आरबीआई गवर्नर दास भी साइबर अटैक को लेकर चिंतत, कहा- डिपॉजिटर्स के पैसे की रक्षा करना बैंकों का सबसे पवित्र कर्तव्य

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BP Shrivastava
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आरबीआई गवर्नर दास भी साइबर अटैक को लेकर चिंतत, कहा- डिपॉजिटर्स के पैसे की रक्षा करना बैंकों का सबसे पवित्र कर्तव्य

NEW DELHI.भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंकों में गाढ़ी कमाई और जीवनभर की बचत जमा करने वाले डिपॉजिटर्स के पैसे की रक्षा करना बैंकों का सबसे बड़ा और पवित्र कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और सुदृढ़ता प्रभावी गवर्नेंस पर निर्भर करती है जिसे बैंक डिपॉजिटर्स समेत सभी स्टेकहोल्डरों के हितों की रक्षा की जा सके। आरबीआई गवर्नर ने सायबर रिस्क और सायबर अटैक को लेकर भी आगाह किया।





जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा पवित्र कर्तव्य





आरबीआई गवर्नर दास ने कहा कि बैंकों के रिसोर्सेज में बैंकों में पैसा जमा करने वाले डिपॉजिटर्स का सबसे बड़ा हिस्सा है जो अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई और बचत को बैंकों के पास जमा रखते हैं। जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा करना बैंकों का पवित्र कर्तव्य जो बेहतर गवर्नेंस से ही संभव है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। 





सायबर खतरों से किया आगाह 





आरबीआई गवर्नर ने सायबर रिस्क और सायबर अटैक को लेकर भी आगाह किया है। उन्होंने कहा कि सायबर रिस्क को ग्लोबल फाइनैंशियल संस्थाओं के लिए 2023 में टॉप 10 ऑपरेशनल जोखिम के तौर पर दाखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोबस्ट आईटी और इंफॉरमेशन सिक्योरिटी गवर्नेंस से ऐसे जोखिमों का पता पहले से जहां लगाया जा सकेगा और ऑपरेशन में अस्थिरता को कम करने में मदद मिलेगी साथ सिक्योरिटी से जुड़े हादसों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। दास ने कहा कि बैंक और दूसरे रेग्युलेटेड संस्था इन दिनों बड़े लेवल पर ऑउटसोर्सिंग कर रहे हैं  इस दिशा में ठोस नीति और प्रैक्टिस अपनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने 10 अप्रैल 2023 को बैंकों, एनबीएफसी और दूसरे रेग्युलेटेड एनटीटी के लिए आईटी के आउटसोर्सिंग को लेकर गाइडलाइंस जारी किया है।  





वैश्विक वित्तीय संकट से किया बैंकों को सचेत





आरबीआई गवर्नर ने अमेरिका यूरोप में बैंकिंग क्राइसिस के बाद देश में बैंकों को भविष्य में सतर्क रहने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आए वित्तीय अस्थिरता का भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है। ये हाल में आरबीआई की ओर से किए गए स्ट्रेस टेस्ट के नतीजों से भी पता लगा है, लेकिन गर्वनर ने कहा कि आरबीआई बैंकों के मैनेजमेंट और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से ये उम्मीद करता है कि वे अपने वित्तीय जोखिम की समीक्षा करने के साथ ही न्यूनतम रेग्युलेटरी बेंचमार्क से ज्यादा पूंजी जुटाने पर जोर देते रहेंगे।







बैंकों के बिजनेस मॉडल की जांच शुरू





आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भविष्य के लिए ये जरुरी है कि बैंक वित्तीय, ऑपरेशनल और संगठन के तौर पर बेहद मजबूत रहे। वित्तीय तौर पर मजबूती बनाए रखने के जरिए जरूरी है कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी हो जो मैक्रकोइकोनॉमिक झटकों के बावजूद बैंकों को कमाई कर दे। साथ ही बैंक हर प्रकार के देनदारी का सामना करने के लिए तैयार रहे। दास ने कहा कि इसके चलते आरबीआई ने बैंकों के बिजनेस मॉडल को गहराई से अध्ययन करना शुरू कर दिया है। गवर्नर ने कहा कि स्ट्रेस परीक्षणों से पता चलता है कि अत्यंत संकट वाली स्थिति में भी भारतीय बैंक पूंजी पर्याप्तता अनुपात को न्यूनतम जरूरत से ऊपर रखने में सफल रहेंगे। 







 



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