घट रही है भारत की फर्टिलिटी रेट, फैमिली प्लानिंग पर क्या है UNFPA की नई रिपोर्ट
UNFPA Survey India: आज के दौर में जब आप किसी भारतीय घर में दादी से बात करेंगे, तो वे अपनी ग्रैंड डॉटर की तारीफ करेंगी। वे कहेंगी कि ग्रैंड डॉटर ने कॉलेज पूरा किया और शहर में अच्छी जॉब कर रही है। लेकिन साथ ही एक हल्की चिंता भी दिखेगी कि वह शादी और फैमिली लाइफ शुरू करने में कोई जल्दी नहीं दिखा रही है।
यह सिर्फ किसी एक परिवार की कहानी नहीं है। यह पूरे देश के करोड़ों युवाओं की असलियत बन चुकी है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का नाम डेमोग्राफिक फ्यूचर्स सर्वे है।
इस सर्वे में दुनियाभर के 73 देशों के एक लाख 8 हजार से ज्यादा युवाओं से बातचीत की गई है। इसमें 15 से 24 साल के युवा शामिल थे। सर्वे में एक बहुत ही सीधा सवाल पूछा गया था। सवाल ये था कि क्या युवा आज भी शादी और बच्चे चाहते हैं? और अगर हां, तो कौन सी चीजें उनके रास्ते में रुकावट बन रही हैं?
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि आज का युवा परिवार के विचार से दूर नहीं भाग रहा है। वह बस इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या उनके पास परिवार संभालने की सही स्थिति मौजूद है? आइए इस पूरी रिपोर्ट को प्रैक्टिकल तरीके से समझते हैं।
फर्टिलिटी रेट में आई बड़ी गिरावट
भारत की कुल फर्टिलिटी रेट अब 2.0 पर आ चुकी है। ये दर रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से काफी नीचे मानी जाती है। कई एक्सपर्ट इसे 'बेबी बस्ट' या आबादी का संकट कह रहे हैं। लेकिन UN संस्था इसे किसी खतरे की घंटी नहीं मानती है।
यह लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का नतीजा है। लड़कियों की शिक्षा में सरकार ने काफी ज्यादा निवेश किया है। मैटरनल हेल्थ सर्विसेज का दायरा पूरे देश में बढ़ा है। गर्भनिरोधक (कॉन्ट्रासेप्टिव) के बेहतर विकल्प अब आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
कम उम्र में लड़कियों की शादी में बड़ी गिरावट आई है। वहीं 18 साल से कम में शादी अब 20.1% रह गई है। पहले ये आंकड़ा 23.3% के आसपास दर्ज किया गया था। यह भारत की नीतियों और सामाजिक बदलाव की बड़ी सफलता है।
रास्ते में आ रही व्यावहारिक रुकावटें
युवा आज भी दो बच्चों का परिवार बनाना सबसे बेहतर मानते हैं। चार में से 10 महिलाएं दो बच्चों का परिवार चाहती हैं। तीन में से एक पुरुष भी यही राय रखते नजर आए। लेकिन इच्छा होने के बावजूद युवा फैसले लेने से हिचक रहे हैं।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी और पैसा है। वहीं दस में से चार युवाओं ने आर्थिक तंगी को वजह बताया। रहने के लिए अपने घर की कमी दूसरी बड़ी वजह है।
नौकरी में अनिश्चितता और जॉब सिक्योरिटी तीसरी मुख्य समस्या है। इसके बाद बच्चों की सही परवरिश की चिंता सामने आती है। युवा चाहते हैं कि वे बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें।
महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ
भारतीय समाज में युवा महिलाएं एक अलग चुनौती झेल रही हैं। वे बिना वेतन के घरेलू कामों में काफी समय देती हैं। महिलाएं रोज पांच घंटे से ज्यादा घर में काम करती हैं। पुरुष घरेलू कामों में सिर्फ आधा घंटा ही समय देते हैं। सौ में से सिर्फ 15 युवा महिलाएं पेड जॉब करती हैं।
वहीं 100 में से 55 युवा पुरुष नौकरियों में कार्यरत हैं। इन्हीं वजहों से महिलाएं करियर और फैमिली में फंस जाती हैं। उन्हें दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ता है। यह स्थिति किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं कही जा सकती। महिलाओं को सही सपोर्ट मिलना बेहद जरूरी हो गया है।
पर्यावरण और मेंटल हेल्थ की चिंता
आज के दौर में पुरानी चिंताओं (युवा बेरोजगारी दर) के साथ नई दिक्कतें भी जुड़ गई हैं। क्लाइमेट चेंज युवाओं के मानसिक सुकून को बुरी तरह एफेक्ट कर रहा है। लगभग आधे युवा पर्यावरण के बदलावों से काफी डरे हुए हैं। आर्थिक असुरक्षा और हिंसा की खबरें भी तनाव बढ़ा रही हैं।
युवाओं में बेरोजगारी की दर काफी अधिक बनी हुई है। मेन्टल हेल्थ और एंग्जाइटी पर अब खुलकर बातें शुरू हुई हैं। युवा देख रहे हैं कि भविष्य की नींव मजबूत है या नहीं। मजबूत नींव मिलने पर ही वे आगे बढ़ने का फैसला लेते हैं।
राज्यों के बीच बड़ा अंतर और नीतियां
भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थिति काफी अलग दिखाई देती है। बिहार में प्रजनन दर अभी भी 2.7 के स्तर पर है। वहीं सिक्किम में यह दर घटकर सिर्फ 1.0 रह गई है। केरल, दिल्ली और तमिलनाडु में दर काफी नीचे आ चुकी है।
उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य अभी सुधार कर रहे हैं। पूरे देश के लिए एक ही नियम लागू नहीं किया जा सकता। हर राज्य की अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं।
भारत में 15 से 24 साल के 25.5 करोड़ युवा रहते हैं। यह हमारे देश के लिए डेमोग्राफिक डिविडेंड की एक बड़ी खिड़की है। हमें समय रहते युवाओं की सही मदद और सहयोग करना होगा। सस्ता चाइल्डकेयर और फ्लेक्सिबल जॉब टाइमिंग देना बेहद जरूरी है।
Reference:
- The Hindu (UNFPA Representative in India)
- Demographic Futures Survey 2026 - United Nations Population Fund (UNFPA)
FAQ
- UNFPA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रजनन दर कितनी है?
UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 2.0 प्रति महिला हो गई है। यह रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से नीचे है, जो बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का परिणाम है। - भारतीय युवा परिवार बसाने में देरी क्यों कर रहे हैं?
युवाओं के मुताबिक, पैसों की कमी, रहने के लिए घर की समस्या, नौकरी की अनिश्चितता और बच्चों के पालन-पोषण की चिंताएं इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा क्लाइमेट चेंज भी एक वजह है। - भारत में कम उम्र में लड़कियों की शादी के आंकड़ों में क्या बदलाव आया है?
रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र में शादी होने वाली लड़कियों का प्रतिशत 23.3% से घटकर 20.1% पर आ गया है, जो सामाजिक सुधार और जागरूकता को दर्शाता है।
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