3 या 4 मार्च, कब मनेगी होली 2026? राधा-कृष्ण की कृपा पाने के लिए करें ये उपाय

साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण रंगोत्सव टला है। होलिका दहन 2 मार्च की रात को शुभ मुहूर्त में होगा...

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Kaushiki
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होली 2026: भारत में होली का पर्व खुशियों और नई उमंग का संदेश लेकर आता है। साल 2026 में होली की तारीख को लेकर भक्तों में काफी असमंजस बना है। लोग दुविधा में हैं कि होली 3 मार्च को है या 4 मार्च को। 

इसका मुख्य कारण 3 मार्च 2026 को लगने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ग्रहण के समय मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

इस खगोलीय घटना के कारण होली की तारीखों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इसलिए विद्वान पंडितों ने 4 मार्च को होली मनाना श्रेष्ठ बताया है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च (होलिका दहन भद्राकाल) को शाम से शुरू होगी। 2 मार्च 2026 को शाम 05:18 बजे से भद्रा काल प्रारंभ हो जाएगा। भद्रा के मुख काल में होलिका दहन करना शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

पंडितों के मुताबिक, भद्रा पूंछ काल में दहन करना अत्यंत फलदायी और शुभ रहता है। 2 मार्च की रात 12:50 से 02:02 बजे तक दहन का श्रेष्ठ समय है। इसी समय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक अग्नि प्रज्वलित की जाएगी।

2026 में कब मनेगी होली

हिंदू पंचांग के मुताबिक, होली 2026 के अगले दिन यानी 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। ये ग्रहण शाम 05:59 बजे से शुरू होकर शाम 06:47 बजे समाप्त होगा।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के समय कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जाता। चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही सुबह से शुरू हो जाएगा।

सूतक काल में रंग खेलना और उत्सव मनाना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। इसी कारण 3 मार्च के बजाय अब होली 4 मार्च 2026 को मनेगी।

चंद्र ग्रहण का समय 

ज्योतिषों के मुताबिक, ये चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों सहित ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दिखेगा। ग्रहण का स्पर्श काल दोपहर 03:20 बजे से ही शुरू हो जाएगा। भारत में येे शाम को चंद्रोदय के समय ग्रस्तोदित रूप में दिखाई देगा।

सूतक काल 3 मार्च की सुबह 06:20 बजे से ही प्रभावी हो (चंद्र ग्रहण सूतक काल) जाएगा। सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और पूजा वर्जित होती है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान करने का विधान शास्त्रों में है।

होली पर सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय

होली का दिन केवल रंगों का नहीं बल्कि लक्ष्मी प्राप्ति का भी है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस पावन अवसर पर अपनी किस्मत चमकाने के लिए से काम कर सकते हैं। भारत में चंद्र ग्रहण

  • बांसुरी से वास्तु दोष दूर करें: 

    होली (holi) की सुबह घर के मंदिर में नई लकड़ी की बांसुरी स्थापित करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होगी और सुख-शांति का हमेशा वास रहेगा।

  • व्यापार में वृद्धि के लिए मोरपंख: 

    मोरपंख को अपने ऑफिस या दुकान की उत्तर दिशा वाली दीवार पर लगाएं। यह उपाय व्यापार में आ रही रुकावटों को दूर कर धन लाभ कराता है।

  • राधा-कृष्ण को गुलाल अर्पण: 

    दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए राधा-कृष्ण को लाल गुलाल चढ़ाएं। इससे पति-पत्नी के बीच आपसी समझ बढ़ती है और क्लेश हमेशा के लिए मिटते हैं।

  • करियर में सफलता का उपाय: 

    पूजा में इस्तेमाल किए गए मोरपंख को अपनी वर्क-डेस्क या डायरी में रखें। यह छोटा सा काम आपके करियर में नई गति और सकारात्मकता लेकर आएगा।

  • होलिका की राख का तिलक: 

    होलिका दहन के अगले दिन उसकी ठंडी राख से माथे पर तिलक लगाएं। मान्यता है कि इससे नजर दोष कटता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

  • आर्थिक तंगी से छुटकारा: 

    ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए 1 मार्च को ही धार्मिक वस्तुएं खरीदें। इन्हें घर लाने से साल भर धन-धान्य और समृद्धि की कभी कमी नहीं होगी।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

FAQ

क्या 3 मार्च को होली खेलना पूरी तरह वर्जित है?
हां, क्योंकि उस दिन सुबह से सूतक और शाम को ग्रहण रहेगा। ग्रहण काल में रंग खेलना और उत्सव मनाना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
होलिका दहन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
2 मार्च को रात 12:50 के बाद ही होलिका दहन करें। भद्रा काल में दहन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह हानिकारक होता है।
ग्रहण के बाद दान और स्नान का क्या महत्व है?
3 मार्च की शाम ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करना चाहिए। इसके बाद सामर्थ्य अनुसार अनाज और तिल का दान करना शुभ रहेगा।

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