आज गुरु पूर्णिमा पर के दिन करें ये खास उपाय, खुलेंगे सफलता के द्वार
Kaushiki | Jul 16, 2026, 14:30 IST
Guru Purnima 2026
आज 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का महान पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो जीवन में सफलता लाएंगे। यह पावन दिन महर्षि वेदव्यास जी के जन्म की याद में व्यास पूर्णिमा के रूप में भी प्रसिद्ध है।
Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में गुरु का दर्जा सबसे बड़ा और आदरणीय माना गया है। गुरु ही वो जरिया हैं जो हमें अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के उजाले की तरफ ले जाते हैं।
साल 2026 में गुरु पूर्णिमा का त्योहार आज 29 जुलाई को मनाया जाएगा। वैसे तो पंचांग के हिसाब से पूर्णिमा तिथि आज 28 जुलाई की शाम से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि की वजह से यह पर्व आज (29 जुलाई) मनेगा।
इस मौके पर सभी लोग अपने गुरुजनों का विशेष आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। इस साल गुरु पूर्णिमा पर कई अद्भुत और बेहद शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है।
![Guru Purnima]()
ज्योतिष पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम को शुरू हो जाएगी। यह पावन तिथि शाम को 06 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई की रात को 08 बजकर 05 मिनट पर होगा। इसलिए शास्त्रों के उदयातिथि नियम के मुताबिक ये पर्व 29 जुलाई को ही मनाया जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस साल की गुरु पूर्णिमा के दिन आकाश में बहुत ही दुर्लभ प्रीति और हर्षण योग बन रहे हैं। प्रीति योग सुबह से शुरू होकर रात को 11 बजकर 58 मिनट तक बना रहेगा। इसके तुरंत बाद एक और बेहद शुभ योग आयुष्मान योग की शुरुआत हो जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं में प्रीति योग के देवता स्वयं भगवान विष्णु और स्वामी बुध ग्रह हैं। हर्षण योग इंसानों के जीवन में बड़ी सफलता, प्रसन्नता और शुभ परिणाम लेकर आता है। इसके साथ ही दोपहर तक आकाश में उत्तराषाढा नक्षत्र का मजबूत प्रभाव भी रहेगा। ये सभी अद्भुत संयोग मिलकर इस पावन दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं।
गुरु पूर्णिमा के दिन साधना के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे उत्तम माना गया है। यह समय सुबह 04 बजकर 17 मिनट से शुरू हो जाएगा। यह पवित्र मुहूर्त सुबह 04 बजकर 59 मिनट तक पूरी तरह से बना रहेगा। इस विशेष समय पर पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ज्यादा फलदायी माना जाता है।
सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लाभ और उन्नति का शुभ मुहूर्त शुरू होगा। इसके बाद सबसे उत्तम अमृत मुहूर्त सुबह 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। दोपहर के समय आने वाला विजय मुहूर्त भी देव पूजा के लिए बहुत बढ़िया है। शाम को लाभ का एक और उत्तम मुहूर्त 05 बजकर 32 मिनट से मिलेगा।
पुरानी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी पावन दिन महर्षि वेदव्यास जी प्रकट हुए थे। उनका जन्म आषाढ़ मास की इसी पवित्र पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसी खास वजह से इस पावन त्योहार को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
महान वेदव्यास जी ने ही सनातन धर्म के चारों पवित्र वेदों का वर्गीकरण किया था। उन्होंने ही अमर ग्रंथ महाभारत और कई प्रसिद्ध महापुराणों की सुंदर रचना की थी। वे पूरी मानव सृष्टि के सबसे पहले और महान गुरु माने जाते हैं।
