क्या है यूपीएससी टॉपर आस्था जैन का EWS विवाद, सोशल मीडिया पर क्यों हो रही खिंचाई
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट आते ही खुशियों के साथ-साथ विवाद भी शुरू हो गए हैं। इस समय सोशल मीडिया पर आस्था जैन के नाम की काफी चर्चा हो रही है। आस्था ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 9 हासिल की है।
आस्था की ये सफलता बहुत बड़ी है, लेकिन लोग उनके सर्टिफिकेट्स पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोग इसे EWS फ्रॉड कह रहे हैं, तो कुछ इसे नियमों की कमी बता रहे हैं। फिलहाल यूपीएससी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। आइए डिटेल में जानें आस्था जैन यूपीएससी विवाद के बारे में...
क्या है विवाद की असली जड़
सोशल मीडिया यूजर्स और इन्फ्लुएंसर्स का दावा है कि आस्था जैन पहले से ही सर्विस में हैं। यूपीएससी 2024 की परीक्षा में उनकी 186वीं रैंक आई थी। उस समय उनका चयन जनरल कैटेगरी में हुआ था और वे IPS बनीं। अब, 2025 के रिजल्ट में उनकी रैंक 9 है। उन्हें IAS का पद मिलेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आस्था जैन ने EWS कोटे का लाभ लिया है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जो व्यक्ति पहले से ही एक क्लास-1 अफसर है, वो अचानक आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) कैसे हो गया? लोग इसे सिस्टम का दुरुपयोग बता रहे हैं। साथ ही मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
क्या कहती है आस्था की मार्कशीट
इंटरनेट पर आस्था जैन की दो अलग-अलग सालों की मार्कशीट वायरल हो रही है:
- यूपीएससी एग्जाम 2024: इस साल उनके कुल 969 नंबर थे। वे जनरल कैटेगरी से चुनी गई थीं।
- यूपीएससी 2025: इस साल उनके 1033 नंबर आए। उन्होंने EWS कैटेगरी से परीक्षा पास की।
इन दोनों मार्कशीट्स के अंतर ने ही विवाद को हवा दी है। आलोचकों का तर्क है कि सरकारी नौकरी में आने के बाद परिवार की आय बढ़ जाती है। ऐसे में EWS सर्टिफिकेट मिलना असंभव होना चाहिए।
आखिर क्या कहते हैं EWS कैटेगरी के नियम
EWS रिजर्वेशन का लाभ उन लोगों को मिलता है जिनकी फैमिली एनुअल इनकम 8 लाख रुपए से कम हो। इसके अलावा उनके पास एक तय सीमा से ज्यादा खेती की जमीन या घर नहीं होना चाहिए। यहां एक कानूनी पेच ये है कि EWS सर्टिफिकेट पिछले साल की इनकम के बेस पर बनता है। यूपीएससी में फॉर्म भरते समय जो इनकम दिखाई जाती है, वही मान्य होती है। ऐसे में अगर परीक्षा फॉर्म भरने के समय आस्था की फैमिली इनकम कम थी, तो टेक्निकली वे सही हो सकती हैं।
आस्था जैन का बैकग्राउंड
आस्था उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली हैं। वे एक साधारण फैमिली बैकग्राउंड से आती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं। उनके समर्थक कह रहे हैं कि उन्होंने बहुत गरीबी और मेहनत से ये मुकाम पाया है।
समर्थको के मुताबिक, आईपीएस बनने के बाद की सैलरी मौजूदा फाइनेंसियल ईयर में जुड़ती है। लेकिन सर्टिफिकेट पुराने फाइनेंसियल ईयर की इनकम पर बेस होता है।
क्या वाकई ये धोखाधड़ी है
अभी तक इस मामले में धोखाधड़ी शब्द का इस्तेमाल करना जल्दबाजी होगी। यूपीएससी में डाक्यूमेंट्स की जांच की एक बहुत ही स्ट्रिक्ट प्रोसेस होता है।
यदि कोई सर्टिफिकेट गलत पाया जाता है, तो आयोग चयन को तुरंत रद्द कर देता है। फिलहाल, न तो यूपीएससी और न ही सरकार ने इस पर कोई ऑफिसियल स्टेटमेंट दिया है।
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