भूलकर भी 3 मार्च को ग्रहण में न खेलें होली, जानें क्या कहता है शास्त्र

Kaushiki | Feb 28, 2026, 17:32 IST
holi-2026
साल 2026 की होली पर चंद्र ग्रहण का साया है, जिससे त्योहार की तारीख बदल गई है। तीन मार्च को लगने वाले ग्रहण और सूतक काल के कारण इस दिन रंग खेलना वर्जित है।

साल 2026 में होली का त्योहार थोड़ा अलग होने वाला है। आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन रंग खेले जाते हैं। लेकिन इस साल 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण के समय कोई भी उत्सव मनाना वर्जित है। ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी बढ़ जाता है।



इसी वजह से इस साल रंग वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। सूतक काल में रंग खेलना बहुत अशुभ होता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आ सकती है। मानसिक तनाव और बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं क्या कहता है हमारा धर्म।



चंद्र ग्रहण और सूतक काल का समय

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर में लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शुरू हो जाएगा। ग्रहण की समाप्ति शाम को 06:47 बजे पर होगी। ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक काल (चंद्र ग्रहण सूतक) शुरू होता है।



इस हिसाब से सूतक काल सुबह 06:20 से लगेगा। सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। मंदिरों के कपाट भी इस दौरान बंद कर दिए जाते हैं।



होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन का समय भी बहुत ही जरूरी होता है। 3 मार्च को दहन का मुहूर्त शाम 06:22 से है। यह शुभ समय रात 08:50 बजे तक रहेगा। हालांकि इस दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है।



भद्रा पूंछ का समय रात 01:25 से 02:35 तक है। भद्रा मुख का समय रात 02:35 से 04:30 तक रहेगा। शास्त्रों के मुताबिक भद्रा में दहन करना अशुभ माना गया है।



कब है रंगों वाली होली

साल 2026 में रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल होने के कारण उत्सव मनाना वर्जित है। शास्त्रों में ग्रहण के साए में रंग खेलना अशुभ होता है।



इससे मानसिक और शारीरिक कष्ट बढ़ सकते हैं। इसलिए अपनी और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए 4 मार्च को ही रंगों का त्योहार मनाना सबसे उत्तम और मंगलकारी रहेगा।



सूतक में क्यों नहीं खेलनी चाहिए होली

पंडित संतोष शर्मा के मुताबिक, सूतक काल अशुद्ध होता है। इस समय देवी-देवता कष्ट में माने जाते हैं। ग्रहण के दौरान प्रकृति में नकारात्मकता बढ़ जाती है। होली खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा का पावन पर्व है।



ग्रहण सूतक में रंग खेलने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसका बुरा असर हमारे शरीर पर भी पड़ता है। शास्त्रों में सूतक के समय उत्सव मनाना वर्जित है।



इसलिए धर्म प्रेमी लोग 4 मार्च को होली मनाएंगे। परंपराओं का सम्मान करना हमारे धर्म का हिस्सा है। नियमों का पालन करने से घर में सुख आता है। सूतक खत्म होने के बाद ही खुशियां मनाना श्रेष्ठ है।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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