हिंदी पढ़ाने से रोक नहीं सकते, सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु में सरकार पर सख्त
Sandeep Kumar | Sept 17, 2026, 18:40 IST
तमिलनाडु में हिंदी पढ़ाने से रोक नहीं सकते
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा, हिंदी पढ़ाने से रोका नहीं जा सकता। कोर्ट नवोदय विद्यालय मामले पर सुनवाई कर रहा था। राज्य की दो-भाषा नीति और केंद्र की तीन-भाषा नीति में टकराव है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु हिंदी विवाद पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
- अदालत ने हिंदी पढ़ाने से रोकने पर सवाल उठाया।
- कोर्ट ने चेन्नई और दिल्ली को अलग मानने से इनकार किया।
- मामला हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने से जुड़ा है।
- तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी।
तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस पर सुनवाई की। बेंच ने साफ कहा कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी, ऐसा नहीं हो सकता।
कोर्ट ने एक और अहम बात कही। चेन्नई और दिल्ली को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जा सकता। कोर्ट के मुताबिक चेन्नई में रहने वाले लोग दिल्ली से अलग नहीं हैं। यही बात दिल्ली पर भी लागू होती है।
नवोदय विद्यालय पर टकराव क्यों
नवोदय विद्यालय समिति इन स्कूलों को चलाती है। यह समिति केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इनका विरोध कर रही है। मद्रास हाईकोर्ट ने हर जिले में नवोदय विद्यालय शुरू करने का आदेश दिया था। राज्य सरकार इसी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
राज्य की सबसे बड़ी आपत्ति भाषा को लेकर है। नवोदय विद्यालयों में तीन भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। इनमें हिंदी भी शामिल है। तमिलनाडु में सिर्फ दो भाषा नीति लागू है। यहां तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है।
तमिलनाडु सरकार का पक्ष
गुप्ता ने यह भी कहा कि नवोदय विद्यालय सीधे केंद्र सरकार के स्कूल नहीं हैं। इन्हें एक अलग सोसायटी चलाती है। उन्होंने सहकारी संघवाद का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक केंद्र और राज्य के बीच सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए।
राज्य सरकार ने खर्च का मुद्दा भी उठाया। गुप्ता ने कहा कि आगे चलकर स्कूलों का खर्च राज्य को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान के भुगतान में देरी का जिक्र भी किया।
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र का रुख
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज पेश हुए। उन्होंने कहा कि राज्य को सिर्फ जमीन देनी है। बाकी व्यवस्था केंद्र सरकार करेगी। राज्य को हर जिले में स्कूल के लिए जमीन खोजनी होगी।
तमिलनाडु में हिंदी विरोध का पुराना इतिहास
केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति यानी एनईपी (NEP – National Education Policy) लागू की थी। इसमें छात्रों के लिए तीन भाषाएं सीखने की व्यवस्था है। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था उसकी मौजूदा नीति से अलग है। राज्य अपनी दो-भाषा नीति पर कायम रहने की बात कह रहा है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा, यह सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर करेगा। भाषा नीति और शिक्षा अधिकार को लेकर यह टकराव आने वाले समय में और चर्चा में रह सकता है।
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