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News in Short
- भारत सरकार यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क 40% तक घटाने की योजना बना रही है।
- इससे मर्सिडीज, BMW और रेनो जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में फायदा होगा।
- आयात ड्यूटी घटाने का निर्णय एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत लिया जा सकता है।
- महिंद्रा और टाटा के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर ड्यूटी कट अगले पांच सालों तक लागू नहीं होगा।
- भारत का कार बाजार 2030 तक 6 मिलियन यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे नए निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
News in Detail
भारत सरकार यूरोपियन यूनियन (EU) से आयात होने वाली कारों पर बड़ी टैक्स राहत दे सकती है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, यूरोपीय बाजार से आने वाली कारों पर 110% टैरिफ लगता है। इसे घटाकर 40% करने की योजना है। यह भारत के ऑटो बाजार को खोलने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। दोनों पक्ष एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के करीब पहुंच चुके हैं। इस समझौते का ऐलान मंगलवार को हो सकता है।
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इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर सहमति
सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ने EU के 27 देशों से आने वाली कुछ कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर सहमति दी है। यह कटौती उन कारों पर होगी, जिनकी कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। भविष्य में इस टैक्स को 10% तक लाने की योजना है। इससे Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री आसान होगी। सूत्रों ने बताया कि बातचीत गोपनीय है और बदलाव संभव हैं।
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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन घरेलू ऑटो इंडस्ट्री लंबे समय से संरक्षित रही है। वर्तमान में भारत आयातित कारों पर 70% से 110% तक टैरिफ लगाता है। इस नीति की आलोचना कई वैश्विक ऑटो दिग्गजों ने की है, जिनमें टेस्ला के मालिक एलॉन मस्क भी शामिल हैं।
आयात शुल्क 40% करने का प्रस्ताव
भारत हर साल करीब 2 लाख इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) कारों के लिए आयात शुल्क तुरंत 40% करने का प्रस्ताव दे रहा है। यह ऑटो सेक्टर को खोलने की दिशा में अब तक का सबसे आक्रामक कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह कोटा आखिरी वक्त पर बदला भी जा सकता है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को पांच साल तक ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा। इसका उद्देश्य Mahindra & Mahindra और Tata Motors जैसे कंपनियों का निवेश सुरक्षित रखना है। पांच साल बाद EVs पर ड्यूटी कट लागू किया जाएगा।
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सस्ती कीमत पर बेच सकेंगी इम्पोर्टेड मॉडल्स
कम आयात कर से Renault, Stellantis और Volkswagen जैसी कंपनियों को फायदा होगा। लग्जरी सेगमेंट में Mercedes-Benz और BMW को भी राहत मिलेगी। ये कंपनियां भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग करती हैं, लेकिन ऊंचे टैरिफ से इनकी ग्रोथ सीमित रही। कम टैक्स से कंपनियां इम्पोर्टेड मॉडल्स को सस्ती कीमत पर बेच सकेंगी। इससे वे ज्यादा मॉडल्स के साथ बाजार परख सकेंगी, इससे पहले कि वे लोकल प्रोडक्शन में निवेश करें।
Mahindra-Tata मिलकर दो-तिहाई
भारत का 4.4 मिलियन यूनिट सालाना कार बाजार मुख्य रूप से Maruti Suzuki, Mahindra और Tata के कब्जे में है। Mahindra और Tata मिलकर दो-तिहाई बाजार हिस्सेदारी रखते हैं। यूरोपीय कारमेकरों की हिस्सेदारी 4% से कम है।
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कई कंपनियां नए निवेश की तैयारी कर रही
भारतीय कार बाजार 2030 तक 6 मिलियन यूनिट सालाना तक पहुंचने की उम्मीद है। इस ग्रोथ को देखते हुए कई कंपनियां नए निवेश की तैयारी कर रही हैं। Renault यूरोप के बाहर ग्रोथ के लिए भारत में नई रणनीति के साथ वापसी कर रही है। Volkswagen Group अपनी Skoda ब्रांड के जरिए निवेश चरण को अंतिम रूप दे रही है।
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