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New Delhi.अयोध्या राम मंदिर बाबरी-मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाने वाले जज वर्तमान में कहां हैं। अयोध्या मामले में पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था। इस बेंच में रंंजन गोगोई के अलावा जस्टिस बोबेडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़,जस्टिस अशोक भूषण और ज​स्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। आईए जानते हैं ये माननीय अब कहां हैं?
जस्टिस अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट के जज रहते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों वाली वेंच का हिस्सा रहे हैं। जिसमें 2019 का अयोध्या के राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद पर निर्णय भी शामिल है। पूर्व जस्टिस नजीर को आंध्रप्रदेश को गर्वनर बनाया गया है। जिसका कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया था और पीएम मोदी पर निशाना साधा है। इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों ने नजीर की नियुक्ति जबरदस्त तरीके से आलोचाना की और यहां तक कह दिया कि यह निर्णय 'न्यायपालिका के लिए खतरा' है।
जस्टिस रंंजन गोगोई
जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से सीजेआई के पद से रिटायर हुए थे। चार माह बाद राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के सांसद के तौर पर मनोनीत किया। वे राज्यसभा पहुंचने वाले तीसरे जज हैं और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत पहले जज। इनसे पहले देश के 21वें चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था। वे 1990 से 1991 तक राज्यसभा सदस्य रहे। इससे पहले वे 1998 से 2004 तक उच्चसदन में रहे। वहीं जस्टिस बहुरुल इस्लाम को कांग्रेस ने 1983 में उनके रिटायरमेंट के पांच माह बाद राज्यसभा भेजा था।
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जस्टिस शरद अरविंद बोबडे
जस्टिस शरद अरविंद बोबडे 23 अप्रैल 2021 को सीजेआई पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने रंजन गोगोई की जगह सीजेआई का पद संभाला था। जस्टिस बोबडे 8 साल सुप्रीम कोर्ट में जज रहे। उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जस्टिस बोबडे ने कोई आधिकारिक सार्वजनिक पद नहीं संभाला। वे महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नागपुर के चांसलर हैं।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
स्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भारत के मौजूदा सीजेआई हैं। उन्होंने दो माह पहले, नवंबर 2022 में भारत के 50वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली है। वे भारत के सबसे लम्बे समय तक चीफ जस्टिस रहने वाले जसिटस वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं।
जस्टिस अशोक भूषण
जस्टिस अशोक भूषण जुलाई 2021 को रिटायर हुए थे। चार माह बाद नवंबर में उन्हें नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रीब्यूनल (NCLAT) का चेरयपर्सन बनाया गया। उनका कार्यकाल चार साल तक रहेगा। उनसे पहले यह पद एक साल आठ माह तक खाली रहा था। कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने अक्टूबर 2021 में उनकी नियुक्ति को स्वीकृति दी थी।
जस्टिस अब्दुल नजीर
जस्टिस अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट से जनवरी 2023 में रिटायर हुए हैं। एक माह बाद उन्हें आंध्रप्रदेश का गर्वनर बनाया गया है। वे आयोध्या मामले में फैसला सुनाने वाले 5 जजों में से एकमात्र मुस्लिम थे। वे नोटबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर फैला सुनाने वाले जजों की बेंच में भी शामिल थे।
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