भीष्म अष्टमी: जब अमर थे भीष्म तो क्यों किया उन्होंने अपने शरीर का त्याग

Kaushiki | Feb 05, 2025, 15:50 IST
BHISM AASTAMI
क्या आप जानते हैं कि भीष्म अष्टमी पर भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु के लिए क्यों चुना था। ये दिन उनके जीवन और मृत्यु के गहरे आध्यात्मिक संदेश को दर्शाता है। जानें इस दिन का धार्मिक महत्व को...

भीष्म अष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित होता है, क्योंकि को पितामह भीष्म की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक, महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपनी शरशय्या पर रहते हुए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया और माघ माह की अष्टमी तिथि को ही उन्होंने अपने प्राण त्यागे थे। इसलिए यह दिन उनके मोक्ष प्राप्ति के दिन के रूप में भी याद किया जाता है। इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए विशेष पूजा, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।



इस दिन का महत्व

इस दिन पूजा कैसे करें

भीष्म अष्टमी के दिन सबसे पहले अपने पितरों का ध्यान करते हुए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन विशेष रूप से जल, तिल, अक्षत और पुष्प अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, यदि संभव हो, तो गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी के तट पर जाकर तर्पण करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी उत्तम फलदायी होता है। इस दिन किसी भी धार्मिक स्थल में पितृ पूजन, तर्पण और श्रद्धा भाव से की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।



कब से शुरू हुई और क्यों मनाई जाती है

इस दिन की शुरुआत महाभारत के समय से मानी जाती है, जब पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते हुए युद्ध के बाद अपनी शरशय्या पर प्राण त्यागे थे। इस दिन को खास रूप से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने और उनका पुण्य तर्पण करने के लिए चुना गया। भीष्म अष्टमी का आयोजन आज भी उसी उद्देश्य के साथ किया जाता है, ताकि पितृदोष से मुक्ति मिल सके और परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे।



FAQ

  1. भीष्म अष्टमी पर किसकी पूजा की जाती है?
    इस दिन पितरों के श्राद्ध और तर्पण के साथ-साथ भीष्म पितामह की पुण्यतिथि की पूजा की जाती है।
  2. ये दिन कब मनाई जाती है?
    भीष्म अष्टमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, इस साल यह 5 फरवरी 2025 को है।
  3. इस दिन गरीबों के लिए क्या करना चाहिए?
    इस दिन गरीबों को भोजन कराना, उन्हें कच्ची सामग्री देना या उनकी दवाइयों का प्रबंध करना शुभ माना जाता है।
  4. श्राद्ध के समय क्या करना चाहिए?
    इस दौरान पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना चाहिए।

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