गोआ की अनोखी दिवाली परंपरा, यहां भगवान राम नहीं श्रीकृष्ण हैं हीरो, जानें यहां क्यों जलते हैं नरकासुर के पुतले
देशभर में Diwali को श्रीराम की वापसी के रूप में मनाता है। (दिवाली 2025) वहीं गोआ में इसका मुख्य आकर्षण नरकासुर वध दिवस' यानी नरक चतुर्दशी है।
गोआ की दिवाली में भगवान श्री कृष्ण को मुख्य हीरो माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने दुष्ट राक्षस नरकासुर का वध किया था।
इस पर्व को shree krishna की नरकासुर पर विजय की याद में मनाया जाता है, जो अंधकार और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
दशहरा में जैसे रावण का पुतला जलाते हैं, वैसे ही यहां नरक चतुर्दशी की सुबह बड़े-बड़े, डरावने नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं।
सबेरे सूरज निकलने के साथ ही, गांव और शहर के सब लोग मिलकर डरावने नरकासुर के पुतले जलाते हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक, नरकासुर एक बहुत क्रूर राजा था जिसने 16 हजार स्त्रियों को कैद कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से उसका वध किया। क्योंकि उसे एक स्त्री के हाथों मरने का श्राप था।
नरकासुर को मारने के बाद श्रीकृष्ण ने उसकी कैद से सोलह हजार स्त्रियों को आजाद कराया।
गोआ में इस नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के त्यौहार से ही दिवाली शुरू हो जाती है। वहां के लोग मानते हैं कि जब तक बुराई खत्म नहीं होती, तब तक असली दिवाली नहीं मनाई जा सकती।