फ्रीडम ऑफ स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, जानें कब खत्म होती है बोलने की आजादी?

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Rahul Garhwal
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फ्रीडम ऑफ स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, जानें कब खत्म होती है बोलने की आजादी?

NEW DELHI. फ्रीडम ऑफ स्पीच के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार सख्ती दिखाई है। पहला मामला हेट स्पीच से जुड़ा था। केरल के एक न्यूज चैनल पर बैन से जुड़ा हुआ मामला है। पिछले मामले में तो सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नपुंसक तक कह दिया था। वहीं न्यूज चैनल बैन के मामले में कहा गया है कि अगर किसी मीडिया संस्थान की कवरेज या राय में सरकार की आलोचना की जाती है। इसे देश विरोधी नहीं माना जाएगा। मीडिया के सवाल उठाने के अधिकार पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश विरोध जैसे शब्दों के इस्तेमाल करने पर भी सख्त टिप्पणी की है।



सरकार की आलोचना करना देश विरोधी नहीं



केरल के एक मलयाली न्यूज चैनल पर बैन लगा दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये बैन हटा दिया है। इस चैनल से बैन हटना प्रेस की स्वतंत्रता के हिसाब से बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार की आलोचना से जुड़ी खबर चलाना या सरकार की आलोचना करना देश विरोधी नहीं है। ऐसे में मीडिया संस्थान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है।



मीडिया अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र



सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह से किसी मीडिया चैनल के सिक्योरिटी क्लीयरेंस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। मीडिया अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। ओपिनियन रखने की स्वतंत्रता को देश की सुरक्षा के नाम पर रोकने से अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की स्वतंत्रता पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।



चैनल पर बैन सही नहीं



सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि चैनल के शेयर होल्डर्स के जमाते इस्लामी के साथ लिंक होने जैसी हवा-हवाई बातों की वजह से भी चैनल पर बैन सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने तो केरल हाई कोर्ट के फैसले पर भी अचरज जताया। कोर्ट ने कहा कि केरल हाईकोर्ट को बंद लिफाफे (सील्ड कवर) में जो जानकारी दी गई थी उसके बावजूद केरल हाई कोर्ट ने चैनल पर बैन को सही कैसे ठहराया गया?



बोलने की आजादी को लेकर क्या कहता है देश का कानून?



देश आजाद होने यानी 1947 के बाद जब संविधान बना, तो भारतीय नागरिकों को अनुच्छेद 19 में वो सारे अधिकार दे दिए गए, जिसके लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी थी। संविधान में अनुच्छेद 19 से 22 तक कई सारे अधिकार दिए गए हैं।




  • अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत देश के सभी नागरिकों को वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। अनुच्छेद 19 के ये अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही मिले हैं। अगर कोई बाहर का यानी विदेशी नागरिक है तो उसे ये अधिकार नहीं दिए गए हैं।


  • वाक और अभिव्यक्ति की आजादी को आसान भाषा में समझे तो एक भारतीय नागरिक इस देश में लिखकर, बोलकर, छापकर, इशारे से या किसी भी तरीके से अपने विचारों को व्यक्त कर सकता है।



  • वहीं अनुच्छेद 19 (2) में उन नियमों के बारे में भी जानकारी दी गई है जब बोलने की आजादी को प्रतिबंधित किया जा सकता है। वो परिस्थितियां हैं।




    • कुछ ऐसा नहीं बोला जाना चाहिए जिससे भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरा हो। राज्य की सुरक्षा को खतरा हो। पड़ोसी देश या विदेशी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बिगड़ने का खतरा हो, सार्वजनिक व्यवस्था के खराब होने का खतरा हो, शिष्टाचार या सदाचार के हित खराब हो, कोर्ट की अवमानना हो, किसी की मानहानि हो, अपराध को बढ़ावा मिलता हो।




    हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त



    सुप्रीम कोर्ट ने एक और मामले की सुनवाई के दौरान सरकार को नपुंसक तक कह दिया था। कोर्ट का कहना है कि सरकार नपुंसक है और समय पर एक्शन नहीं लेती। हेट स्पीच के इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये तक कह दिया था कि अगर नफरती भाषणों पर रोक नहीं लग रही तो आखिर सरकार के होने ना होने से क्या फर्क पड़ता है।



    हेट स्पीच को IPC में शामिल करने की पहल



    हाल ही में भड़काऊ भाषण और हेट स्पीच को इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) के तहत शामिल करने की पहल की गई है। गृह मंत्रालय ने इसके लिए कुछ प्रस्ताव पर विचार भी किया, लेकिन ये अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। दरअसल, गृह मंत्रालय ने हेट स्पीच पर अंकुश लगाने और इसे सजा दिलाने का प्रावधान भले ही बनाने की पहल की हो, लेकिन इसके लिए रास्ता आसान नहीं है।

     


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