पुणे में तीन साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा

Pawan Modiya | Jun 29, 2026, 23:48 IST
फांसी की सजा
पुणे की एक विशेष अदालत ने तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी 65 वर्षीय व्यक्ति को फांसी की सजा दी है। घटना के 60 दिन के भीतर फैसला आया। कोर्ट ने इसे दुर्लभतम मामला बताया। मुख्यमंत्री ने इसे तेज न्याय की मिसाल कहा।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • पुणे की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
    • तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या का मामला था।
    • दोषी 65 वर्षीय व्यक्ति को फांसी की सजा मिली है।
    • घटना के 60 दिन के भीतर ही फैसला आ गया।
    • कोर्ट ने इसे दुर्लभतम मामलों में से एक बताया है।

    महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बड़ा फैसला सामने आया है। एक विशेष अदालत ने तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा दी है। यह फैसला घटना के सिर्फ 60 दिन के भीतर आया है, जो देश में किसी भी ऐसे मामले में सबसे तेज फैसलों में शामिल है।



    यह घटना पुणे जिले के भोर तालुका के नसरापुर गांव में हुई थी। एक मई को यह घटना हुई थी, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।



    कोर्ट ने क्या कहा

    विशेष अदालत के एडिशनल जज एसआर सालुंखे ने इस मामले को दुर्लभतम मामला करार दिया। उन्होंने दोषी भीमराव कांबले की उम्र को आधार बनाकर नरमी की मांग खारिज कर दी। जज ने कहा कि दोषी की पुरानी हिंसक गतिविधियों को देखते हुए उसकी मानसिकता बेहद खतरनाक है। जज ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध इतना क्रूर था कि इससे समाज की चेतना हिल गई। उन्होंने कहा कि पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी, जिसके साथ हुआ व्यवहार पूरी तरह अमानवीय था।



    बचाव पक्ष ने दोषी की उम्र को नरमी का आधार बनाने की कोशिश की थी। लेकिन कोर्ट ने इसे उल्टा एक गंभीर कारक माना। जज के मुताबिक इस उम्र में भी दोषी की मानसिकता में कोई सुधार नहीं दिखा।



    जांच और सुनवाई कैसे हुई

    इस मामले की जांच और सुनवाई तेजी से पूरी हुई। दोषी को घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने सिर्फ 16 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।



    कोर्ट में आरोप 28 मई को तय किए गए थे। इसके बाद 25 जून को दोषी करार दिया गया। यानी घटना के 55वें दिन ही दोषसिद्धि हो गई थी। अब 29 जून को कोर्ट ने सजा का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक ही दिन में दस गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें कुछ बच्चे भी शामिल थे। पूरे मामले में कुल 55 गवाहों से पूछताछ की गई।



    पीड़िता के पिता ने जताई संतुष्टि

    पीड़िता के पिता ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि परिवार कोर्ट के फैसले से संतुष्ट है। उनके मुताबिक परिवार पहले से ही सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था। पिता ने कहा कि अब वे चाहते हैं कि फांसी की सजा पर अमल हो। उनके मुताबिक इंसाफ तभी पूरा होगा जब सजा लागू हो जाएगी।



    अभियोजन पक्ष का तर्क

    विशेष सरकारी वकील अजय मिसार ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उनके मुताबिक अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के 12 पुराने फैसलों का हवाला दिया था। इससे यह साबित करने में मदद मिली कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है।



    मिसार ने कहा कि दोषी ने यह अपराध बेहद ठंडे दिमाग से और सोच-समझकर किया था। उनके मुताबिक अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा था कि दोषी किसी भी रहम का हकदार नहीं है।



    मुख्यमंत्री ने की तारीफ

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले को तेज न्याय की नई मिसाल बताया। उन्होंने विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि यह फैसला आने वाले समय के लिए एक उदाहरण बन सकता है। फडणवीस ने कहा कि अगर ऐसे क्रूर अपराधियों के खिलाफ डर पैदा करना है, तो समय पर इंसाफ मिलना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस मामले में लगातार सुनवाई करने के लिए कोर्ट का भी शुक्रिया अदा किया।



    निर्भया कानून के बाद भी चिंता बरकरार

    जज सालुंखे ने अपने फैसले में एक अहम बात भी कही। उनके मुताबिक निर्भया केस के बाद बच्चों से जुड़े अपराधों में तेज सुनवाई के लिए खास कानून और अदालतें बनाई गई थीं। लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं। उनके मुताबिक समाज की सामूहिक चेतना अब भी ऐसी घटनाओं से हिल जाती है। यह टिप्पणी इस बात की तरफ इशारा करती है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।



    आगे क्या होगा

    अदालत का फैसला आ गया है, लेकिन फांसी की सजा पर अमल होने से पहले अभी कानूनी प्रक्रिया बाकी है। ऐसे मामलों में ऊपरी अदालतों में अपील का प्रावधान होता है। अभी यह देखना बाकी है कि यह मामला आगे किस दिशा में जाता है। फिलहाल इस फैसले ने देशभर में बच्चों की सुरक्षा और तेज न्याय व्यवस्था पर एक नई बहस शुरू कर दी है।



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