होटलों को मिलेगी सरकारी जमीन, मंजूरी के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा
Jageshwar prasad | Aug 03, 2026, 13:03 IST
होटलों को मिल सकेगी सरकारी जमीन, 50 करोड़ निवेश अनिवार्य
राजस्थान में होटलों और रिसॉर्ट्स को सरकारी जमीन अलॉट करने की तैयारी है। इसके लिए राजस्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में होटलों और रिसॉर्ट्स को मिल सकेगी सरकारी जमीन।
- राजस्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा है।
- इस योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 50 करोड़ जरूरी।
- होटलों को गांवों में कृषि और शहरों में आवासीय डीएलसी दरों पर मिलेगी जमीन।
राजस्व विभाग ने पर्यटन परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि आवंटित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया है।
इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु मौजूदा होटलों, रिसॉर्ट्स और नई पर्यटन इकाइयों को सरकारी जमीन उपलब्ध कराना है।
न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 50 करोड़ किया
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों से परामर्श के बाद सरकार ने न्यूनतम निवेश की सीमा 100 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर दी है।
पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निवेश की न्यूनतम सीमा में आधी कटौती करने से अब मध्यम और बड़े दोनों स्तर के निवेशक राजस्थान में आकर्षित होंगे।
मौजूदा होटलों को भी मिलेगी सरकारी जमीन
निवेशकों और होटल स्वामियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने जिला स्तरीय समिति दरों को आधार बनाया है।
ग्रामीण इलाकों में पर्यटन परियोजनाओं के लिए जमीन का आवंटन कृषि डीएलसी पर किया जाएगा। शहरी या विकसित क्षेत्रों में यह आवंटन आवासीय डीएलसी दर पर लागू होगा।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि डीएलसी दरों पर पारदर्शी तरीके से जमीन मुहैया कराने से रियल एस्टेट सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी। वास्तविक निवेशकों को वाजिब दाम पर जमीन मिल सकेगी।
5% जमीन टूरिज्म फैसिलिटी जोन के रूप में आरक्षित
इन सभी निकायों को अपने अधिकार क्षेत्र में पर्यटन परियोजनाओं के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान करने और उसे आरक्षित रखने का काम सौंपा गया है। इसके अलावा मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान में कुल जमीन का 5% तक हिस्सा टूरिज्म फैसिलिटी जोन के रूप में चिन्हित होगा।
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राजस्व अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद अंतिम रूप से विधि विभाग के पास परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार इस नीति को पूरे प्रदेश में लागू कर देगी।
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