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अनंत चतुर्दशी के दिन पंचामृत में भगवान को खोजने की परंपरा क्यों है, जानें शुभ मुहूर्त
Kaushiki | Sept 24, 2026, 13:05 IST
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अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पंचामृत में भगवान विष्णु को खोजने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है। इसका संबंध समुद्र मंथन से है। इस दिन 14 गांठों वाला रक्षासूत्र बांधने और गणेश विसर्जन का भी विशेष धार्मिक महत्व है।
Anant Chaturdashi 2026:हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व बेहद पवित्र माना जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है।
इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इस खास मौके पर पूजा के दौरान एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इसमें खीरे में बंधे अनंत भगवान को पंचामृत में रखकर खोजा जाता है।
दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने पंचामृत में भगवान को खोजने की यह प्रथा सदियों पुरानी है। लोग इस परंपरा को श्रद्धा और उत्साह से पूरा करते हैं। आइए जानें अनंत चतुर्दशी की पौराणिक परंपरा...
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अनंत चतुर्दशी का व्रत पर पंचामृत की परंपरा बहुत खास मानी जाती है। खीरे को काटकर उसमें अनंत भगवान की प्रतिमा रखी जाती है। फिर इसे पंचामृत के बर्तन में डालकर ढूंढने का नियम है।
यह परंपरा समुद्र मंथन के प्रतीक के रूप में निभाई जाती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से कई अमूल्य रत्न निकले थे। समुद्र मंथन के दौरान ही अमृत कलश भी बाहर आया था।
इसी मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने धारण किया। विष पीने के कारण ही वे नीलकंठ नाम से प्रसिद्ध हुए। इस दिन भगवान विष्णु ने अनंत रूप में प्रकट होकर रक्षा की। इसलिए भक्त पंचामृत में प्रभु को खोजकर उनकी कृपा मांगते हैं।
![Anant Chaturdashi 2022:अनंत चतुर्दशी आज, जानिए कौन हैं भगवान अनंत ? पूजाविधि, व्रत महत्व और शुभ मुहूर्त - Anant Chaturdashi 2022 Date Vrat Importance Puja Vidhi Shubh Muhurat For Worship Of ...]()
इस साल चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात से शुरू होगी। पंचांग के मुताबिक, तिथि का आरंभ रात 11:18 बजे से होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 25 सितंबर की रात 11:06 बजे होगा।
उदया तिथि के आधार पर व्रत 25 सितंबर को रहेगा। इसी दिन पूजा और गणेश विसर्जन के शुभ योग बन रहे हैं। पूजा के लिए पूरे दिन कई शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। सुबह की पूजा का मुहूर्त 6:28 बजे से शुरू होगा।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6:15 बजे से 6:39 बजे तक रहेगा। रवि योग सुबह 6:12 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा।
![Anant Chaturdashi on 28th: On this day, there is a tradition of worshiping the eternal form of Lord Vishnu and tying Raksha Sutra, it is believed that troubles go away.]()
पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र पहना जाता है। यह सूत्र सूती या रेशमी धागे से बनाया जाता है। धागे को हल्दी में रंगकर उसमें 14 गांठें लगाते हैं। हर गांठ भगवान विष्णु के एक विशेष नाम का प्रतीक है। इसे धारण करने से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं।
अनंत सूत्र धारण करते समय कुछ नियमों का पालन जरूरी है। पुरुषों को यह सूत्र अपनी दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए। महिलाओं के लिए इसे बाईं भुजा पर बांधने का नियम है।
सूत्र को सीधे हाथ में बांधने की गलती बिल्कुल न करें। पहले सूत्र को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने रखें। भगवान के सामने रखकर रोली, अक्षत और फूलों से पूजन करें।
पूजन पूरा होने के बाद ही सूत्र धारण करना शुभ होता है। सूत्र बांधते समय अनंत भगवान का ध्यान और स्मरण करें। यदि घर में व्रत कथा सुनने की परंपरा हो तो सुनें। इससे पूजा का पूरा और शुभ फल भक्त को मिलता है।
![Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी पर आखिर क्यों निभाई जाती है भगवान को खोजने की रस्म, समुद्र मंथन से क्या है संबंध, जानें पूजा के बेस्ट मुहूर्त ...]()
अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश भक्तों के लिए भी खास है। दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का इस दिन समापन होता है। श्रद्धालु बप्पा की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन करते हैं। गणपति बप्पा को अगले बरस जल्दी आने का न्योता दिया जाता है। इसलिए यह तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन किया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इस खास मौके पर पूजा के दौरान एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इसमें खीरे में बंधे अनंत भगवान को पंचामृत में रखकर खोजा जाता है।
दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने पंचामृत में भगवान को खोजने की यह प्रथा सदियों पुरानी है। लोग इस परंपरा को श्रद्धा और उत्साह से पूरा करते हैं। आइए जानें अनंत चतुर्दशी की पौराणिक परंपरा...
पंचामृत में भगवान को खोजने की परंपरा
यह परंपरा समुद्र मंथन के प्रतीक के रूप में निभाई जाती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से कई अमूल्य रत्न निकले थे। समुद्र मंथन के दौरान ही अमृत कलश भी बाहर आया था।
इसी मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने धारण किया। विष पीने के कारण ही वे नीलकंठ नाम से प्रसिद्ध हुए। इस दिन भगवान विष्णु ने अनंत रूप में प्रकट होकर रक्षा की। इसलिए भक्त पंचामृत में प्रभु को खोजकर उनकी कृपा मांगते हैं।
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अनंत चतुर्दशी 2026 की सही तिथि
उदया तिथि के आधार पर व्रत 25 सितंबर को रहेगा। इसी दिन पूजा और गणेश विसर्जन के शुभ योग बन रहे हैं। पूजा के लिए पूरे दिन कई शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। सुबह की पूजा का मुहूर्त 6:28 बजे से शुरू होगा।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6:15 बजे से 6:39 बजे तक रहेगा। रवि योग सुबह 6:12 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा।
Anant Chaturdashi on 28th: On this day, there is a tradition of worshiping the eternal form of Lord Vishnu and tying Raksha Sutra, it is believed that troubles go away.
14 गांठ वाले अनंत सूत्र का धार्मिक महत्व
- पहली गांठ भगवान के अनंत स्वरूप को समर्पित मानी जाती है।
- दूसरी गांठ ऋषिकेश और तीसरी पद्मनाभ के नाम की होती है।
- चौथी गांठ में भगवान माधव का ध्यान किया जाता है।
- पांचवीं गांठ वैकुण्ठ और छठी श्रीधर नाम को समर्पित है।
- सातवीं गांठ त्रिविक्रम, आठवीं मधुसूदन और नौवीं वामन की है।
अनंत सूत्र बांधने के नियम
सूत्र को सीधे हाथ में बांधने की गलती बिल्कुल न करें। पहले सूत्र को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने रखें। भगवान के सामने रखकर रोली, अक्षत और फूलों से पूजन करें।
पूजन पूरा होने के बाद ही सूत्र धारण करना शुभ होता है। सूत्र बांधते समय अनंत भगवान का ध्यान और स्मरण करें। यदि घर में व्रत कथा सुनने की परंपरा हो तो सुनें। इससे पूजा का पूरा और शुभ फल भक्त को मिलता है।
Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी पर आखिर क्यों निभाई जाती है भगवान को खोजने की रस्म, समुद्र मंथन से क्या है संबंध, जानें पूजा के बेस्ट मुहूर्त ...
गणेशोत्सव का समापन
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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