जेब में नहीं, मोबाइल में होगा पैसा... क्या है RBI का डिजिटल रुपया और यह कैसे करेगा काम?
thesootr Desk | Apr 02, 2026, 15:02 IST
Digital money
RBI ने 1 दिसंबर 2025 को पायलट प्रोजेक्ट के तहत डिजिटल रुपया जारी किया था। इस प्रोजेक्ट के बारे में अब भी कई लोगों को पूरी जानकारी नहीं है। लोगों के मन में कई सवाल हैं, जैसे डिजिटल रुपया क्या है और यह कैसे काम करेगा।
पिछले कुछ समय से एक शब्द बार-बार सुनाई दे रहा है और वह है डिजिटल रुपया। कई लोगों के मन में सवाल है कि ये आखिर है क्या? क्या यह यूपीआई जैसा है? क्या यह क्रिप्टोकरेंसी जैसा है? और सबसे बड़ा सवाल...क्या आने वाले समय में ये नोट और सिक्कों की जगह ले लेगा?
यदि आप भी इन सवालों से उलझे हुए हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। यहां हम आपको बहुत आसान भाषा में समझा रहे हैं कि डिजिटल रुपया क्या है, कैसे काम करता है और आम आदमी के लिए कितना जरूरी है।
सीधी भाषा में कहें तो डिजिटल रुपया (ई रुपया) वही पैसा है, जो आप जेब में रखते हैं। बस फर्क इतना है कि यह मोबाइल में रहता है। जैसे आपके पास 100 रुपए का नोट होता है, उसी तरह डिजिटल रुपया भी 100 रुपए का ही होगा। न कम, न ज्यादा। इसकी वैल्यू बिल्कुल वही रहती है। यह कोई अलग या नया पैसा नहीं है, यह भारतीय रुपए (₹) का ही डिजिटल रूप है। इसे देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है, इसलिए इसकी पूरी गारंटी भी RBI की ही है।
डिजिटल रुपया बनाने और जारी करने का काम RBI करता है। इसे सीधे लोगों तक पहुंचाने का काम बैंक करते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कागज के नोट बैंक के जरिए लोगों तक पहुंचते हैं। RBI डिजिटल रुपया इलेक्ट्रॉनिक रूप में बैंकों को देता है, फिर बैंक आपको इसे इस्तेमाल करने का मौका देते हैं। इसके लिए बैंक आपको एक डिजिटल वॉलेट (E रुपया Wallet) देते हैं, जो आपके मोबाइल में चलता है। फिलहाल यह सिस्टम 1 दिसंबर 2022 से Pilot Project के तौर पर शुरू हुआ है। यानी अभी यह पूरे देश में पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है।
डिजिटल रुपया इस्तेमाल करना बिल्कुल आसान है। सबसे पहले आपको अपने बैंक का CBDC वॉलेट ऐप डाउनलोड करना होगा और इसमें रजिस्ट्रेशन करना होगा। फिर अपने बैंक अकाउंट से पैसा डालकर वॉलेट में E रुपया रखना होगा। इसके बाद आप किसी को पैसे भेज सकते हैं और किसी से भी पैसे ले सकते हैं। इन पैसों से आप दुकानदार को भुगतान भी कर सकते हैं। भुगतान करते समय आप QR कोड स्कैन कर सकते हैं, जैसे आज यूपीआई में करते हैं।
अभी के समय में हां इसके लिए सेविंग अकाउंट होना जरूरी है। डिजिटल रुपया वॉलेट खोलने के लिए आपका बैंक अकाउंट जुड़ा होना जरूरी है, ताकि आपकी पहचान (KYC) आसानी से हो सके। हालांकि RBI आगे इसे और आसान बनाने के नए तरीके भी खोज रहा है।
यहां सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन होता है, इसलिए इसे बहुत आसान तरीके से समझिए।
UPI क्या है? UPI सिर्फ एक पैसे भेजने का तरीका है। इसमें पैसे आपके बैंक अकाउंट से दूसरे के बैंक अकाउंट में जाते है।
डिजिटल रुपया क्या है? यह खुद पैसा है, बस डिजिटल रूप में।
फर्क समझिए:
UPI = पैसा ट्रांसफर करने का सिस्टम
e₹ = खुद पैसा
जब आप UPI से भुगतान करते हैं तो पैसे आपके अकाउंट से कटते है, वहीं जब आप डिजिटल रुपया इस्तेमाल करते हैं तो आप अपने वॉलेट में रखे डिजिटल कैश को देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे जेब से नोट देते हैं। भविष्य में डिजिटल रुपया ऑफलाइन भी चल सकता है, यानी बिना इंटरनेट के भी भुगतान संभव हो सकता है।
बहुत लोग इसे बिटकॉइन या क्रिप्टो से जोड़ते हैं, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं।
