संपत्ति और अमीर VS गरीब… हिन्दू या मुसलमान कौन है आगे, इस खबर में सब कुछ

सैम पित्रोदा ने कहा है कि अमेरिका में इनहेरिटेंस टैक्स चलता है। यानी यदि किसी के पास 10 करोड़ डॉलर की प्रॉपर्टी है तो उसकी मृत्यु के बाद बच्चों को सिर्फ 45 प्रतिशत संपत्ति मिलेगी। बाकी 55 प्रतिशत संपत्ति सरकार ले लेगी। भाजपा इसे लेकर कांग्रेस पर हमलावर है।

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नई दिल्ली. देश में आरक्षण पर बहस छिड़ी है। संपत्ति पर आरोप- प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। PM नरेंद्र मोदी के बयान चर्चाओं में हैं। इस चुनाव में एक बार फिर मुसलमान केंद्र ​में आ गए हैं। अब कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने इंटरव्यू में अमेरिका के इनहेरिटेंस (उत्तराधिकार) टैक्स की वकालत की है। हालांकि कांग्रेस ने उनके बयान से किनारा कर लिया है। 

दरअसल, सैम पित्रोदा ने कहा है कि अमेरिका में इनहेरिटेंस टैक्स चलता है। यानी यदि किसी के पास 10 करोड़ डॉलर की प्रॉपर्टी है तो उसकी मृत्यु के बाद बच्चों को सिर्फ 45 प्रतिशत संपत्ति मिलेगी। बाकी 55 प्रतिशत संपत्ति सरकार ले लेगी। भाजपा इसे लेकर कांग्रेस पर हमलावर है।

अब आते हैं आंकड़ों पर...। संपत्ति को लेकर अलग- अलग आंकड़े सामने आते हैं। सरकारी अंक गणित यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) की रिपोर्ट की मानें तो भारत की 20 फीसदी आबादी ही सबसे अमीर है। इसके उलट अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम का दावा है कि भारत की 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों का हक है।

देश में मचा सियासी घमासान 

कुल मिलाकर देश में संपत्ति और अल्पसंख्यकों पर सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के घोषणा- पत्र पर पीएम मोदी की टिप्पणी चर्चाओं में है। उन्होंने राजस्थान के बांसवाड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस की सरकार आई तो वो लोगों की संपत्तियां लेकर ज्यादा बच्चों वालों और घुसपैठियों में बांट देगी। 

मनमोहन सिंह पर हमलावर 

मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब रखेंगे। उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे और उन्हें बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भाइयो-बहनो, ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों, ये आपका मंगलसूत्र भी नहीं बचने देंगे। ये यहां तक आ जाएंगे। 

क्या कहा था राहुल ने?

इधर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि घोषणा- पत्र में संपत्ति लेकर उसे बांटने का कोई वादा नहीं है। यह जरूर है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस की सरकार बनने के बाद फाइनेंशियल और इंस्टीट्यूशनल सर्वे कराने की बात कही थी। उन्होंने यह कहा था कि हम पता लगाएंगे कि हिंदुस्तान का धन किसके हाथों में है। जो आपका हक बनता है, वो हम आपको देने का काम करेंगे। 

शहरों की 46 फीसदी आबादी सबसे अमीर 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) ने संपत्ति के आधार पर पांच श्रेणियां बनाई हैं। इनमें सबसे गरीब, गरीब, मिडिल, अमीर और सबसे अमीर की श्रेणी है। NFHS का सर्वे कहता है कि भारत के शहरी क्षेत्रों की करीब 46 फीसदी आबादी 'सबसे अमीर' है। गांवों की सिर्फ 8% जनसंख्या 'सबसे अमीर' की श्रेणी में आती है।

अंतर भी समझ लीजिए, कौन अमीर- कौन गरीब?

NFHS के मुताबिक हिन्दू और मुस्लिम धर्मों की करीब 20 प्रतिशत आबादी 'सबसे गरीब' है। वहीं, 19 प्रतिशत जनसंख्या 'सबसे अमीर' है। धर्म के आधार पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा संपत्ति के मालिक जैन हैं। जैन धर्म को मानने वाले 80 फीसदी से ज्यादा लोग 'सबसे अमीर' की श्रेणी में आते हैं। 59 फीसदी सबसे अमीरों के साथ सिख संप्रदाय दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर ईसाई (26% आबादी) आते हैं। 

30 प्रतिशत के पास प्रेशर कुकर नहीं 

जो भी हो पर देश की बड़ी आबादी के पास दैनिक उपयोग में आने वाले सामान की भी कमी है। NFHS-5 कहता है कि देश की 30 फीसदी आबादी के पास प्रेशर कुकर नहीं है। 30 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास टीवी नहीं है। करीब 75 प्रतिशत आबादी के पास न एसी है और न कूलर। यहां तक कि 15 प्रतिशत लोगों के पास कुर्सी और 40 फीसदी के पास टेबल भी नहीं है। 

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MP में 15% तो CG में 12% सबसे अमीर 

NFHS-5 के अनुसार, मध्यप्रदेश की 15 प्रतिशत आबादी 'सबसे अमीर' है। छत्तीसगढ़ के 12 प्रतिशत लोग सबसे अमीर हैं। राजस्थान में 22 प्रतिशत तो गुजरात में 27 फीसदी आबादी सबसे अमीर है। ऐसे ही यूपी में 18 फीसदी व महाराष्ट्र में 28 प्रतिशत आबादी सबसे अमीर की श्रेणी में है। 

ऑक्सफैम: 40% प्रॉपर्टी पर 1% का हक?

इधर अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम की पिछले वर्ष जनवरी में आई रिपोर्ट कुछ अलग जानकारी देती है। ऑक्सफैम के अनुसार, भारत की 40.5 प्रतिशत से ज्यादा आबादी पर सिर्फ 1 प्रतिशत लोगों का हक है। रिपोर्ट में यह भी जिक्र था कि भारत अमीरों का देश बन रहा है। दलित, आदिवासी, मुस्लिम, महिलाएं और मजदूर पीड़ित हो रहे हैं।

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