Pitru Paksha
पितृ पक्ष में नए सामान की खरीदारी पर क्यों होती है मनाही, जानें क्या कहता है शास्त्र
Kaushiki | Sept 15, 2026, 13:00 IST
Pitru Paksha 2026
पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है। इन 15 दिनों में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस दौरान नए कपड़े, गहने, मकान, गाड़ी और लोहे का सामान खरीदना वर्जित माना जाता है। जानिए इसके पीछे के नियम और पौराणिक वजह।
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय बहुत ही पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। यह 15 दिनों की खास अवधि हमारे उन पूर्वजों को समर्पित होती है जो अब हमारे बीच नहीं हैं।
इन दिनों में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि इस समय हमारे पूर्वज अदृश्य रूप में धरती पर आते हैं और अपने परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन 15 दिनों में नए कपड़े, गहने या गाड़ियां खरीदने से मना क्यों किया जाता है? आखिर क्यों शास्त्रों में इस समय को खरीदारी के लिए शुभ नहीं माना गया है? इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य और एक पुरानी पौराणिक कथा छिपी हुई है। आइए जानें...
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शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष कोई उत्सव या जश्न मनाने का समय नहीं है। यह समय अपनों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है। जब परिवार में किसी प्रियजन का स्मरण किया जाता है, तो मन में सादगी होनी चाहिए।
पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति अपने लिए नया सामान या फैंसी कपड़े खरीदता है, तो उसके अंदर भौतिक इच्छाएं और दिखावे का भाव पैदा होता है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद दानवीर कर्ण जब स्वर्ग पहुंचे, तो उन्हें खाने में सोना और गहने दिए गए।
जब कर्ण ने इसका कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि उन्होंने जीवन भर सोना दान किया। लेकिन अपने पितरों के नाम पर कभी भोजन या जल का दान नहीं किया। तब कर्ण को 15 दिनों के लिए वापस धरती पर भेजा गया ताकि वे अपने पूर्वजों के नाम पर अन्न और जल का दान कर सकें। इसी अवधि को पितृ पक्ष कहा गया।
इस कथा से यह सीख मिलती है कि यह समय अपनी व्यक्तिगत इच्छाएं पूरी करने का नहीं। बल्कि पितरों को तृप्त करने का है। इसलिए इन 15 दिनों में खुद के लिए नए वस्त्र, आभूषण या वाहन खरीदने से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान कुछ चीजों की खरीदारी को शास्त्रों में पूरी तरह से वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें इन दिनों घर लाने से बचना चाहिए।
हालांकि बड़े और मांगलिक सामानों की खरीदारी पर मनाही है, लेकिन शास्त्रों में कुछ छूट भी दी गई है। रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजें खरीदने में कोई बुराई नहीं है।
अगर घर में राशन या भोजन सामग्री खत्म हो गई है, तो उसे आप बिना किसी झिझक के खरीद सकते हैं। इसके अलावा, पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे कुशा, तिल, जौ और नए मिट्टी के बर्तन खरीदे जा सकते हैं।
यदि आप किसी जरूरतमंद को दान करने के लिए कपड़े या भोजन खरीद रहे हैं, तो यह कार्य अत्यंत शुभ माना जाता है। दान के लिए खरीदी गई चीजों से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार को अपना आशीर्वाद देते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और सगाई जैसे मांगलिक आयोजनों पर भी पूरी तरह रोक रहती है। इसका मुख्य कारण यह है कि मांगलिक कार्य ढोल-नगाड़ों, सजावट और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं।
इसके विपरीत, पितृ पक्ष का समय शांति, ध्यान और पूर्वजों के प्रति आदर प्रकट करने का होता है। यदि इस समय मांगलिक कार्य किए जाएं, तो इससे इस पवित्र समय की आध्यात्मिक शांति प्रभावित हो सकती है। इसलिए हमारे ऋषियों-मुनियों ने इस 15 दिन की अवधि में सभी शुभ कार्यों को स्थगित रखने का नियम बनाया था।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। पितरों का श्राद्ध
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इन दिनों में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि इस समय हमारे पूर्वज अदृश्य रूप में धरती पर आते हैं और अपने परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन 15 दिनों में नए कपड़े, गहने या गाड़ियां खरीदने से मना क्यों किया जाता है? आखिर क्यों शास्त्रों में इस समय को खरीदारी के लिए शुभ नहीं माना गया है? इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य और एक पुरानी पौराणिक कथा छिपी हुई है। आइए जानें...
पितृ पक्ष की पौराणिक मान्यता
पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति अपने लिए नया सामान या फैंसी कपड़े खरीदता है, तो उसके अंदर भौतिक इच्छाएं और दिखावे का भाव पैदा होता है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद दानवीर कर्ण जब स्वर्ग पहुंचे, तो उन्हें खाने में सोना और गहने दिए गए।
जब कर्ण ने इसका कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि उन्होंने जीवन भर सोना दान किया। लेकिन अपने पितरों के नाम पर कभी भोजन या जल का दान नहीं किया। तब कर्ण को 15 दिनों के लिए वापस धरती पर भेजा गया ताकि वे अपने पूर्वजों के नाम पर अन्न और जल का दान कर सकें। इसी अवधि को पितृ पक्ष कहा गया।
इस कथा से यह सीख मिलती है कि यह समय अपनी व्यक्तिगत इच्छाएं पूरी करने का नहीं। बल्कि पितरों को तृप्त करने का है। इसलिए इन 15 दिनों में खुद के लिए नए वस्त्र, आभूषण या वाहन खरीदने से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष में क्या न खरीदें
- सबसे पहले, व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए नए फैंसी कपड़े और महंगे आभूषण नहीं खरीदने चाहिए। माना जाता है कि नए कपड़े पहनने से व्यक्ति का ध्यान साधना और तर्पण से हटकर खुद के रूप-रंग पर चला जाता है।
- दूसरा, इस अवधि में नया मकान, जमीन या नई गाड़ी खरीदना अशुभ माना जाता है। ये बड़ी खरीदारियां जीवन में उत्सव और खुशी का माहौल लाती हैं, जबकि पितृ पक्ष की प्रकृति अत्यंत गंभीर और संयमित होती है।
- तीसरा, पितृ पक्ष के दिनों में लोहे का नया सामान, झाड़ू, नमक और सरसों का तेल घर लाना वर्जित माना गया है। लोहे को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए श्राद्ध कर्म के दिनों में इसे खरीदने से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष में क्या खरीद सकते हैं
अगर घर में राशन या भोजन सामग्री खत्म हो गई है, तो उसे आप बिना किसी झिझक के खरीद सकते हैं। इसके अलावा, पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे कुशा, तिल, जौ और नए मिट्टी के बर्तन खरीदे जा सकते हैं।
यदि आप किसी जरूरतमंद को दान करने के लिए कपड़े या भोजन खरीद रहे हैं, तो यह कार्य अत्यंत शुभ माना जाता है। दान के लिए खरीदी गई चीजों से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार को अपना आशीर्वाद देते हैं।
शुभ और मांगलिक कार्यों पर क्यों है रोक
इसके विपरीत, पितृ पक्ष का समय शांति, ध्यान और पूर्वजों के प्रति आदर प्रकट करने का होता है। यदि इस समय मांगलिक कार्य किए जाएं, तो इससे इस पवित्र समय की आध्यात्मिक शांति प्रभावित हो सकती है। इसलिए हमारे ऋषियों-मुनियों ने इस 15 दिन की अवधि में सभी शुभ कार्यों को स्थगित रखने का नियम बनाया था।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। पितरों का श्राद्ध
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