राहुल गांधी और INDIA गठबंधन ने SIR को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Amresh Kushwaha | Oct 15, 2026, 15:15 IST
SIR पर बढ़ी चुनाव आयोग की मुश्किलें!
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की याचिका में एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। साथ ही इस पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।
Supreme Court issued notice Election Commission regarding SIR electoral rolls. petition filed Rahul Gandhi, Leader of Opposition Lok Sabha, INDIA alliance challenged SIR process sought stay.

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की याचिकाओं पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।



एसआईआर पर कोर्ट का नोटिस

एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस मामले में कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और नौ अन्य नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती दी है।



मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी का भी नाम शामिल है।



नोटिस के वक्त सीजेआई ने क्या कहा

सीजेआई ने यह बात मौखिक रूप से कही। उन्होंने नाम नहीं लिया है।



12 अक्टूबर को क्या हुआ

याचिका दाखिल होने से पहले सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था। इस दौरान कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे।



पहले तय था कि नेता खुद जाकर याचिका दाखिल करेंगे। लेकिन रजिस्ट्री बंद होने का समय नजदीक था। इसलिए वकीलों ने पहले ही याचिका दाखिल कर दी।



इसके बावजूद नेता सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंच गए। इस दौरान वहां काफी भीड़ हो गई और अफरातफरी की स्थिति बन गई।



कौन-कौन हैं याचिकाकर्ता

एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिका में इंडिया गठबंधन के कई दलों के नेता शामिल हैं। इनमें कांग्रेस से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे हैं। तृणमूल कांग्रेस से सौगत राय और समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव शामिल हैं। वहीं आरजेडी से तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत का नाम भी है।



इसके अलावा माकपा से एमए बेबी, भाकपा से डी राजा और झामुमो से महुआ माजी शामिल हैं। एनसीपी (शरद पवार) से सुप्रिया सुले और आईयूएमएल से ईटी मोहम्मद बशीर भी याचिका से जुड़े हैं। बाद में थोल तिरुमावलवन और सज्जाद अहमद किचलू भी इसमें शामिल हुए।



यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है, जब विपक्ष एसआईआर को लेकर लगातार विरोध कर रहा है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गड़बड़ियां हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।



ओवैसी और दिग्विजय की याचिकाएं

कोर्ट ने एआईएमआईएम (AIMIM - All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen) प्रमुख ओवैसी की याचिका पर भी नोटिस दिया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अलग याचिका पर भी नोटिस दिया गया है।



याचिका में क्या मांगा गया

याचिका में सबसे पहले चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के फैसले से जुड़ी पूरी फाइल मांगी गई है। इसी दिन आयोग ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू करने का फैसला लिया था।



याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट आयोग के फैसलों की जांच करे। यह देखा जाए कि फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 के मुताबिक लिए गए हैं या नहीं। साथ ही निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 18 और टी.एन. शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी ध्यान में रखा जाए। अगर कोई फैसला बिना कानूनी अधिकार के लिया गया है, तो उसे रद्द किया जाए।



याचिका में यह भी कहा गया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले चुनाव आयोग के सदस्य मिलकर लें। इसके अलावा ऑनलाइन फॉर्म 6 की प्रक्रिया भी निर्वाचन पंजीकरण नियमों के मुताबिक हो।



हटाए गए नामों पर पारदर्शिता कैसे

याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाए। यह समिति एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच करे। साथ ही ईवीएम से जुड़ी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए।



याचिका में कहा गया है कि हर बूथ पर हटाए गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं। यह भी बताया जाए कि उनका नाम क्यों हटाया गया। इसके साथ ही उनकी उम्र और लिंग की जानकारी भी दी जाए। जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे हैं, उन्हें दोबारा जुड़वाने की सुविधा मिले।



याचिका में यह भी मांग है कि किसी मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए और उसकी बात सुने बिना न हटाया जाए। पंजाब और दूसरे चुनावी राज्यों के पात्र लोगों को भी आवेदन करने का मौका मिले।



सबसे बड़ी मांग एसआईआर पर रोक लगाने की है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया रोक दी जाए।



सीजेआई ने मुलाकात क्यों ठुकराई

इससे पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) से मिलने का समय मांगा था। खड़गे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। दोनों नेता एसआईआर को लेकर अपनी चिंताएं एक ज्ञापन के जरिए सीजेआई के सामने रखना चाहते थे।



हालांकि, सीजेआई ने मुलाकात से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं। कोर्ट सरकार के प्रशासनिक कामकाज में दखल नहीं दे सकती। उन्होंने यह भी साफ किया कि नेता चाहें तो कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात कोर्ट में रख सकते हैं।



अब आगे क्या होगा

एसआईआर से जुड़े दूसरे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। सीजेआई सूर्यकांत ने संकेत दिया था कि विपक्ष की याचिका पर भी इन मामलों के साथ सुनवाई हो सकती है।



अब सबकी नजर चुनाव आयोग के जवाब पर रहेगी। आयोग के जवाब के बाद ही साफ होगा कि मामला आगे किस दिशा में जाएगा। फिलहाल इस याचिका पर चुनाव आयोग का पक्ष सामने नहीं आया है।



वहीं सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की याचिकाकर्ताओं के आचरण को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में है। यह याचिका एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) एस. प्रसन्ना के जरिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।

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