युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले, खराब जीवनशैली और तनाव है वजह
World Heart Day 2026: हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। यह दिन दिल की बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। दुनियाभर में हर साल करीब 1.79 करोड़ लोग दिल की बीमारी से मरते हैं। भारत में यह खतरा युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।
सही खानपान और जीवनशैली से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। दिल की बीमारी आज दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है। पहले यह बीमारी बुजुर्गों की समस्या मानी जाती थी। लेकिन अब 30 और 40 साल की उम्र में भी हार्ट अटैक आम हो गया है।
खराब खानपान, तनाव और आलस भरी जिंदगी इसकी बड़ी वजह है। आज हम इसी विषय पर पूरी जानकारी सरल भाषा में देंगे। दिल हमारे शरीर का सबसे मेहनती अंग है।
यह लगातार काम करके पूरे शरीर में खून पहुंचाता है। लेकिन गलत आदतें इसे कमजोर बना देती हैं। समय रहते सावधानी बरतें तो दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। यही इस दिन को मनाने का असली मकसद है।
विश्व हृदय दिवस क्यों मनाते हैं
29 सितंबर को यह दिन साल 1999 से मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर की थी। शुरुआत में यह दिन सितंबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता था।
साल 2011 से इसे हर साल 29 सितंबर को ही मनाने का फैसला हुआ। आज दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में यह दिन मनाया जाता है। स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य संगठन मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं।
इस साल की थीम यूज हार्ट फॉर एक्शन
साल 2024 से 2026 तक विश्व हृदय दिवस की थीम यूज हार्ट फॉर एक्शन रखी गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ जागरूकता काफी नहीं, अब असली कदम उठाने का समय है।
यह थीम लोगों को अपनी सेहत के लिए खुद जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करती है। सरकार और नीति निर्माताओं से भी दिल की बीमारी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की जाती है। जानकारी को आदत में बदलना ही इस थीम का मूल संदेश है।
दुनियाभर में दिल की बीमारी का खतरा
दुनियाभर में दिल की बीमारी और स्ट्रोक हर साल करीब 1.79 करोड़ लोगों की जान लेते हैं। यह आंकड़ा किसी भी अन्य बीमारी से मौत के मामलों से ज्यादा है। यही वजह है कि दिल की बीमारी को दुनिया की सबसे बड़ी जानलेवा समस्या माना जाता है।
राहत की बात यह है कि इनमें से करीब 80 प्रतिशत मौतें रोकी जा सकती हैं। धूम्रपान छोड़ने, सही खानपान और नियमित एक्सरसाइज से यह खतरा काफी कम हो सकता है। यानी थोड़ी सी सावधानी बड़ी जान बचा सकती है।
भारत में स्थिति ज्यादा गंभीर
भारत में दिल की बीमारी की स्थिति दुनिया के मुकाबले ज्यादा गंभीर है। दुनियाभर में होने वाली दिल की बीमारी की मौतों में से करीब एक-पांचवां हिस्सा अकेले भारत में होता है। भारत में प्रति एक लाख आबादी पर करीब 272 मौतें दिल की बीमारी से होती हैं, जबकि दुनिया का औसत 235 है।
भारत में साल 1990 में दिल की बीमारी से करीब 22 लाख लोगों की मौत हुई थी। साल 2020 आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर करीब 48 लाख हो गया। यह बढ़ोतरी बताती है कि खतरा लगातार बढ़ रहा है।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा खतरा
भारत में सबसे चिंता की बात यह है कि दिल की बीमारी अब कम उम्र में ही हो रही है। भारतीय लोगों में पश्चिमी देशों के मुकाबले यह बीमारी करीब 5 से 10 साल पहले आ जाती है। कई मामलों में तो 30 और 40 साल की उम्र में ही हार्ट अटैक देखने को मिल रहा है।
इसकी बड़ी वजह तंबाकू का सेवन, तनाव भरी जिंदगी और शुगर की बढ़ती समस्या है। लंबे समय तक बैठे रहने वाली नौकरियां भी इसमें बड़ा योगदान देती हैं। जंक फूड और तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन भी दिल को कमजोर बनाता है।
ग्रामीण इलाकों में भी दिल की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलता खानपान और शहरी जीवनशैली की नकल इसकी बड़ी वजह मानी जाती है। कई जिलों में सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच शिविर भी लगाए जाते हैं।
दिल की बीमारी के आम लक्षण
सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना सबसे आम लक्षण है। सांस लेने में तकलीफ होना भी एक चेतावनी संकेत है। बिना वजह बहुत ज्यादा थकान महसूस होना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हाथ, गर्दन या जबड़े में दर्द फैलना भी दिल की समस्या का लक्षण हो सकता है। पसीना ज्यादा आना और चक्कर आना भी गंभीर संकेत माने जाते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
दिल को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना दिल के लिए फायदेमंद है। हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें। तली-भुनी और ज्यादा नमक वाली चीजों से दूरी बनाएं।
धूम्रपान और शराब से परहेज करें। पर्याप्त नींद लेना भी दिल के लिए बेहद जरूरी है। तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करें। समय-समय पर ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर कराते रहें। दिल की बीमारियों का इलाज
नियमित जांच क्यों है जरूरी
बहुत से लोगों को दिल की बीमारी (World health organization) के बारे में तभी पता चलता है जब हालत गंभीर हो चुकी होती है। इसलिए 30 साल की उम्र के बाद सालाना जांच जरूर करानी चाहिए। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की जांच से समय रहते खतरे का पता चल सकता है।
परिवार में किसी को पहले से दिल की बीमारी रही हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर नियमित चेकअप कराते रहें। समय पर पहचान होने पर इलाज आसान और सस्ता भी होता है। heart disease
Reference:
World Heart Federation (WHF) Global Statistics
World Health Organization (WHO) Cardiovascular Disease Reports
Indian Council of Medical Research (ICMR) Health Advisory
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