केंद्र सरकार ने 16 एफडीसी दवाओं पर लगाया बैन, जानें वजह
Anjali Dwivedi | Jun 21, 2026, 17:25 IST
16 एफडीसी दवाओं पर लगाया बैन
केंद्र सरकार ने 16 एफडीसी दवाओं पर तत्काल प्रभाव से देशभर में प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें पेनकिलर, एंटीबायोटिक और स्किनकेयर मिश्रण शामिल हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है।
केंद्र सरकार ने 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर तत्काल प्रभाव से पूरे देश में बैन लगा दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इन दवाओं का कोई ठोस चिकित्सीय आधार नहीं है। इनसे मरीजों को फायदे की जगह नुकसान का खतरा ज्यादा है। बैन की गई दवाओं में पेनकिलर, एंटीबायोटिक और स्किनकेयर मिक्स शामिल हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई लंबी वैज्ञानिक समीक्षा के आधार पर आया है।
बैन की गई दवाओं में वे मिश्रण शामिल हैं जो रोजमर्रा में आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं। पेनकिलर (निमोस्लाइड पेन किलर बैन) और मांसपेशियों की ऐंठन में दी जाने वाली दवाओं की श्रेणी में डाइसाइक्लोमाइन, पैरासिटामोल और क्लिडिनियम ब्रोमाइड का मिश्रण बैन हुआ है। इसी के साथ डाइसाइक्लोमाइन, पैरासिटामोल, क्लिडिनियम ब्रोमाइड और क्लोर्डियाजेपॉक्साइड का मिश्रण भी प्रतिबंधित है।
एंटीबायोटिक श्रेणी में अमॉक्सिसिलिन और सेरेशियोपेप्टिडेज का मिश्रण बैन हुआ है। इसी दवा में लैक्टोबेसिलस स्पोरोजेन्स मिलाकर बनाया गया मिश्रण भी प्रतिबंधित है। सेफाड्रॉक्सिल और प्रोबेनेसिड, तथा सेफुरोक्सिम और सेरेशियोपेप्टिडेज के मिश्रण को भी बैन किया गया है।
स्किनकेयर श्रेणी में एलोवेरा या एलो एक्सट्रैक्ट को विटामिन ई, जोजोबा ऑयल, ऑरेंज ऑयल, व्हीट जर्म ऑयल, टी ट्री ऑयल, एलेन्टॉइन और डी-पैंथेनॉल के साथ मिलाकर बनाए गए कई उत्पाद भी बैन लिस्ट में हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत यह अधिसूचना जारी की। मंत्रालय ने कहा कि ये दवाएं चिकित्सीय रूप से न्यायसंगत नहीं पाई गईं। इनसे होने वाले जोखिम के मुकाबले कोई फायदा नहीं है। सरकार का मकसद बाजार में केवल वैज्ञानिक रूप से सिद्ध दवाएं ही रखना है।
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यह फैसला अचानक नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एफडीसी दवाओं की समीक्षा शुरू हुई थी। ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड यानी DTAB (Drugs Technical Advisory Board) ने एक विशेषज्ञ समिति बनाई। इस समिति ने हर मिश्रण की जांच की और जो दवाएं अतार्किक, अवैज्ञानिक या संभावित रूप से हानिकारक पाई गईं, उन्हें बैन की सिफारिश दी।
पहले भी 2021 में एक विशेषज्ञ समिति ने इन एफडीसी दवाओं की जांच की थी। तब पाया गया था कि इनके पक्ष में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
एफडीसी का मतलब है फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC)। यानी ऐसी दवाएं जिनमें दो या दो से अधिक सक्रिय घटक एक निश्चित अनुपात में मिले होते हैं।
इन दवाओं को बनाने का उद्देश्य एक साथ कई लक्षणों का इलाज करना होता है। लेकिन जब दो दवाओं का संयोजन वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हो, तो यह मरीज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। शरीर पर इनके असर को समझना मुश्किल होता है और दुष्प्रभाव की संभावना बढ़ जाती है।
मंत्रालय ने सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर और प्रवर्तन एजेंसियों को कड़ाई से इस आदेश को लागू करने के निर्देश दिए हैं। दवा निर्माता कंपनियां, आयातक, वितरक और अन्य सभी पक्षों को कहा गया है कि वे तुरंत इस कानून का पालन करें।
इन दवाओं का निर्माण या बिक्री जो कंपनियां कर रही थीं, उन्हें अब इन दवाओं को बाजार से वापस लेना होगा। यह बैन देशभर में तत्काल प्रभाव से लागू है।
यह कोई पहली बार नहीं है। मंत्रालय ने खुद माना कि पिछले वर्षों में भी विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई अतार्किक FDC दवाइयों पर बैन लगाया जा चुका है। यह सिलसिला जारी है ताकि बाजार में केवल जरूरी और सुरक्षित दवाएं ही उपलब्ध रहें।
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कौन सी दवाएं हुईं बैन
एंटीबायोटिक श्रेणी में अमॉक्सिसिलिन और सेरेशियोपेप्टिडेज का मिश्रण बैन हुआ है। इसी दवा में लैक्टोबेसिलस स्पोरोजेन्स मिलाकर बनाया गया मिश्रण भी प्रतिबंधित है। सेफाड्रॉक्सिल और प्रोबेनेसिड, तथा सेफुरोक्सिम और सेरेशियोपेप्टिडेज के मिश्रण को भी बैन किया गया है।
स्किनकेयर श्रेणी में एलोवेरा या एलो एक्सट्रैक्ट को विटामिन ई, जोजोबा ऑयल, ऑरेंज ऑयल, व्हीट जर्म ऑयल, टी ट्री ऑयल, एलेन्टॉइन और डी-पैंथेनॉल के साथ मिलाकर बनाए गए कई उत्पाद भी बैन लिस्ट में हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला
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सुप्रीम कोर्ट का था आदेश
पहले भी 2021 में एक विशेषज्ञ समिति ने इन एफडीसी दवाओं की जांच की थी। तब पाया गया था कि इनके पक्ष में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
एफडीसी दवा क्या होती है
इन दवाओं को बनाने का उद्देश्य एक साथ कई लक्षणों का इलाज करना होता है। लेकिन जब दो दवाओं का संयोजन वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हो, तो यह मरीज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। शरीर पर इनके असर को समझना मुश्किल होता है और दुष्प्रभाव की संभावना बढ़ जाती है।
कंपनियों और दुकानों को क्या करना होगा
इन दवाओं का निर्माण या बिक्री जो कंपनियां कर रही थीं, उन्हें अब इन दवाओं को बाजार से वापस लेना होगा। यह बैन देशभर में तत्काल प्रभाव से लागू है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे बैन
FAQ
- सरकार ने 16 एफडीसी दवाओं पर बैन क्यों लगाया?
इन दवाओं में दो या अधिक सक्रिय घटकों का ऐसा मिश्रण था जिसका कोई ठोस चिकित्सीय आधार नहीं था। विशेषज्ञ समिति ने पाया कि इनसे फायदे से ज्यादा नुकसान का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई समीक्षा के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया।
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