं।
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