गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा को एक मानने की भूल न करें, यह है दोनों में अंतर

Kaushiki | May 20, 2026, 13:47 IST
Ganga Dussehra 2026
साल 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा। इस बार ज्येष्ठ महीने में अधिक मास का खास संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के दस तरह के गंभीर पाप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

Latest Religious News: हिंदू धर्म में मां गंगा को केवल नदी नहीं माना गया है। वे भक्तों को मोक्ष देने वाली साक्षात देवी हैं। हर साल मां गंगा से जुड़े दो बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। पहला त्योहार गंगा सप्तमी और दूसरा गंगा दशहरा है। अक्सर लोग इन दोनों त्योहारों के अंतर को लेकर उलझ जाते हैं।



आइए आज हम आपकी इस उलझन को दूर करते हैं। गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा का पुनर्जन्म माना जाता है। वहीं गंगा दशहरा वह दिन है जब वे धरती पर आईं। सप्तमी का संबंध स्वर्ग लोक में उनके अस्तित्व से माना जाता है। जबकि दशहरा का संबंध पृथ्वी लोक के कल्याण से है।



Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा से कितनी अलग है गंगा सप्तमी, जानें दोनों में खास अंतर


गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में अंतर

हिंदू धर्मग्रंथों के मुताबिक, इन दोनों पावन त्योहारों में मां गंगा की महिमा के अलग-अलग रूपों को दर्शाया गया है:



  • गंगा सप्तमी (जन्मोत्सव):
    यह वह दिन है जब मां गंगा का पुनर्जन्म हुआ था। वैशाख मास शुक्ल सप्तमी को जब गंगा जी के तेज वेग से ऋषि जह्नु का आश्रम बहने लगा, तो वे क्रोधित होकर गंगा को पी गए। बाद में भगीरथ की प्रार्थना पर उन्होंने गंगा को अपने कान से बाहर निकाला, इसलिए इसे गंगा जी का जन्मोत्सव या 'जाह्नवी जन्म' कहा जाता है। इसका संबंध मुख्य रूप से स्वर्ग लोक से है।
  • गंगा दशहरा (अवतरण दिवस):
    यह वह ऐतिहासिक दिन है जब मां गंगा राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव की जटाओं से होते हुए ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को पहली बार पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इसका सीधा संबंध पृथ्वी लोक के कल्याण और मनुष्यों को मोक्ष दिलाने से है।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में क्या है अंतर, 2026 में क्यों खास माना जा रहा


साल 2026 में कब है गंगा दशहरा

इस साल गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को आता है। इस बार ज्येष्ठ महीने में अधिक मास यानी मलमास लग रहा है। इस कारण इस पर्व का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है।



ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, अधिक मास में किए कार्य अक्षय पुण्य देते हैं। इस दिन दान-पुण्य करने का फल कई गुना बढ़ जाएगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो दशमी तिथि 25 मई को सुबह 04:30 बजे शुरू होगी।



इसका समापन 26 मई को सुबह 05:10 बजे होगा। इसके साथ ही 26 मई को सुबह हस्त नक्षत्र भी शुरू हो जाएगा। इस दौरान पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है।



आप भी गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा को एक ही मानते हैं? अभी जान लें दोनों में क्या है अंतर - ganga duss


धरती पर कैसे आईं मां गंगा

प्राचीन कथा के मुताबिक, राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। वे अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति चाहते थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने एक आदेश दिया।



उन्होंने मां गंगा को पृथ्वी लोक पर जाने को कहा। लेकिन मां गंगा का वेग बहुत ही ज्यादा तेज था। उनके तेज बहाव से पूरी पृथ्वी बह सकती थी।



तब भगीरथ की प्रार्थना पर भगवान शिव आगे आए। उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में पूरी तरह रोक लिया। इसके बाद शिव जी ने उन्हें शांत रूप में छोड़ा। जिस दिन गंगा धरती पर आईं, उसे गंगा दशहरा कहा गया।



जानें क्या कहता है शास्त्र

नारद पुराण के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन स्नान का बड़ा महत्व है। इस दिन स्नान करने से दस जन्मों के पाप कट जाते हैं। स्कंद पुराण में भी इस बात का साफ जिक्र मिलता है। दशहरा का अर्थ ही है दस पापों को हरने वाला।



इस दिन पवित्र नदी में डुबकी लगाने से शांति मिलती है। इससे मनुष्य के तीन शारीरिक और चार वाणी के पाप मिटते हैं। इसके साथ ही तीन मानसिक पाप भी पूरी तरह धुल जाते हैं। व्यक्ति के लिए मोक्ष के सारे द्वार खुल जाते हैं।



अगर आप गंगा किनारे नहीं जा सकते तो परेशान न हों। आप घर के नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। पानी मिलाते समय "ॐ नमः शिवाय गंगायै नमः" मंत्र का जाप करें। इससे आपको घर बैठे ही गंगा स्नान का पुण्य मिलेगा।



गंगा दशहरा की पूजा विधि

इस पावन दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद सच्चे मन से पूजा का पूरा संकल्प लें।



एक साफ चौकी पर गंगा माता की तस्वीर स्थापित करें। मां गंगा को जल, फूल और सुंगधित धूप अर्पित करें। इसके बाद दीप जलाकर मां गंगा की आरती गाएं। इस दिन गंगा स्तोत्र या गंगा लहरी का पाठ करना चाहिए।



शाम के समय किसी जलाशय में दीपदान जरूर करें। गंगा दशहरा पर 10 दीप जलाना बेहद शुभ होता है। यह दीप हमारे दस पापों के नाश का प्रतीक होते हैं।



इस दिन 10 प्रकार की चीजों का दान करना चाहिए। आप जल, अन्न, वस्त्र, फल और घड़े का दान कर सकते हैं। इसके अलावा छाता, पंखा और सत्तू का दान भी श्रेष्ठ है। यह दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को ही देना चाहिए।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



ये खबर भी पढ़ें...



पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे



चारधाम यात्रा में क्या है केदारनाथ मंदिर का महत्व, भगवान शिव से जुड़ी है मान्यताएं



चारधाम यात्रा में उमड़ रहा आस्था का सैलाब, खराब मौसम भी नहीं रोक पाया श्रद्धालुओं के कदम



चारधाम यात्रा पर जाने वाले सावधान! यात्रा में गूगल सर्च के फर्जी लिंक से हो रही है ठगी



Tags:
  • ज्योतिष शास्त्र
  • वैशाख मास
  • हिंदू धर्म
  • ज्येष्ठ माह
  • मां गंगा
  • गंगा दशहरा
  • गंगा
  • Latest Religious News