रामभद्राचार्य को आशुतोष ब्रह्मचारी से जान का खतरा, जगद्गुरु का षड्यंत्र का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला...
- रामभद्राचार्य ने आशुतोष ब्रह्मचारी पर कार्रवाई मांगी।
- आशुतोष के बयानों से जान का खतरा महसूस हो रहा।
- आशुतोष ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR दर्ज कराई।
- दो साल पहले रामभद्राचार्य से ही आशुतोष ने दीक्षा ली।
- आपराधिक रिकॉर्ड: बलात्कार, ठगी, जमीन कब्जा समेत मामले दर्ज।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चित्रकूट में प्रशासन से मांग की है कि आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि आशुतोष के बयानों से उन्हें और उनके उत्तराधिकारी रामचंद्र दास को जान का खतरा महसूस हो रहा है।
आशुतोष ब्रह्मचारी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR (First Information Report – प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराई थी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आशुतोष पर दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। मामले में यह भी सामने आया है कि आशुतोष ने मात्र दो साल पहले रामभद्राचार्य से ही दीक्षा ली थी।
कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी
आशुतोष ब्रह्मचारी का असली नाम आशुतोष पांडेय उर्फ अश्वनी सिंह बताया जाता है। वे उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले हैं। खुद को सहारनपुर की शाकंभरी पीठ का महंत बताते हैं। करीब दो साल पहले उन्होंने तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। उसके बाद से वे धार्मिक मंचों पर सक्रिय हो गए।
आपराधिक रिकॉर्ड की परतें
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आशुतोष ब्रह्मचारी की हिस्ट्रीशीट शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीट संख्या 76A के नाम से दर्ज है। उनका आपराधिक रिकॉर्ड साल 2002 से शुरू होता है।
उनके खिलाफ शामली के अलावा गोंडा, मुजफ्फरनगर और लखनऊ में भी मुकदमे दर्ज हैं। इनमें गौ-हत्या, बलात्कार, ठगी और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए जाते हैं।
शंकराचार्य विवाद से जुड़ा कनेक्शन
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज कराई। शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए आशुतोष की पूरी क्राइम कुंडली सार्वजनिक कर दी।
अब यह विवाद रामभद्राचार्य तक भी आ पहुंचा है। रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच पहले से मतभेद रहे हैं। जब रामभद्राचार्य ने एक पॉडकास्ट में वृंदावन के संत प्रेमानंद पर टिप्पणी की थी, तब अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेमानंद का बचाव किया था।
षड्यंत्र का आरोप
रामभद्राचार्य ने इस पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। उनका कहना है कि इसका मकसद सनातन परंपरा से जुड़े संतों की छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने चित्रकूट प्रशासन से मांग की है कि आशुतोष के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए।
उत्तराधिकारी को भी खतरे का दावा
रामभद्राचार्य ने सिर्फ अपनी नहीं बल्कि अपने उत्तराधिकारी रामचंद्र दास की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
यह मामला अब सिर्फ एक धार्मिक विवाद नहीं रहा। यह सुरक्षा, आपराधिक पृष्ठभूमि और धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।
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