जून में कब है निर्जला एकादशी और वट पूर्णिमा, जानें जून के व्रत और त्योहार

Kaushiki | May 28, 2026, 12:50 IST
June 2026 Vrat Tyohar
साल का छठा महीना जून 2026 धार्मिक नजरिए से बहुत खास होने वाला है। इस महीने में निर्जला एकादशी, वट पूर्णिमा और परम एकादशी जैसे कई बड़े व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। जून में ही ज्येष्ठ अधिकमास का समापन भी होगा और आषाढ़ शुरू होगा।

June 2026 Vrat Tyohar: नया महीना शुरू होने में अब बस कुछ ही दिनों का समय बचा है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, साल 2026 का छठा महीना यानी जून इस बार बेहद अनोखा रहने वाला है। इस महीने में एक तरफ जहां कई बड़े पारंपरिक व्रत और त्योहार पूरे उत्साह से मनाए जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ अंतरिक्ष में पांच बड़े ग्रहों का महागोचर भी होने जा रहा है।



द्रिक पंचांग के मुताबिक, जून महीने (2026 के व्रत और त्योहार)में अधिकमास की समाप्ति और महत्वपूर्ण ग्रहों की चाल बदलने से कई दुर्लभ धार्मिक योग बनने वाले हैं। ये जातकों के करियर और जीवन में पॉजिटिव बदलाव लाएंगे। आइए इस महीने की पूरी फेस्टिवल और गोचर लिस्ट को जानें।



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जून के व्रत और त्योहार

  • 3 जून 2026 (बुधवार):
    विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत यह व्रत भगवान गणेश जी को पूरी तरह समर्पित माना जाता है। भक्त इस दिन अपने परिवार के संकट दूर करने के लिए उपवास रखते हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत खुलता है।
  • 7 जून 2026 (रविवार):
    अधिक भानु सप्तमी यह दिन भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए बहुत उत्तम माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप मिट जाते हैं। सूर्य देव को जल चढ़ाने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
  • 8 जून 2026 (सोमवार):
    अधिक कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस शुभ तिथि पर भगवान शिव के बाल रूप काल भैरव की पूजा होती है। साथ ही इसी दिन हर महीने आने वाली कृष्ण जन्माष्टमी भी मनाई जाएगी। भक्त रात के समय भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं।
  • 11 जून 2026 (गुरुवार):
    परम एकादशी तिथि केवल अधिक मास (त्योहार का महिना) के दौरान ही आती है, इसलिए बहुत दुर्लभ है। इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा की जाती है। इस व्रत को रखने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती।
  • 12 जून 2026 (शुक्रवार):
    प्रदोष व्रत (शुक्र) और अधिक कृष्ण द्वादशी प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने का दिन है। इस दिन शाम के समय शिव जी की पूजा का विशेष महत्व है। इसे रखने से भक्तों के सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • 13 जून 2026 (शनिवार):
    मासिक शिवरात्रि व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का त्योहार मनाते हैं। इस दिन आधी रात को भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह व्रत सुख और समृद्धि देने वाला माना गया है।
  • 14 जून 2026 (रविवार):
    अधिक दर्श अमावस्या और रोहिणी व्रत यह दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। लोग इस दिन दान-पुण्य और तर्पण जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। जैन धर्म के लोग इस दिन रोहिणी व्रत का पालन करते हैं।
  • 15 जून 2026 (सोमवार):
    मिथुन संक्रांति और ज्येष्ठ अधिकमास का समापन इस दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी पवित्र दिन के साथ ही इस साल का अधिकमास भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद से सभी शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
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  • 16 जून 2026 (मंगलवार):
    चंद्र दर्शन अमावस्या के ठीक अगले दिन चंद्रमा के दर्शन करना बहुत ही फलदायी होता है। इस दिन शाम को नए चंद्रमा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति और तरक्की मिलती है।
  • 17 जून 2026 (बुधवार):
    महाराणा प्रताप जयंती यह दिन भारत के वीर योद्धा महाराणा प्रताप की याद में मनाया जाता है। पूरे देश में उनकी वीरता और साहस को याद कर कार्यक्रम होते हैं। नई पीढ़ी को उनके स्वाभिमान से प्रेरणा लेने की सीख दी जाती है।
  • 18 जून 2026 (गुरुवार):
    प्रद्युम्न चतुर्थी यह ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की बहुत ही पावन चतुर्थी तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश के साथ प्रद्युम्न जी की पूजा की परंपरा है। बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है।
  • 19 जून 2026 (शुक्रवार):
    स्कंद षष्ठी उत्सव यह त्योहार भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय जी को समर्पित होता है। दक्षिण भारत में इस उत्सव को बहुत ही बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इस दिन पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
  • 20 जून 2026 (शनिवार):
    जमाई षष्ठी त्योहार यह एक बहुत ही सुंदर और पारंपरिक सामाजिक त्योहार माना जाता है। मुख्य रूप से बंगाल में इस दिन दामाद का विशेष स्वागत किया जाता है। सास अपने दामाद की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।
  • 21 जून 2026 (रविवार):
    भानु सप्तमी और साल का सबसे बड़ा दिन यह दिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से बहुत खास है। इस दिन साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। सूर्य देव की पूजा के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है।
  • 22 जून 2026 (सोमवार):
    धूमावती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी इस दिन दस महाविद्या में से एक माता धूमावती की पूजा की जाती है। साथ ही इसी दिन मासिक दुर्गाष्टमी का पवित्र व्रत भी रखा जाएगा। माता दुर्गा के भक्त इस दिन व्रत रखकर शक्ति की पूजा करते हैं।
  • 23 जून 2026 (मंगलवार):
    महेश नवमी उत्सव यह त्योहार मुख्य रूप से माहेश्वरी समाज के लोगों द्वारा मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान महेश और पार्वती की कृपा हुई थी। समाज के लोग इस दिन विशेष जुलूस और पूजा करते हैं।
  • 25 जून 2026 (गुरुवार):
    निर्जला एकादशी व्रत और गायत्री जयंती यह पूरे साल की सभी एकादशियों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन बिना पानी पिए भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। साथ ही इस दिन माता गायत्री का प्रकटोत्सव भी मनाया जाता है।
  • 26 जून 2026 (शुक्रवार):
    रामलक्ष्मण द्वादशी निर्जला एकादशी के ठीक अगले दिन इस पावन द्वादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी की विशेष पूजा की जाती है। यह व्रत भाइयों के बीच प्रेम और सुरक्षा बढ़ाने वाला है।
  • 27 जून 2026 (शनिवार):
    शनि प्रदोष व्रत और शनि त्रयोदशी शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसका महत्व दोगुना हो जाता है। इस दिन शिव जी के साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है। कुंडली से शनि दोष दूर करने के लिए यह बहुत उत्तम है।
  • 29 जून 2026 (सोमवार):
    वट पूर्णिमा व्रत और ज्येष्ठ पूर्णिमा सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वे बरगद के पेड़ की पूजा करके उस पर सूत बांधती हैं। इसी दिन बटुक भैरव जी की जयंती भी धूमधाम से मनाई जाएगी।
  • 30 जून 2026 (मंगलवार):
    आषाढ़ महीने का आरंभ इस तारीख के साथ ही हिंदू कैलेंडर के नए महीने की शुरुआत हो जाएगी। जून का समापन आषाढ़ महीने के पहले दिन के साथ होने जा रहा है। इस महीने से वर्षा ऋतु के आगमन का स्वागत किया जाता है।
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जून में कौन से बड़े गोचर होंगे