क्रिप्टोकरेंसी (crypto currency): किसी सरकार के नियंत्रण में नहीं। कीमत बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती है। भारत में इसे कानूनी मुद्रा का दर्जा प्राप्त नहीं है।
डिजिटल रुपया: पूरी तरह RBI के नियंत्रण में है। वैल्यू हमेशा स्थिर ( रुपए के बराबर) रहती है। यह पूरी तरह वैध करेंसी है।
फिलहाल 19 बैंक इस सिस्टम का हिस्सा हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, फेडरल बैंक, कर्नाटक बैंक, इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक शामिल हैं। ये बैंक अपने मोबाइल ऐप के जरिए ई रुपया वॉलेट देते हैं।
अभी यह सिस्टम पूरी तरह खुला नहीं है, क्योंकि यह पायलट चरण में है। आप तभी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, जब आप इन बैंकों के ग्राहक हो। आपका बैंक आपको यह सुविधा देता है। कई बैंक अपने ग्राहकों को इनवाइट भी कर रहे हैं।
स्टेट 1: CBDC वॉलेट ऐप डाउनलोड करना होगा।
स्टेट 2: रजिस्ट्रेशन और KYC करना होगा।
स्टेट 3: बैंक अकाउंट लिंक करना होगा।
स्टेट 4: और वॉलेट में 'ई रुपया' डालना होगा।
यह सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब है नहीं। RBI ने कहा है कि डिजिटल रुपया कैश की जगह लेने नहीं आया है, बल्कि उसका साथ देने के लिए है। भारत में आज भी कई लोग नकद पर निर्भर हैं, खासकर गांव और छोटे बाजारों में।
कैश जैसा भरोसा देगा। डिजिटल पेमेंट को आसान बनाएगा। नकदी संभालने की लागत कम करेगा। भविष्य में बिना इंटरनेट के भुगतान संभव करेगा।
अगर इसे एक लाइन में समझें तो डिजिटल रुपया यानी जेब का पैसा अब मोबाइल में होगा। इससे आपको कैश रखने की जरूरत कम होगी। पेमेंट और आसान होंगे।
बैंक पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है और लेन-देन तेज और सुरक्षित होगा।
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यदि आप भी इन सवालों से उलझे हुए हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। यहां हम आपको बहुत आसान भाषा में समझा रहे हैं कि डिजिटल रुपया क्या है, कैसे काम करता है और आम आदमी के लिए कितना जरूरी है।
सबसे पहले समझिए कि डिजिटल रुपया है क्या?
कौन जारी करता है और कैसे मिलता है?
कैसे इस्तेमाल करेंगे डिजिटल रुपया?
क्या सेविंग्स अकाउंट जरूरी है?
यूपीआई से कैसे अलग है?
UPI क्या है? UPI सिर्फ एक पैसे भेजने का तरीका है। इसमें पैसे आपके बैंक अकाउंट से दूसरे के बैंक अकाउंट में जाते है।
डिजिटल रुपया क्या है? यह खुद पैसा है, बस डिजिटल रूप में।
फर्क समझिए:
UPI = पैसा ट्रांसफर करने का सिस्टम
e₹ = खुद पैसा
जब आप UPI से भुगतान करते हैं तो पैसे आपके अकाउंट से कटते है, वहीं जब आप डिजिटल रुपया इस्तेमाल करते हैं तो आप अपने वॉलेट में रखे डिजिटल कैश को देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे जेब से नोट देते हैं। भविष्य में डिजिटल रुपया ऑफलाइन भी चल सकता है, यानी बिना इंटरनेट के भी भुगतान संभव हो सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी से कितना अलग है?
क्रिप्टोकरेंसी (crypto currency): किसी सरकार के नियंत्रण में नहीं। कीमत बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती है। भारत में इसे कानूनी मुद्रा का दर्जा प्राप्त नहीं है।
डिजिटल रुपया: पूरी तरह RBI के नियंत्रण में है। वैल्यू हमेशा स्थिर ( रुपए के बराबर) रहती है। यह पूरी तरह वैध करेंसी है।
कौन-कौन से बैंक इसमें शामिल हैं?
इसमें कैसे जुड़ सकते हैं आप?
शुरू करने के लिए आपको क्या करना होगा:
स्टेट 2: रजिस्ट्रेशन और KYC करना होगा।
स्टेट 3: बैंक अकाउंट लिंक करना होगा।
स्टेट 4: और वॉलेट में 'ई रुपया' डालना होगा।
क्या डिजिटल रुपया कैश को खत्म कर देगा?
डिजिटल रुपया क्या करेगा?
आखिर आम आदमी के लिए क्या मतलब है?
बैंक पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है और लेन-देन तेज और सुरक्षित होगा।
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