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New Delhi. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया रवाना होने से पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी यूरोप दौरे पर रवाना हो गए। वो 6 सितंबर से 10 सितंबर (5 दिन) तक चार यूरोपीय देशों- फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड्स और नॉर्वे की यात्रा करेंगे। इस दौरान राहुल वकील, छात्रों और प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, राहुल 7 सितंबर को ब्रुसेल्स में यूरोपीय यूनियन के वकीलों के एक ग्रुप से मिलेंगे और नीदरलैंड की राजधानी हेग में भी इसी तरह की बैठक करेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे अपने दौरे के दौरान मोदी सरकार को घेरने के साथ कुछ तीखे बयान भी दे सकते हैं, जैस कि पिछली अमेरिकी यात्रा के दौरान सामने आ चुका है। दूसरी ओर, राहुल गांधी दिल्ली में होने जा रही जी-20 समिट खत्म होने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेंगे, वहीं ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का एक साल पूरा होने पर होने वाले कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं होंगे।
राहुल की यूरोप यात्रा का शेड्यूल
7 सितंबर: ब्रुसेल्स में यूरोपीय सांसदों से मुलाकात करेंगे। लंच के बाद वह नागरिक समाज संगठनों, एनआरआई, उद्योगपतियों से भी मिलेंगे।
8 सितंबर: ब्रुसेल्स में कारोबारियों से मुलाकात और दोपहर 1.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
इसके बाद वे पेरिस जाएंगे और यूनिवर्सिटी में एक बैठक के बाद रात्रिभोज करेंगे। इसके बाद राहुल पेरिस में 8 सितंबर को रात 9 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
9 सितंबर: फ्रांस के सांसदों और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे।
10 सितंबर: हॉलैंड पहुंचेंगे और वहां 400 साल पुरानी मशहूर यूनिवर्सिटी लीडेन यूनिवर्सिटी की बैठक में हिस्सा लेंगे।
11 सितंबर: नॉर्वे में रहेंगे और सांसदों से मिलेंगे। उनका ओस्लो विश्वविद्यालय में भाषण होगा। इस दौरान वह एनआरआई से भी बातचीत करेंगे।
13 सितंबर: वह भारत वापस आ जाएंगे
राहुल की 4,000 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा
राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी। ये 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 4,000 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद 30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म हुई थी। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने 145 में 12 सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया था, वहीं 100 से ज्यादा बैठकें और 13 प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया था।
जून 2023 में 10 दिन के यूएस दौरे पर थे राहुल, बयानों पर मचा था बवाल
राहुल गांधी इससे पहले 30 मई 2023 को अमेरिका के दौरे पर गए थे। जून में अपनी 10 दिन की यात्रा में कांग्रेस नेता ने वाशिंगटन, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को में प्रवासी भारतीयों, छात्रों समेत कई अलग-अलग ग्रुपों संग भारत में लोकतंत्र, सुरक्षा और राजनीति के विषय पर बातचीत की थी, यहां तक कि उन्होंने संसद सदस्य के रूप में अपनी अयोग्यता को लेकर भी चर्चा की, जो मोदी सरनेम को लेकर की गई उनकी टिप्पणी के बाद चली गई थी। इस दौरान उनके कई बयानों पर बवाल भी मचा था। बीजेपी समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने उनपर निशाना साधा था और कहा था कि वे विदेश में भारत की छवि खराब कर रहे हैं।
राहुल के अमेरिका में कौन-कौन से बयान पर मचा था बवाल
सांसदी जाने के सवाल का जवाब
कांग्रेस नेता ने 1 जून को वॉशिंगटन डीसी के नेशनल प्रेस क्लब में मीडिया के सांसदी जाने के सवाल पर राहुल ने कहा था- मुझे 1947 के बाद मानहानि के मामले में सबसे बड़ी सजा मिली है। मैंने संसद में अडाणी को लेकर स्पीच दी थी, जिसका मुझे तोहफा मिला। इसी वजह से मुझे डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।
भारत में प्रेस आजाद नहीं, लोग बेरोजगारी और महंगाई से परेशान
राहुल ने कहा था कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर होती जा रही है। मुझे लगता है कि लोकतंत्र के लिए प्रेस की स्वतंत्रता और आलोचना को सुनना जरूरी है। मैं जो भी सुनता हूं उस पर विश्वास नहीं करता। मैं पूरे भारत में घूमा हूं। कन्याकुमारी से कश्मीर तक घूमा हूं। लाखों भारतीयों से सीधे बात की है। मुझे वो लोग खुश नहीं लगे और वो बेरोजगारी, महंगाई से बहुत परेशान हैं। लोगों में गुस्सा था। देश में बढ़ती महंगाई और रिकॉर्ड बेरोजगारी के चलते अमीरों और गरीबों के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के दावों पर भरोसा करना मुश्किल लगता है।
गुस्से, घृणा और घमंड में भरोसा करते हैं तो आपको बीजेपी में होना चाहिए
राहुल ने 31 मई को सैन फ्रांसिस्को में भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा और आरएसएस पर तंज कसे थे। उन्होंने कहा था कि मोदी तो भगवान को भी दुनिया चलाना सिखा देंगे, भगवान भी चौंक जाएंगे कि ये मैंने क्या बना दिया। राहुल ने कहा था कि "भारत कभी भी किसी भी विचार को दरकिनार नहीं करता है। जो भी भारत आता है, उसका खुले दिल से स्वागत किया जाता है और उसके विचारों को हम आत्मसात करते हैं। इसी भारत का आप प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर आप गुस्से, घृणा और घमंड में भरोसा करते हैं तो आपको भाजपा की मीटिंग में बैठना चाहिए और मैं मन की बात कर रहा होता।"
राहुल भाषण के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने की थी नारेबाजी
सैन फ्रैंसिस्को में भारतीयों के बीच स्पीच के दौरान कुछ खालिस्तान समर्थकों ने भारत, कांग्रेस और इंदिरा गांधी विरोधी नारेबाजी की और खालिस्तान के झंडे लहराए थे। राहुल को काफी देर तक भाषण रोकना पड़ा था। बाद में इन खालिस्तान समर्थकों को पुलिस ने बाहर निकाल दिया था।
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