थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

Sandeep Kumar | Feb 09, 2026, 23:57 IST
thirupurankundram
सुप्रीम कोर्ट ने थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के नल्लिथोप्पू क्षेत्र में नमाज की अनुमति बरकरार रखी। नमाज केवल रमजान और बकरीद तक सीमित रहेगी। इस क्षेत्र में जानवरों की कुर्बानी पर भी रोक रहेगी।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने नल्लिथोप्पू क्षेत्र में नमाज की अनुमति देने का आदेश बरकरार रखा।
  • मद्रास हाईकोर्ट ने नमाज की अनुमति रमजान और बकरीद तक सीमित कर दी थी।
  • त्योहारों के दौरान पशु बलि और मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध रहेगा।
  • एम इमाम हुसैन ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को संतुलित बताते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

News in Detail

सुप्रीम कोर्ट ने थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के नल्लिथोप्पू क्षेत्र में नमाज की अनुमति देने का मद्रास हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा। आदेश के तहत त्योहारों के दौरान पशु बलि और मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध रहेगा। हाईकोर्ट के फैसले को स्थानीय निवासी एम इमाम हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।



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SC का इनकार

तमिलनाडु के मदुरै स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी से जुड़े विवादित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें नल्लिथोप्पू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को केवल रमजान और बकरीद के अवसर पर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश संतुलित प्रतीत होता है और इसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है।



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इस क्षेत्र में जानवरों की कुर्बानी पर रोक

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के नल्लिथोप्पू इलाके में नमाज की अनुमति रमजान और बकरीद तक सीमित कर दी थी। इसके अलावा, कोर्ट ने इस क्षेत्र में जानवरों की कुर्बानी पर भी रोक लगा दी थी। इस फैसले को स्थानीय निवासी एम इमाम हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।



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नमाज की अनुमति केवल रमजान और बकरीद पर

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल ने नल्लिथोप्पू की 33 सेंट भूमि को मुस्लिम समुदाय की मान्यता दी है। भूषण ने तर्क दिया कि भूमि के स्वामित्व को स्वीकारने के बावजूद हाईकोर्ट ने नमाज की अनुमति केवल रमजान और बकरीद तक सीमित कर दी। यह समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर अनुचित प्रतिबंध है।



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मद्रास हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश संतुलित था। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा।





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