खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया खर्च, 3.5% पर पहुंची रिटेल महंगाई
शार्ट में समझें क्या है पूरा मामला
- अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.5% हो गई है।
- यह पिछले 13 महीनों का सबसे ज्यादा महंगाई का आंकड़ा है।
- खाना और बाहर रेस्टोरेंट में खाना अब काफी महंगा हो गया है।
- अच्छी बात यह है कि यातायात यानी ट्रांसपोर्ट की कीमतें घटी हैं।
- पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से बाजार पर दबाव दिख रहा है।
भारत में महंगाई एक बार फिर आम आदमी की जेब ढीली कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई 3.5% तक पहुंच गई। मार्च के महीने में यह दर 3.4% दर्ज की गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना था कि महंगाई और बढ़ेगी, लेकिन यह उम्मीद से कम रही।
रेस्टोरेंट जाना हुआ काफी महंगा
इस बढ़ती महंगाई के पीछे खाने के सामान की बड़ी भूमिका है। अप्रैल में फूड और बेवरेज सेक्टर की महंगाई दर 4% हो गई। पिछले महीने यानी मार्च में यह दर 3.7% के करीब थी। रेस्टोरेंट में खाना भी अब लोगों के लिए काफी महंगा पड़ रहा है।
रेस्टोरेंट और होटल सेक्टर में महंगाई 2.9% से सीधे 4.2% पर आ गई। इसका मुख्य कारण ईंधन यानी फ्यूल की बढ़ती हुई कीमतें हैं। होटल मालिकों ने बढ़ी लागत का बोझ अब सीधे ग्राहकों पर डाल दिया है। यही वजह है कि बाहर खाना अब काफी महंगा हो गया है।
किस वजह से बढ़ रही है महंगाई?
कोटक महिंद्रा बैंक की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कुछ जरूरी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन में दिक्कत आने से कीमतें बढ़ी हैं। साथ ही अल-नीनो और अंतरराष्ट्रीय तनाव भी इसका एक बड़ा कारण है। भू-राजनीतिक (Geopolitical) बदलावों की वजह से बाजार में भ्रम का माहौल बना हुआ है।
महंगाई के इस दौर में ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने थोड़ी राहत दी है। अप्रैल में ट्रांसपोर्ट सेवाओं की महंगाई दर में गिरावट देखी गई है। यह दर शून्य से भी नीचे यानी -0.01% पर आ गई है। यात्री परिवहन सेवाओं के सस्ता होने से आम जनता को फायदा मिला।
माल ढुलाई की लागत में अभी भी है बड़ी तेजी
यात्री सेवाओं के विपरीत सामान ढोने की लागत अभी भी काफी ज्यादा है। माल ढुलाई यानी गुड्स ट्रांसपोर्ट की कीमतें महीने भर में 7.6% बढ़ी हैं। इस विसंगति की वजह से जरूरी चीजों की कीमतों पर दबाव बना है। एलएंडटी फाइनेंस की रजनी ठाकुर ने भी इस पर चिंता जताई है।
आने वाले समय में महंगाई को लेकर अनिश्चितता अभी बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक हालात और मानसून इस पर असर डालेंगे। अगर सप्लाई ठीक रही, तो महंगाई की दर में गिरावट आ सकती है। फिलहाल लोगों को अपनी बचत और खर्चों पर ध्यान देना होगा।
देश में कितनी रही खुदरा महंगाई दर?
अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (2024) पर आधारित सालाना खुदरा महंगाई दर 3.48% दर्ज की गई है। अगर इसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो।
- ग्रामीण (Rural) महंगाई दर: 3.74%
- शहरी (Urban) महंगाई दर: 3.16%
खाने-पीने के सामान का क्या है हाल?
कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) पर आधारित खाद्य महंगाई दर भी जारी की गई है। खाने-पीने की चीजों की सालाना महंगाई दर अप्रैल 2026 में 4.20% रही।
- ग्रामीण खाद्य महंगाई: 4.26%
- शहरी खाद्य महंगाई: 4.10%
हाउसिंग सेक्टर में महंगाई की क्या स्थिति है?
अप्रैल 2026 के महीने के लिए सालाना आधार पर हाउसिंग (आवास) महंगाई दर 2.15% दर्ज की गई है।
- ग्रामीण क्षेत्र: 2.65%
- शहरी क्षेत्र: 1.96%
FAQ
- अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई बढ़ने (खुदरा महंगाई दर बढ़ी) का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना है। इसके साथ ही रेस्टोरेंट और होटल की सेवाओं में भी भारी उछाल आया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से होटल मालिकों ने अपनी सर्विस चार्ज बढ़ा दिए हैं। यही कारण है कि महंगाई 13 महीने के उच्चतम स्तर 3.5% पर पहुंच गई। - क्या आने वाले महीनों में महंगाई कम होने की उम्मीद है?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार भविष्य की स्थिति अभी साफ नहीं है। महंगाई का कम होना मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मानसून पर निर्भर करेगा। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और सप्लाई चेन बेहतर होती है, तो राहत मिल सकती है। फिलहाल अल-नीनो के असर और वैश्विक युद्ध की स्थिति के कारण जोखिम बना हुआ है।
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