शाही परिवार की बेटी और दहेज विवाद में फंसी नेहरू की विंटेज रोल्स-रॉयस!
1951 मॉडल की एक विंटेज रोल्स-रॉयस कार, जो कभी बड़ौदा की महारानी की थी और जिसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मंगवाया था, आज एक दहेज विवाद के केंद्र में है। यह मामला ग्वालियर के शाही परिवार की बेटी और एक शैक्षणिक संस्थान संचालित करने वाले परिवार के युवक के बीच है, जिनकी शादी होने के तुरंत बाद ही वे अलग हो गए।
पति ने विंटेज रोल्स-रॉयस कार को दहेज में मांगा
शाही परिवार की बेटी ने आरोप लगाया कि उसका पति उस कार को दहेज के रूप में पाने का इच्छुक था, जो उनके घर में रखी थी। यह 1951 का रोल्स-रॉयस मॉडल है, जिसे H.J. Mulliner & Co. ने खासतौर पर बड़ौदा की महारानी के लिए बनाया था। लड़की के परिवार ने इस मांग को ठुकरा दिया, जिससे उनके बीच मतभेद बढ़ गया।
रिश्ते का अंत और एक दूसरे पर आरोप
लड़के ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप
लड़के ने लड़की और उसके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि शादी के दौरान उसके परिवार से बड़ी रकम ली गई। इसके जवाब में लड़की ने भी दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई, लेकिन मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया। लड़की ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां उसने दावा किया कि लड़के का परिवार न केवल कार, बल्कि मुंबई में एक फ्लैट भी दहेज के रूप में मांग रहा था।
सुलह की कोशिशों में SC ने मध्यस्थ किया नियुक्त
बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता माखीजा ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ के सामने बताया कि लड़की की शाही समुदाय में पुनर्विवाह की कोई परंपरा नहीं है, जिससे उसकी स्थिति और कठिन हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुलझाने के लिए पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर. बसंत को मध्यस्थ नियुक्त किया, जो दोनों पक्षों के बीच सुलह प्रक्रिया का संचालन करेंगे।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक