शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को ऐसे करें प्रसन्न, जानें इनकी कथा, शुभ रंग, प्रिय भोग और शक्तिशाली मूल मंत्र
Kaushiki | Oct 11, 2026, 06:00 IST
मां शैलपुत्री की पूजा से करें नई शुरुआत
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। पहले दिन मां शैलपुत्री पूजा का विधान है। दुर्गा सप्तशती के मुताबिक मां शैलपुत्री प्रकृति का रूप हैं। इस दिन घटस्थापना कर नियम से पूजा करें। यह पूजा जीवन में स्थिरता और मजबूत नींव बनाने की सीख देती है।
इस दिन घटस्थापना के साथ ही माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। वह प्रकृति और पृथ्वी का साक्षात स्वरूप मानी जाती हैं।
दुर्गा सप्तशती में मां शैलपुत्री के दिव्य प्रभाव का विस्तार से वर्णन है। वे अपने भक्तों को जीवन में स्थिरता और धैर्य प्रदान करती हैं। नवरात्रि का पहला दिन नई शुरुआत का प्रतीक माना गया है। इस दिन संकल्प लेकर हम अपनी पुरानी बुरी आदतों को छोड़ सकते हैं।
मां का यह रूप हमें पर्यावरण की रक्षा करने का संदेश देता है। आज धरती पर लगातार प्रदूषण और कचरा बढ़ रहा है। पेड़ तेजी से कट रहे हैं और नदियां गंदी हो रही हैं। मां शैलपुत्री की पूजा का सच्चा अर्थ धरती को सुरक्षित रखना है। आइए शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जानें कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा।
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
दक्ष ने इस यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया। लेकिन उन्होंने भगवान शिव और सती को बुलावा नहीं भेजा। सती अपने पिता के घर जाने के लिए बहुत उत्सुक थीं। भगवान शिव के मना करने पर भी वे यज्ञ में गईं। वहां पिता दक्ष ने भगवान शिव का भारी अपमान किया।
सती अपने पति का अपमान सहन न कर सकीं। उन्होंने यज्ञ की योगाग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। अगले जन्म में उन्होंने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। हिमालय की पुत्री होने के कारण ही वे शैलपुत्री कहलाईं। इस जन्म में भी उन्होंने कठोर तपस्या करके शिव को पाया।
कैसा करें मां शैलपुत्री की पूजा
स्वच्छ और साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें। सबसे पहले कलश की स्थापना करके गणेश जी का पूजन करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें।
मां को रोली, अक्षत और ताजे फूल अर्पित करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग बेहद प्रिय है। इसलिए मां को सफेद फूल और सफेद वस्त्र चढ़ाएं। भोग में देसी घी या गाय के दूध की मिठाई अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर मां की आरती करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बेहद शुभ होता है। अंत में परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें।
मां शैलपुत्री का मूल मंत्र
ध्यान श्लोक (पूजा के समय जप के लिए):
वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
पूजा में क्या करें और क्या न करें
घर के बुजुर्गों और महिलाओं का आदर करना बेहद जरूरी है। मांस या मदिरा का सेवन घर में भूलकर भी न करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें और सच बोलने का प्रयास करें। जरूरतमंद लोगों की मदद करके आप मां का आशीर्वाद पा सकते हैं।
मां शैलपुत्री हमें क्या सिखाती हैं
शुरुआत में हर इंसान एक बिगिनर या नया सीखने वाला होता है। ऐसे समय में खुद पर भरोसा रखना सबसे बड़ी ताकत बनता है। जब आप आत्मनिर्भर बनते हैं तो आपका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी घबराना नहीं चाहिए।
आज के समय में एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग बहुत आम हो गई है। लोग छोटी-छोटी बातों पर बहुत अधिक तनाव लेने लगते हैं। माँ शैलपुत्री की पूजा मन को ग्राउंडेड और शांत रखती है। जब मन भटकने लगे तो अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रकृति के बीच समय बिताने से तनाव तेजी से कम होता है। सुबह घास पर पैदल चलें और ताजी हवा में सांस लें। जब आप मिट्टी और प्रकृति से जुड़ेंगे तो मन स्थिर होगा। जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना शांति से करना सीखें।
मां शैलपुत्री की आरती
करें देवता जय जयकार॥
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो॥
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें।
भक्ति भाव से दर्शन पायें॥
शिव शक्ति की महिमा न्यारी।
तुम्हीं हो जग की पालनहारी॥
जो भी शरण तुम्हारी आवे।
सो नर मनवांछित फल पावे॥
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- मां शैलपुत्री की पूजा कब की जाती है?
मां शैलपुत्री की पूजा शारदीय नवरात्रि के पहले दिन, यानी 11 अक्टूबर 2026 को की जाती है। - क्या मां शैलपुत्री की पूजा का कोई विशेष महत्व है?
हां, मां शैलपुत्री की पूजा जीवन में स्थिरता और धैर्य प्रदान करती है। यह दिन नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह पर्यावरण की रक्षा का संदेश भी देता है। - मां शैलपुत्री की पूजा कैसे की जाती है?
मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, घर के मंदिर की सफाई करें, फिर कलश की स्थापना करके मां की तस्वीर स्थापित करें। मां को सफेद फूल और वस्त्र अर्पित करें, भोग में देसी घी या गाय के दूध की मिठाई अर्पित करें और अंत में परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
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