पौराणिक कथाएं कहता है कि व्यास जी के महान ज्ञान से पूरी सृष्टि धन्य हुई थी। उन्होंने इंसानों को धर्म और कर्म का सबसे सच्चा पाठ सिखाया था। तभी से हर साल उनके महान सम्मान में यह सुंदर उत्सव मनाया जाता है। लोग व्यास पीठ सजाकर उनकी इस महान ज्ञान परंपरा को नमन करते हैं।
अगर आपकी कुंडली में गुरु ग्रह बहुत कमजोर स्थिति में बैठा हुआ है। या फिर मेहनत के बाद भी जीवन में तरक्की नहीं मिल पा रही है। तो गुरु पूर्णिमा के दिन आपको एक बहुत छोटा सा काम करना होगा। इस दिन पूरे आदर के साथ अपने गुरु के घर जरूर मिलने जाएं।
उन्हें अपने निवास स्थान पर आने का एक प्यार भरा निमंत्रण अवश्य दें। जब वे घर आएं तो उनका पैर छूकर आदर से स्वागत करें। उन्हें प्रेमपूर्वक बहुत स्वादिष्ट भोजन कराएं और उनकी भरपूर मन से सेवा करें।
विदा करते समय उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ नकद दक्षिणा दें। कोई सुंदर उपहार भेंट करके उनका पावन आशीर्वाद तुरंत प्राप्त कर लें। ऐसी मान्यता है कि गुरु की सच्ची सेवा से गुरु दोष शांत होता है।
गुरु पूर्णिमा के दिन सबसे पहले सुबह उठकर पूरे घर की सफाई करें। पवित्र स्नान करने के बाद पूरी तरह साफ और स्वच्छ कपड़े पहन लें। अपने पूजा घर में सफेद रंग का एक साफ सूती कपड़ा बिछाएं। इस कपड़े के ऊपर सुंदर और पवित्र व्यास पीठ की स्थापना करें।
अब भगवान महर्षि वेदव्यास जी की सुंदर तस्वीर वहां पर स्थापित करें। उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ चंदन, रोली और सुंदर फूल अर्पित करें। उनके सामने ताजे फल और बहुत मीठे मिष्ठान का भोग लगाएं।
सुगंधित धूप और दीप जलाकर उनकी आरती पूरी श्रद्धा से गाएं। इस पावन दिन अपने माता-पिता और बड़े भाई-बहनों का आशीर्वाद लें। वे भी हमारे जीवन के सबसे पहले और सच्चे मार्गदर्शक होते हैं।
हमारे पवित्र शास्त्रों में गुरु को त्रिदेवों के बिल्कुल समान दर्जा दिया गया है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म के रूप में धरती पर पूजे जाते हैं। सच्चे गुरु के बिना जीवन में सही ज्ञान मिलना बिल्कुल असंभव बात है। गुरु का दिया हुआ एक छोटा मंत्र ही जीवन की नैया पार लगाता है।
इस पावन दिन पर दान और पुण्य करने का भी विशेष विधान है। गरीब लोगों को पीले रंग के अनाज और वस्त्र दान करने चाहिए। इससे देवगुरु बृहस्पति बहुत प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। शिक्षा के क्षेत्र में आ रही हर रुकावट तुरंत दूर हो जाती है।
गुरु पूर्णिमा के सुखद समापन के साथ ही आषाढ़ का महीना खत्म होता है। इसके ठीक अगले दिन से देश में पवित्र सावन मास शुरू होगा। सावन का यह पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत ज्यादा प्रिय होता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा का यह विशेष दिन और भी खास बनता है।
गुरु की पूजा करके आप शिव भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। भगवान शिव जी को भी संसार का आदि गुरु माना जाता है। इसलिए इस महान अवसर को अपने हाथ से बिल्कुल भी न जाने दें। पूरी श्रद्धा भाव से अपने गुरु का वंदन करें और खुशियां पाएं।
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साल 2026 में गुरु पूर्णिमा का त्योहार आज 29 जुलाई को मनाया जाएगा। वैसे तो पंचांग के हिसाब से पूर्णिमा तिथि आज 28 जुलाई की शाम से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि की वजह से यह पर्व आज (29 जुलाई) मनेगा।
इस मौके पर सभी लोग अपने गुरुजनों का विशेष आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। इस साल गुरु पूर्णिमा पर कई अद्भुत और बेहद शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है।
Guru Purnima
क्या है सही तिथि और पूजा का समय
गुरु पूर्णिमा पर बन रहे हैं विशेष शुभ योग
