डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर नाटो का जवाब ये हमारी लड़ाई नहीं
News in Short
- ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति रोक दी।
- इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।
- डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों से सैन्य मदद की अपील की थी।
- ट्रंप की अपील पर नाटो ने मदद करने से इनकार कर दिया।
- जर्मनी, ब्रिटेन, और अन्य यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई में भाग लेने से मना किया।
News in Detail
ईरान में खामेनेई समेत 40 से ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को जीत की उम्मीद थी। लेकिन 18 दिन बाद हालात बदल गए। युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नहीं दिख रहा। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति रोक दी। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हुआ। ट्रंप नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खोलने की अपील कर रहे हैं। इन देशों ने स्पष्ट किया कि वे वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला उस समय आया जब ट्रंप ने चेतावनी दी कि नाटो का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
अमेरिकी नौसेना खुद बहुत ताकतवर
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी ने कहा है कि वह किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले में कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए सैन्य योगदान का सवाल नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन बमबारी से उसे झुकाना सही तरीका नहीं है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और अमेरिकी नौसेना खुद बहुत ताकतवर है।
ब्रिट्रेन ने किया इनकार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश युद्ध में नहीं फंसेगा। उन्होंने माना कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना जरूरी है। यह काम आसान नहीं है। कोई भी कदम देशों की सहमति से उठाया जाएगा। यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 20% तेल और गैस सप्लाई होता है, जो ईरान के कारण प्रभावित हो रहा है।
संकट का हल बातचीत से ही निकलेगा
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत से ही निकलेगा। उनका देश नौसैनिक मिशन बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं। ये मिशन युद्ध में नहीं बदले जा सकते। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी कहा कि वे अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने की थी नाटो से अपील
ट्रंप अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को होर्मुज से फायदा होता है, उन्हें इसकी सुरक्षा में हिस्सा लेना चाहिए। ट्रंप ने ब्रिटेन से नाराजगी जताई, लेकिन उम्मीद है कि वह शामिल होगा। यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज तक मिशन बढ़ाने से इनकार किया। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल कोई इच्छा नहीं है। यूरोपीय देशों को अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद पर स्पष्टता चाहिए। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें ट्रंप की रणनीति और आगे की योजना समझनी है।
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अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए तैयार
इजराइल ने ईरान के कई शहरों पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा विमान नष्ट किया। इजराइली सेना ने कहा कि वे अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए तैयार हैं। प्रवक्ता नदाव शोशानी ने कहा कि सेना ने लंबी अवधि के लिए योजनाएं बनाई हैं। इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है।
वे ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना चाहते हैं जो इजराइल के लिए खतरा हैं। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है। इजराइली सेना ने कहा कि ईरान के पास हजारों ठिकाने हैं जो निशाना बन सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने कहा था कि अब ईरान में निशाना बनाने के लिए कुछ नहीं बचा है।
ईरान की इजराइल और अमेरिका को चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता। हालांकि युद्ध का अंत इस तरह होना चाहिए कि दुश्मन फिर से हमला न करे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी दी कि अमेरिकी सेना को वियतनाम जैसा अंजाम झेलना पड़ सकता है। अमेरिका ने बताया कि इस युद्ध में 200 सैनिक घायल हुए हैं। 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हैं।