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NEW DELHI. फांसी की सजा अमानवीय और क्रूर है। दुनिया के कई देशों में यह चलन बंद हो चुका है। अब भारत में भी इस मसले पर चर्चा शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च, मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार को यह विचार करना चाहिए क्या फांसी के बजाय मौत की सजा देने का कोई दूसरा तरीका हो सकता है। जो लटकाने वाले तरीके से कम दर्दनाक हो। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमन को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाकर इस बारे में अध्ययन और जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जवाब के साथ आने को कहा
कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि क्या फांसी के विकल्प में कोई दूसरा कम तकलीफदेह तरीका है? क्या दूसरे साइंटिफिट तरीके हैं जो इससे बेहतर हो सकते है? सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र से चर्चा शुरू करने के लिए कहा है। इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी को जवाब के साथ आने के लिए कहा गया है।
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अगली सुनवाई 2 मई को
याचिका में शूटिंग, लीथल इंजेक्शन और करंट के जरिए मौत की सजा देने का सुझाव दिया गया है। लॉ कमीशन की रिपोर्ट को पढ़कर सुनाते हुए एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि फांसी की सजा देना बहुत क्रूर प्रोसेस है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 मई को होगी।
कुछ बड़े अस्पतालों के साइंटिफिक डेटा की जरूरत: CJI
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें एनएलयू, एम्स समेत कुछ बड़े अस्पतालों के साइंटिफिक डेटा की जरूरत है। फांसी लगने के बाद मौत होने में कितना समय लगता है। फांसी से कितना दर्द होता है, फांसी के लिए किस तरह के संसाधनों की जरूरत होती है।
फांसी की सजा दोनों ही कंडीशन में सही: जस्टिस
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि मृत्यु में गरिमा होनी चाहिए। इसमें कम दर्द देने वाली प्रतियोगिता नहीं होनी चाहिए। फांसी की सजा दोनों ही कंडीशन में सही है। उन्होंने पूछा कि क्या लीथल इंजेक्शन वाला सुझाव सही है। अमेरिका में यह पाया गया था कि लीथल इंजेक्शन से तुरंत मौत नहीं होती है। यह दर्दनाक भी है। शूटिंग की बात करें तो यह मानवाधिकारों का उल्लंघन और आर्मी का पसंदीदा टाइम-पास होगा।
वकील ऋषि मल्होत्रा ने लगाई है याचिका
ऋषि मल्होत्रा नाम के एक वकील हैं। उन्होंने लॉ कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए फांसी देने को क्रूर और अमानवीय तरीका बताया है। इस बाबत उन्होंने एक याचिका दाखिल की है। मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने इसके कुछ विकल्पों के बारे में भी चर्चा की। इस याचिका के मुताबिक, फांसी की पूरी प्रक्रिया बहुत लंबी होती है। मौत सुनिश्चित करने के लिए फांसी के बाद भी सजा पाने वाले को आधे घंटे तक लटकाए रखा जाता है।
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