फंड था, मरीज भी थे... फिर क्यों सरेंडर किए 54 करोड़? पढ़ें आयुष विभाग की रिपोर्ट
Mukesh Sharma | Aug 03, 2026, 19:29 IST
54 करोड़ सरेंडर, आयुष विभाग की बड़ी नाकामी
नेशनल आयुष मिशन में आए फंड का राजस्थान सरकार पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाई। स्थिति यह है कि राज्य सरकार को 54 करोड़ रुपए से अधिक केंद्र को सरेंडर करने पड़े। यह राशि आयुष सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए आई थी।
समझें क्या है पूरा मामला
- राष्ट्रीय आयुष मिशनमें आए फंड का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया।
- समय पर काम पूरे नहीं होने पर केंद्र को 54 करोड़ सरेंडर करने पड़े।
- यह राशि प्रदेश में आयुष अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए मिली थी।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में राशि लौटाना कमजोर प्लानिंग को दर्शाता है।
राजस्थान में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आयुष में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा सेवाएं आती हैं।
केंद्र से मिली भारी-भरकम राशि का उपयोग न कर पाने के कारण राजस्थान सरकार को 54.21 करोड़ रुपए सरेंडर करने पड़े हैं। इतना ही नहीं, करीब 3 करोड़ रुपये आज भी बिना किसी उपयोग के पड़े हैं।
कितने आए, कितने खर्च हुए और कितना लौटाया?
इस फंड का मकसद प्रदेश के आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी अस्पतालों की स्थिति सुधारना, दवाएं उपलब्ध कराना और नए निर्माण करवाना था।
लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान ने 510.51 करोड़ रुपए में से 453.29 करोड़ रुपए का ही उपयोग किया। समय पर राशि का उपयोग नहीं करने से उसे 54.21 करोड़ रुपए सरेंडर करने पड़े। बिना इस्तेमाल के बची राशि 3 करोड़ रुपए आज भी फाइलों और खातों में फंसी है।
आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का स्वीकार किया कि समय पर कुछ निर्माण और योजना से जुड़े काम पूरे न हो पाने के कारण राशि का सरेंडर करना पड़ा।
राज्य में आयुष सेवाओं का ढांचा: कहां कितनी सुविधा?
राज्य में आयुष सेवाओं का ढांचा: कहां कितनी सुविधा?
आंकड़ों को देखें तो यूनानी विभाग में डिस्पेंसरियों की तुलना में डॉक्टरों की संख्या काफी कम है। इससे कई अस्पतालों में ताले लटके रहने जैसी स्थिति बन जाती है।
जब मरीज लाखों में, तो फंड वापस क्यों?
चूरू सांसद क्षेत्र में आयुष चिकित्सा को लेकर मरीजों में काफी उत्साह है। केवल वर्ष 2025-26 के दौरान चूरू के आयुर्वेद अस्पतालों में 5,17,454 मरीजों ने अपना इलाज कराया। यानी आधा मिलियन से ज्यादा लोग केवल एक जिले में आयुर्वेद पर भरोसा जता रहे हैं।
चूरू में स्टाफ की जमीनी स्थिति
| विभाग | अस्पताल | डॉक्टर | नर्सिंग स्टाफ/कंपाउंडर | परिचारक |
|---|---|---|---|---|
| आयुर्वेद | 118 | 107 | 108 | 46 |
| होम्योपैथी | 16 | 15 | 12 | 1 |
| यूनानी | 13 | 9 | 6 | — |
प्रशासनिक ढिलाई या प्लानिंग की कमी?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राशि का सही समय पर उपयोग किया गया होता तो कई डिस्पेंसरियों की हालत को सुधारा जा सकता था। दूरदराज के गांवों में जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती थी। मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं जैसे बैठने की जगह और जांच उपकरण जुटाए जा सकते थे।
कोविड के बाद भरोसा बढ़ा, पर सुविधाएं नहीं
डॉ. मिश्रा का कहना है कि कई हॉस्पिटल में दवा नहीं है, कहीं कुर्सी नहीं है। मतलब बेसिक सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है। एक-एक कमरे में आयुर्वेदिक चिकित्सालय चल रहे हैं। अगर आयुर्वेदिक को सरकार गंभीरता से ले तो एलोपैथिक चिकित्सा पर यह भारी पड़ सकती है।
सर्वे में आयुष को माना प्रभावी
अपनी तरह के इस पहले सर्वे में यह उजागर हुआ कि 15 वर्ष से अधिक आयु के 57.4 शहरी और 44.9% ग्रामीण लोग आयुष को समझते हैं। एक साल के दौरान राजस्थान में 6.7 करोड़ बार बिना भर्ती आयुष उपचार लिया गया। गैर-भर्ती उपचार पर प्रति परिवार औसत 1,086 रुपए और भर्ती उपचार पर 2,274 रुपए खर्च आया।
अधिकारियों का दावा, सुधार हुआ
राजस्थान में आयुर्वेद की स्थिति को लेकर राजस्थान डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई रेस्पांस नहीं आया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय साफ है कि नेशनल आयुष मिशन का शत-प्रतिशत लाभ आम जनता तक तभी पहुंचेगा, जब अफसरशाही खत्म होगी। बजट का सही समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाएगा।
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