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि बदलने को गोचर कहा जाता है। साल 2026 का जून महीना इस नजरिए से बहुत ही अद्भुत रहने वाला है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस महीने कई बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन होने जा रहा है।



इस महीने ग्रहों की चाल में जो बदलाव आ रहे हैं, वे बहुत ही दुर्लभ हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इस महागोचर से कई राशियों के लोगों का सोया हुआ भाग्य जाग जाएगा। आइए जानते हैं किस तारीख को कौन सा ग्रह गोचर करेगा।



  • 2 जून 2026:
    देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में महागोचर ज्ञान और भाग्य के देवता बृहस्पति इस दिन कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर ज्योतिष दुनिया की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके प्रभाव से जातकों के ज्ञान, धन और मान-सम्मान में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
  • 8 जून 2026:
    शुक्र ग्रह का कर्क राशि में प्रवेश सुख, समृद्धि और विलासिता के दाता शुक्र देव भी इस दिन कर्क राशि में चले जाएंगे। यहाँ पहले से मौजूद गुरु के साथ उनका मिलना एक बेहद शुभ संयोग बनाएगा। इसके कारण लोगों के प्रेम जीवन और सुख-सुविधाओं में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।
  • 15 जून 2026:
    सूर्य देव का मिथुन राशि में गोचर सम्मान के कारक सूर्य देव इस दिन वृषभ राशि छोड़कर मिथुन राशि में जाएंगे। इस गोचर के साथ ही देश भर में मिथुन संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। सूर्य का यह बदलाव नौकरीपेशा लोगों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेगा।
  • 21 जून 2026:
    मंगल ग्रह का वृषभ राशि में प्रवेश साहस, ऊर्जा और भूमि के देवता मंगल देव इस दिन वृषभ राशि में गोचर करेंगे। मंगल के इस गोचर से लोगों के भीतर नया साहस और काम करने की ऊर्जा बढ़ेगी। प्रॉपर्टी और बिजनेस के मामलों में इस दौरान बड़ा मुनाफा मिल सकता है।
  • 22 जून 2026:
    बुध ग्रह का कर्क राशि में गोचर बुद्धि और व्यापार के कारक बुध देव इस दिन कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। कर्क राशि में जाते ही वे वहां पहले से मौजूद गुरु और शुक्र के साथ युति बनाएंगे। यह अद्भुत संयोग व्यापारियों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होने वाला है।
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ग्रहों के गोचर से कैसे चमकती है किस्मत

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, हर ग्रह की अपनी एक प्रकृति और शक्ति होती है। जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि से निकलकर उच्च राशि या मित्र राशि में जाता है, तो वह बहुत मजबूत हो जाता है। ऐसे समय में वह ग्रह शुभ फल देना शुरू करता है।



जब कुंडली के अच्छे भावों में शुभ ग्रहों की युति यानी मिलन होता है, तब जातक की किस्मत अचानक चमक उठती है। जून के महीने में गुरु, शुक्र और बुध का एक ही राशि में होना ऐसा ही महासंयोग बना रहा है।



इससे रुके हुए काम पूरे होते हैं और धन लाभ होता है। ग्रहों के इस अद्भुत फेरबदल से आत्मविश्वास में बहुत बड़ी वृद्धि होती है। नौकरी में प्रमोशन और समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है। व्यापार करने वाले लोगों को इस समय पुराने निवेश से भी बहुत बड़ा रिटर्न मिलता है।



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