सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर सरकार सख्त: फेक न्यूज और नैरेटिव पर मेटा से मांगा जवाब

Manya Jain | Aug 08, 2026, 13:45 IST
social media algorithm narrative meta
सोशल मीडिया एल्गोरिदम को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। मेटा की वैश्विक टीम से एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली समझी जा रही है। सरकार ने संवेदनशील कंटेंट में मानव हस्तक्षेप बढ़ाने को कहा है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम ने केंद्र सरकार के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब चिंता सिर्फ फेक न्यूज या डीपफेक की नहीं है। चिंता उस अदृश्य तकनीक की है, जो तय करती है कि करोड़ों लोगों की स्क्रीन पर क्या दिखेगा। इसी वजह से मेटा की वैश्विक टीम दिल्ली आई है। सरकार यह समझना चाहती है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एल्गोरिदम कैसे काम करता है।



सवाल यह उठ रहा है कि देश क्या देखेगा, यह तय कौन करता है। सरकार यह जानना चाहती है कि किस आधार पर किसी कंटेंट की पहुंच बढ़ाई या घटाई जाती है। साथ ही यह भी समझा जा रहा है कि क्या पेड प्रमोशन या सिफारिशी प्रणाली (Recommendation System) के जरिए लोगों को प्रभावित किया जा सकता है।



कैसे काम करता है यह खेल

सबसे पहले एल्गोरिदम आपकी पसंद समझता है। आप क्या देखते हैं, किस पोस्ट पर रुकते हैं और क्या लाइक-शेयर करते हैं, इसका पूरा विश्लेषण होता है। इसके बाद एल्गोरिदम आपको वही तरह का कंटेंट दिखाना शुरू करता है।



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आपकी रुचि से मिलती-जुलती पोस्ट और ज्यादा एंगेजमेंट वाला कंटेंट अधिक लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसी तरह धीरे-धीरे एक नैरेटिव बनता है। खास कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है और विपरीत कंटेंट को फैलने से रोका जाता है।



बॉट से कैसे बनता है नकली ट्रेंड

कई बार हजारों फर्जी अकाउंट एक साथ एक ही संदेश पोस्ट करते हैं। इससे किसी हैशटैग या वीडियो को कृत्रिम रूप से ट्रेंड कराया जाता है। आम यूजर को लगता है कि यही असली जनमत है।





लेकिन असल में उसके पीछे एक संगठित नेटवर्क भी हो सकता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला ट्रेंड हमेशा जमीनी हकीकत नहीं दिखाता। इसे पहचानना आम यूजर के लिए मुश्किल होता है।



एल्गोरिदम का ऑडिट क्यों मुश्किल है

फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इस वजह से सरकार या कोई स्वतंत्र एजेंसी एल्गोरिदम का तकनीकी ऑडिट नहीं कर सकती। यही वजह है कि एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली अब तक ज्यादातर कंपनियों तक ही सीमित रही है।



मेटा को केंद्र की सख्त नसीहत

राजनीतिक और संवेदनशील कंटेंट की मॉडरेशन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार ने मेटा को सख्त संदेश दिया है। शुक्रवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने मेटा के अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन दिया।



सरकार ने कहा कि राजनीतिक मुद्दों, विरोध प्रदर्शन, CSAM (Child Sexual Abuse Material) और डीपफेक जैसे संवेदनशील मामलों में सिर्फ AI आधारित फैसलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में मानव हस्तक्षेप बढ़ाया जाना चाहिए।



टेलीग्राम फाउंडर की नई चेतावनी

टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने एक नए साइबर खतरे से आगाह किया है। उन्होंने इसे 'टेकडाउन एक्सटॉर्शन' नाम दिया है। उनके अनुसार हमलावर किसी ऑनलाइन ग्रुप या प्लेटफॉर्म पर दबाव बनाते हैं।



इसके बाद वे उसे ऐप स्टोर से हटवाने की कोशिश करते हैं। दुरोव ने दावा किया कि हाल ही में एपल ने बिना पूर्व सूचना के कुछ समय के लिए टेलीग्राम को ऐप स्टोर से हटा दिया था। हालांकि बाद में उसे दोबारा बहाल कर दिया गया।



एक्सपर्ट कोट्स

पावेल दुरोव, संस्थापक, टेलीग्राम उन्होंने 'टेकडाउन एक्सटॉर्शन' नाम के नए साइबर खतरे से आगाह किया। उनके मुताबिक हमलावर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दबाव बनाकर उसे ऐप स्टोर से हटवाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि एपल ने हाल ही में बिना पूर्व सूचना के टेलीग्राम को कुछ समय के लिए ऐप स्टोर से हटाया था।



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