क्या है VERVE-102 दवा: सिंगल डोज में कोलेस्ट्रॉल का खेल खत्म, जानें कैसे
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- हार्ट अटैक के सबसे बड़े कारण यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की नई दवा सामने आई है।
- इस प्रायोगिक दवा का नाम वर्व-102 (VERVE-102) रखा गया है।
- यह सिर्फ एक सिंगल डोज में लिवर के खास जीन को हमेशा के लिए बदल देती है।
- शुरुआती मेडिकल ट्रायल में इसने खराब कोलेस्ट्रॉल को 62 प्रतिशत तक कम किया।
- यह नई तकनीक मरीजों को जीवन भर रोज-रोज दवा खाने से मुक्ति दिलाएगी।
खराब कोलेस्ट्रॉल के इलाज में नया अविष्कार
दुनिया भर में दिल की बीमारियों से परेशान करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर आई है। अब खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना कोई जीवन भर का संघर्ष नहीं रहेगा। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक खोज ली है जो गेम चेंजर साबित होगी।
इस नई तकनीक का नाम वर्व-102 (VERVE-102) है। यह एक ऐसी प्रायोगिक जीन-एडिटिंग दवा है जो सीधे शरीर के अंदर काम करती है। यह दवा लिवर के उस खास जीन को बदल देती है जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।
दिल के मरीजों के लिए खास है ये दवा?
इस समय बाजार में कोलेस्ट्रॉल कम करने की कई दवाइयां और इंजेक्शन पहले से मौजूद हैं। लेकिन इनके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन्हें रोज या नियमित रूप से लेना पड़ता है। कई मरीज कुछ दिन बाद दवा खाना भूल जाते हैं या छोड़ देते हैं।
यहीं पर यह नई दवा पूरी तरह से अलग और बेहद असरदार साबित होती है। यह दवा आपको जीवन भर की गोलियों और सुइयों से पूरी तरह मुक्ति दिला सकती है। इसे सिर्फ एक बार मरीज के शरीर में इन्फ्यूजन के जरिए डाला जाता है।
शुरुआती ट्रायल के नतीजों ने चौंकाया
इस दवा के शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक रहे हैं। ट्रायल के दौरान मरीजों का खराब कोलेस्ट्रॉल काफी कम हो गया।
जांच में सामने आया कि इस दवा ने हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को 62% तक घटा दिया। यह असर कई मरीजों में लगातार 18 महीनों तक देखा गया। डॉक्टर इस बात से हैरान हैं कि एक डोज का असर इतने लंबे समय तक रहा।
भारत के लिए जरूरी है कोलेस्ट्रॉल का यह नया इलाज?
यह खोज भारत के लिए बहुत ही ज्यादा मायने रखती है। हमारे देश में होने वाली कुल मौतों में से करीब 28% मौतें दिल की बीमारियों की वजह से होती हैं। भारत में करोड़ों लोग दिल की समस्याओं से जूझ रहे हैं।
देश में हर साल लगभग तीस लाख लोगों को हार्ट अटैक आता है। इनमें से अधिकांश मामलों में मुख्य विलेन खराब कोलेस्ट्रॉल ही होता है। ऐसे में यह नई स्वदेशी और आधुनिक तकनीक लाखों भारतीयों की जान बचा सकती है।
लिवर के पीसीएसके9 जीन को सीधे कैसे बदलती है यह दवा?
आइए अब इस दवा के काम करने के वैज्ञानिक तरीके को आसान भाषा में समझते हैं। वर्व-102 एक इन-विवो जीन-एडिटिंग दवा है। इसका मतलब है कि यह सीधे मरीज के शरीर के अंदर जाकर जीन को ठीक करती है।
यह दवा लिवर के अंदर मौजूद पीसीएसके9 (PCSK9) जीन को टारगेट करती है। यह जीन शरीर में एक खास प्रोटीन बनाता है जो अच्छे रिसेप्टर्स को नष्ट करता है। यह दवा उस जीन को हमेशा के लिए बंद या स्विच ऑफ कर देती है।
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने इसे बताया माइल स्टोन
देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) दिल्ली के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. अम्बुज रॉय ने इसकी तारीफ की है। उन्होंने इसे चिकित्सा जगत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम बताया है।
उनके अनुसार, अगर बड़े स्तर पर भी यह दवा पूरी तरह सुरक्षित पाई जाती है, तो यह दिल के डॉक्टरों के लिए सदी की सबसे बड़ी खोज होगी। इससे भविष्य में हार्ट अटैक के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
अमेरिकी एफडीए ने दी मंजूरी
इस दवा की उपयोगिता को देखते हुए अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इसे फास्ट-ट्रैक का दर्जा दिया है। इससे इस दवा के आगे के ट्रायल और रिसर्च की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाएगी।
ग्लोबल फार्मा कंपनी एली लिली अब इस दवा के दूसरे चरण का ट्रायल शुरू करने जा रही है। इसमें बड़े स्तर पर मरीजों को शामिल किया जाएगा। सभी मरीजों की सुरक्षा पर अगले 15 सालों तक पूरी नजर रखी जाएगी।
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