फांसी से मौत की सजा जारी रहेगी, गोली मारना, इंजेक्शन या करंट जैसे ऑप्शन अभी नहीं
Pawan Modiya | Aug 18, 2026, 18:48 IST
फांसी की सजा
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की जगह इंजेक्शन या गोली से मौत की सजा देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा फांसी बदलने का ठोस आधार नहीं, लेकिन सरकार वैज्ञानिक समीक्षा कर सकती है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने फांसी से मौत की सजा वाली याचिका खारिज कर दी।
- वकील ऋषि मल्होत्रा ने फांसी की जगह इंजेक्शन या गोली मांगी थी।
- याचिका में फांसी को दर्दनाक और कैदी की गरिमा के खिलाफ बताया गया।
- कोर्ट ने कहा फांसी पर 1983 का फैसला बदलने की जरूरत नहीं।
- सरकार चाहे तो नई वैज्ञानिक समीक्षा करके तरीका बदल सकती है।
इस याचिका में फांसी की सजा की जगह नए तरीके मांगे गए थे। इसमें इंजेक्शन, गोली और करंट जैसे विकल्प शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि अभी फांसी बदलने का ठोस आधार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने एक रास्ता भी खुला रखा है। सरकार चाहे तो आगे इस पर वैज्ञानिक तरीके से समीक्षा कर सकती है।
क्या थी याचिका
मल्होत्रा ने मांग की कि फांसी की जगह कोई और तरीका अपनाया जाए। उन्होंने इंजेक्शन, गोली या करंट का सुझाव दिया। उनका कहना था कि कैदी को खुद तरीका चुनने का विकल्प भी मिलना चाहिए।
संविधान का हवाला दिया
साल 1983 में दीना बनाम भारत संघ मामले में एक बड़ा फैसला आया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को सही ठहराया था। तीन जजों की बेंच ने कहा था कि फांसी संविधान के मुताबिक है। मल्होत्रा चाहते थे कि इस फैसले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। उनकी दलील थी कि अब हालात बदल चुके हैं। इसलिए पुराने फैसले पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है।
जजों ने क्या कहा
सरकार के लिए रास्ता खुला
पहले क्या हुआ था
मौत की सजा पर असर नहीं
सरकार का पुराना रुख
आगे क्या हो सकता है
जरूरी FAQ
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फांसी बदलने वाली याचिका खारिज कर दी है। भारत में मौत की सजा अभी भी फांसी से ही दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 1983 के पुराने फैसले को बदलने का ठोस आधार नहीं मिला। इसलिए मौजूदा कानून जारी रहेगा।
क्या सरकार भविष्य में फांसी की जगह कोई और तरीका अपना सकती है?
हां, सुप्रीम कोर्ट ने इसकी गुंजाइश खुली रखी है। सरकार चाहे तो एक्सपर्ट कमेटी बनाकर वैज्ञानिक और मेडिकल आधार पर समीक्षा कर सकती है। इसमें कानून, फॉरेंसिक मेडिसिन और न्यूरोसाइंस के जानकार शामिल हो सकते हैं। कोर्ट का फैसला इस समीक्षा में रुकावट नहीं बनेगा।
याचिका में फांसी की जगह कौन से तरीके सुझाए गए थे?
याचिका में इंजेक्शन, गोली और करंट जैसे विकल्प सुझाए गए थे। वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा था कि फांसी दर्दनाक है और कैदी की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने यह भी मांग की थी कि कैदी को खुद तरीका चुनने का विकल्प मिले।
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