अब साहब मीटिंग में नहीं, जनसुनवाई में मिलेंगे: 60 मिनट में खत्म करनी होगी बैठक
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार ने लंबी और दिशाहीन बैठकों पर लगाम लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
- कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सचिवों और मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है।
- बैठक अधिकतम 60 मिनट में खत्म करनी होगी, मोबाइल पर पाबंदी होगी।
- जरूरी होने पर ही बैठक बुलाई जाए और मिनट्स 2-3 दिन में तैयार हों।
- केंद्र में रोजाना 20-30 और राज्यों में औसतन दर्जन भर बैठकें होती हैं।
साहब मीटिंग में हैं... अब यह बहाना नहीं चलेगा
राज्य के सचिवालय, पुलिस मुख्यालय या किसी निदेशालय में जब आम आदमी अपनी गुहार लेकर किसी अधिकारी से मिलने जाता है, तो अक्सर एक ही जवाब मिलता है, साहब मीटिंग में हैं। अब यह स्थिति बदलने वाली है।
मोदी सरकार ने गुड गवर्नेंस (Good Governance) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। लंबी और बेनतीजा बैठकों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सचिवों, राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को डीओ (DO - Demi Official) पत्र लिखकर गाइडलाइन जारी की है।
रोज कितनी बैठकें होती हैं?
एक अनुमान के मुताबिक केंद्र सरकार में सचिव स्तर पर रोजाना 20 से 30 बैठकें होती हैं। राज्यों के सचिवालयों में प्रतिदिन औसतन एक दर्जन बैठकें होती हैं। इनमें से कई बैठकें घंटों खिंच जाती हैं और नतीजा कुछ नहीं निकलता।
राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (National Centre for Good Governance) की मदद से यह गाइडलाइन तैयार की गई है। इसमें बैठक का प्रारूप और संचालन का तरीका भी बताया गया है।
60 मिनट से ज्यादा नहीं चलेगी बैठक
गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि बैठक 20 से 50 मिनट तक चले, और अधिकतम एक घंटे से ज्यादा न हो। हर वक्ता के बोलने का समय पहले से तय किया जाए। मिनट्स (Minutes यानी बैठक का विवरण) दो से तीन दिन के अंदर तैयार हों और उनमें जरूरी कामों का स्पष्ट उल्लेख हो।
कैबिनेट सचिव सोमनाथन की 6 अहम गाइडलाइन
पहली गाइडलाइन है स्पष्ट उद्देश्य की। बैठक बुलाने से पहले उसका उद्देश्य, एजेंडा और संभावित नतीजे स्पष्ट होने चाहिए। स्पष्ट एजेंडा पहले से भेजा जाए, अफसर तैयारी करके आएं।
दूसरी गाइडलाइन कहती है कि पहले विकल्पों पर विचार करें। अगर बैठक का उद्देश्य ईमेल, फोन या संदेश से पूरा हो सकता है तो बैठक बुलाने की जरूरत नहीं।
तीसरी गाइडलाइन अवकाश के आगे-पीछे बैठक नहीं रखने की है। यथासंभव अवकाश से पहले और अगले दिन बैठक न रखें। इसके साथ बैठक में मोबाइल और ई-मेल चेक करने और संदेश भेजने पर पूरी तरह पाबंदी होगी।
चौथी गाइडलाइन सीमित भागीदारी पर जोर देती है। बैठक में केवल निर्णय लेने वाले और क्रियान्वयन से जुड़े अफसरों को ही बुलाया जाए, बाकी सबकी मौजूदगी जरूरी नहीं।
पांचवीं गाइडलाइन में समय और हाजिरी तय करने की बात है। बैठक का समय और हर वक्ता के बोलने का वक्त पहले से निर्धारित हो।
छठी और आखिरी गाइडलाइन माहौल के बारे में है। बैठक का माहौल हल्का हो ताकि अधीनस्थ अफसर भरोसे के साथ खुलकर बात यानी काउंटरव्यू (Counterview) रख सकें।
सचिव सोमनाथन ने क्या कहा?
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने अपने पत्र में अधिकारियों को आत्मचिंतन करने की नसीहत दी। उन्होंने लिखा कि नियमित कार्य भले ही उबाऊ लगे, लेकिन यह बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे करियर में अधिकारी अक्सर बुनियादी सावधानियां और तौर-तरीके भूल जाते हैं।
उन्होंने लिखा कि हर अधिकारी को यह सोचना चाहिए कि क्या वह हर साल खुद में सुधार और बेहतर कर रहे हैं, या फिर उसी ढर्रे पर चल रहे हैं। उनका संदेश था कि 30 साल का असली अनुभव बने, न कि एक साल का अनुभव 30 बार दोहराया जाए।
आम आदमी को क्या फायदा?
यदि यह गाइडलाइन सही से लागू हो, तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम नागरिक को होगा। अधिकारी बैठकों में कम समय गंवाएंगे और जनसुनवाई में ज्यादा वक्त देंगे। साहब अब मीटिंग में कम और जनता के सामने ज्यादा दिखेंगे, कम से कम यही उम्मीद है।
FAQ
- सरकार ने बैठकों को लेकर क्या नई गाइडलाइन जारी की है?
उत्तर: केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सभी सचिवों, राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को डीओ पत्र लिखकर बैठकों के लिए 6 सूत्री गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि बैठक जरूरी होने पर ही बुलाई जाए, उसकी अवधि 60 मिनट से ज्यादा न हो, मोबाइल और ईमेल पर पाबंदी हो और मिनट्स 2 से 3 दिन में तैयार किए जाएं।
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