धार्मिक मान्यताओं में प्रीति योग के देवता स्वयं भगवान विष्णु और स्वामी बुध ग्रह हैं। हर्षण योग इंसानों के जीवन में बड़ी सफलता, प्रसन्नता और शुभ परिणाम लेकर आता है। इसके साथ ही दोपहर तक आकाश में उत्तराषाढा नक्षत्र का मजबूत प्रभाव भी रहेगा। ये सभी अद्भुत संयोग मिलकर इस पावन दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त में करें पूजा
सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लाभ और उन्नति का शुभ मुहूर्त शुरू होगा। इसके बाद सबसे उत्तम अमृत मुहूर्त सुबह 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। दोपहर के समय आने वाला विजय मुहूर्त भी देव पूजा के लिए बहुत बढ़िया है। शाम को लाभ का एक और उत्तम मुहूर्त 05 बजकर 32 मिनट से मिलेगा।
महर्षि वेदव्यास की पौराणिक कथा
महान वेदव्यास जी ने ही सनातन धर्म के चारों पवित्र वेदों का वर्गीकरण किया था। उन्होंने ही अमर ग्रंथ महाभारत और कई प्रसिद्ध महापुराणों की सुंदर रचना की थी। वे पूरी मानव सृष्टि के सबसे पहले और महान गुरु माने जाते हैं।
पौराणिक कथाएं कहता है कि व्यास जी के महान ज्ञान से पूरी सृष्टि धन्य हुई थी। उन्होंने इंसानों को धर्म और कर्म का सबसे सच्चा पाठ सिखाया था। तभी से हर साल उनके महान सम्मान में यह सुंदर उत्सव मनाया जाता है। लोग व्यास पीठ सजाकर उनकी इस महान ज्ञान परंपरा को नमन करते हैं।
गुरु दोष करने के उपाय
उन्हें अपने निवास स्थान पर आने का एक प्यार भरा निमंत्रण अवश्य दें। जब वे घर आएं तो उनका पैर छूकर आदर से स्वागत करें। उन्हें प्रेमपूर्वक बहुत स्वादिष्ट भोजन कराएं और उनकी भरपूर मन से सेवा करें।
विदा करते समय उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ नकद दक्षिणा दें। कोई सुंदर उपहार भेंट करके उनका पावन आशीर्वाद तुरंत प्राप्त कर लें। ऐसी मान्यता है कि गुरु की सच्ची सेवा से गुरु दोष शांत होता है।
क्या है इस दिन की सही पूजन विधि
अब भगवान महर्षि वेदव्यास जी की सुंदर तस्वीर वहां पर स्थापित करें। उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ चंदन, रोली और सुंदर फूल अर्पित करें। उनके सामने ताजे फल और बहुत मीठे मिष्ठान का भोग लगाएं।
सुगंधित धूप और दीप जलाकर उनकी आरती पूरी श्रद्धा से गाएं। इस पावन दिन अपने माता-पिता और बड़े भाई-बहनों का आशीर्वाद लें। वे भी हमारे जीवन के सबसे पहले और सच्चे मार्गदर्शक होते हैं।
शास्त्रों में गुरु की महिमा का महत्व
इस पावन दिन पर दान और पुण्य करने का भी विशेष विधान है। गरीब लोगों को पीले रंग के अनाज और वस्त्र दान करने चाहिए। इससे देवगुरु बृहस्पति बहुत प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। शिक्षा के क्षेत्र में आ रही हर रुकावट तुरंत दूर हो जाती है।
इसके बाद होगी सावन महीने की शुरुआत
गुरु की पूजा करके आप शिव भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। भगवान शिव जी को भी संसार का आदि गुरु माना जाता है। इसलिए इस महान अवसर को अपने हाथ से बिल्कुल भी न जाने दें। पूरी श्रद्धा भाव से अपने गुरु का वंदन करें और खुशियां पाएं।
FAQ
- साल 2026 में गुरु पूर्णिमा कब है और पूर्णिमा तिथि कब से शुरू होगी?
साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 06:18 बजे से शुरू होकर 29 जुलाई की रात 08:05 बजे तक रहेगी। - गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा कहते हैं। - कुंडली से गुरु दोष दूर करने के लिए गुरु पूर्णिमा पर क्या उपाय करें?
गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु के घर जाएं, उन्हें घर बुलाकर पैर छूकर स्वागत करें, प्रेमपूर्वक भोजन कराएं, सेवा करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा व उपहार देकर आशीर्वाद लें।
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