यूनिसेफ क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026: दुनिया के 180 करोड़ बच्चे सूखे के खतरे में

Anjali Dwivedi | Jun 17, 2026, 18:00 IST
यूनिसेफ क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026
यूनिसेफ रिपोर्ट 2026 के अनुसार दुनिया के 180 करोड़ बच्चे सूखे के खतरे में हैं। करीब 110 करोड़ बच्चे तीन या अधिक जलवायु खतरों का सामना एक साथ कर रहे हैं।

यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026 में बड़ा खुलासा हुआ है। दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे सूखे के सीधे खतरे में हैं। 120 करोड़ बच्चों पर भीषण गर्मी का संकट मंडरा रहा है। करीब 110 करोड़ बच्चे एक साथ तीन या उससे ज्यादा जलवायु खतरों से घिरे हैं। सोमालिया, पाकिस्तान और कुछ अफ्रीकी देशों को सबसे ज्यादा जोखिम वाले देशों में रखा गया है।



बच्चों का बचपन छीन रहा जलवायु संकट

दुनिया का शायद ही कोई बच्चा हो जो किसी न किसी जलवायु खतरे से बाहर हो। यूनिसेफ की नई रिपोर्ट यही कह रही है। बाढ़, तूफान, सूखा और भीषण गर्मी जैसी आपदाओं ने बच्चों की पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य तक सब कुछ प्रभावित किया है। स्कूल बंद हो रहे हैं। घर उजड़ रहे हैं।



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85 देशों में 24 करोड़ बच्चों की पढ़ाई बाधित

साल 2024 में 85 देशों में 24.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई जलवायु आपदाओं की वजह से प्रभावित हुई। यह आंकड़ा बताता है कि संकट सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। स्कूल बाढ़ में डूबे, तूफान में टूटे या गर्मी की वजह से बंद किए गए। हर मामले में नुकसान बच्चों का ही हुआ।



जलवायु परिवर्तन के कारण कितने बच्चे खतरे में

रिपोर्ट के मुताबिक 29.6 करोड़ बच्चे भीषण गर्मी और हीटवेव के सीधे संयुक्त खतरे में हैं। नदियों की बाढ़ से 33.7 करोड़ बच्चे प्रभावित हो सकते हैं। 100 करोड़ से ज्यादा बच्चे मलेरिया के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहते हैं। 40 लाख से ज्यादा बच्चे छह या उससे अधिक जलवायु खतरों की जद में एक साथ हैं।



सबसे ज्यादा जोखिम वाले देश कौन से हैं

यूनिसेफ ने सोमालिया, मेडागास्कर, म्यांमार, कंबोडिया और पाकिस्तान को सबसे असुरक्षित देशों में रखा है। बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और तंजानिया में भी बड़ी संख्या में बच्चे सूखे के खतरे में हैं। अफ्रीका में करीब 100 करोड़ बच्चे मलेरिया के जोखिम वाले इलाकों में रह रहे हैं। यह आंकड़ा महाद्वीप की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



वायु प्रदूषण भी बड़ा खतरा

यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनिया का हर बच्चा वायु प्रदूषण की मार झेल रहा है। यह खतरा उन देशों में भी है जहां बाढ़ या सूखे का असर अपेक्षाकृत कम है। वायु प्रदूषण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इससे उनकी लंबे समय की सेहत पर असर पड़ता है।



सरकारों से यूनिसेफ की सीधी मांग

यूनिसेफ ने सरकारों को चेतावनी दी है कि जलवायु खतरे तेज होने के साथ-साथ बच्चों के सामने जोखिम (जलवायु संकट असर) और बढ़ेंगे। संस्था ने मांग की है कि जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश किया जाए। रिपोर्ट में खासतौर पर स्कूलों को आपदा-प्रतिरोधी बनाने पर जोर दिया गया है। ताकि किसी भी आपदा में पढ़ाई न रुके।



FAQ

  1. यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026 में क्या कहा गया है?
    रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के लगभग सभी बच्चे किसी न किसी जलवायु खतरे का सामना कर रहे हैं। 180 करोड़ बच्चे सूखे और 120 करोड़ बच्चे भीषण गर्मी के खतरे में हैं। 110 करोड़ बच्चे एक साथ तीन या ज्यादा खतरों की चपेट में हैं।
  2. जलवायु आपदाओं से बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ा?
    साल 2024 में 85 देशों के 24.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई जलवायु आपदाओं की वजह से प्रभावित हुई। बाढ़, तूफान और भीषण गर्मी की वजह से स्कूल बंद करने पड़े। यूनिसेफ ने स्कूलों को आपदा-प्रतिरोधी बनाने की मांग की है।
  3. सबसे ज्यादा जलवायु जोखिम वाले देश कौन से हैं?
    यूनिसेफ ने सोमालिया, मेडागास्कर, म्यांमार, कंबोडिया और पाकिस्तान को सर्वाधिक जोखिम वाले देशों में रखा है। बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और तंजानिया भी इस सूची में हैं। अफ्रीका में करीब 100 करोड़ बच्चे मलेरिया के जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।

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