सूर्य देव का मकर राशि में गोचर, जानें सूर्य के 12 स्वरूपों का रहस्य

Kaushiki | Jan 15, 2026, 13:24 IST
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मकर संक्रांति पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं। पुराणों के मुताबिक, सूर्य के 12 रूप हमारे जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करते हैं।

News in short

  • 14 जनवरी को सूर्य देव धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है।
  • शास्त्रों में सूर्य के 12 स्वरूप साल के 12 महीनों और जीवन की अलग-अलग ऊर्जाओं को नियंत्रित करते हैं।
  • मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य देने और उनके 12 नामों का जाप करने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • आज से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
  • ज्योतिष में इसे पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) का मिलन माना जाता है।

News in detail

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Latest Religious News:14 जनवरी को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि त्याग कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस गोचर को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।



ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य देव हर महीने अपनी राशि बदलते रहते हैं। जब वे एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं, तो उसे संक्रांति कहते हैं।



वेदों और पुराणों में सूर्य देव के 12 अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन मिलता है। इन 12 रूपों को आदित्य कहा जाता है। ये साल के 12 महीनों के प्रतीक हैं। आइए सूर्य देव के इन दिव्य स्वरूपों को विस्तार से समझते हैं...



Important Facts

द्वादश आदित्य के नाम और महत्व - 12 Aditya names in Hindi


12 आदित्यों का स्वरूप और उनका महत्व

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य देव के 12 स्वरूपों की पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य और शक्ति प्राप्त होती है। प्रत्येक मास का आदित्य हमारे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना प्रभाव डालता है।



  • अंशुमान: ये सूर्य देव का वह रूप हैं जो हमें तेज और रोशनी प्रदान करते हैं।
  • अर्यमा: अर्यमा पितरों के देव माने जाते हैं और जीवन में अनुशासन लाते हैं।
  • इंद्र: देवराज इंद्र के रूप में सूर्य देव ऐश्वर्य और सत्ता का सुख देते हैं।
  • त्वष्टा: यह स्वरूप वनस्पतियों और औषधियों में प्राण शक्ति का संचार करता है।
  • धाता: सृष्टि के रचयिता के रूप में ये हर जीव का पालन-पोषण करते हैं।
  • पर्जन्य: बादलों के स्वामी के रूप में ये वर्षा और हरियाली के कारक हैं।
  • पूषा: यह स्वरूप अन्न और पोषण प्रदान कर दरिद्रता का नाश करता है।
  • भग: सौभाग्य और ऐश्वर्य देने वाले इस रूप की पूजा सुख बढ़ाती है।
  • मित्र: विश्व के कल्याण और मैत्री भाव का संचार करने वाला सौम्य रूप है।
  • वरुण: जल तत्व के अधिपति के रूप में ये जगत को शीतलता प्रदान करते हैं।
  • विवस्वान: ये अग्नि स्वरूप हैं जो पाचन शक्ति और तेज को नियंत्रित करते हैं।
  • विष्णु: यह स्वरूप अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना में सहायक होता है।
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मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा विधि

  • मकर संक्रांति पर उत्तरायण होते सूर्य देव की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
  • तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन और फूल डालकर अर्घ्य अर्पित करें।
  • सूर्य के 12 नामों का जाप करने से कुंडली के दोष दूर होते हैं।
  • दान-पुण्य करने से अक्षय पुण्य मिलता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
  • भगवान सूर्य की कृपा से मनुष्य को मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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सूर्य देव के गोचर का वैज्ञानिक प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तरायण का समय देवताओं का दिन माना जाता है। वैज्ञानिक रूप से भी इस दिन से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य की किरणें सीधी होने के कारण शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।



यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है। 12 आदित्यों का ध्यान करने से सभी शारीरिक रोगों से मुक्ति मिल जाती है।



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संक्रांति का ज्योतिषीय विज्ञान

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य का मकर राशि में आना केवल एक धार्मिक घटना नहीं बल्कि खगोलीय घटना भी है। इस दिन सूर्य की स्थिति बदलने से पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में प्रकाश बढ़ने लगता है। ज्योतिष में सूर्य को 'आत्मा' और शनि को 'कर्म' का कारक माना जाता है।



मकर राशि शनि की राशि है, इसलिए यहां सूर्य का आना पिता-पुत्र के मिलन और कर्म प्रधान समय की शुरुआत है। यह समय नई शुरुआत, संकल्प लेने और पुराने नकारात्मक कर्मों को त्यागने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।



निष्कर्ष

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नई शुरुआत और शुभ कार्यों का आगाज

मकर संक्रांति के साथ ही अब देश भर में मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुभ शुरुआत हो जाएगी। हालांकि, साल 2026 में शुक्र तारा अस्त होने की वजह से विवाह के मुख्य और बड़े मुहूर्त फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू होंगे। ज्योतिषीय दृष्टि से अगले 30 दिन सूर्य देव मकर राशि में रहकर आपके करियर में अनुशासन और बड़ी स्थिरता लेकर आएंगे।



सूर्य के 12 दिव्य स्वरूपों की आराधना न केवल हमारी सोई हुई ऊर्जा को जगाती है, बल्कि हमें अंधकार को मिटाकर जीवन में नया प्रकाश फैलाने की प्रेरणा भी देती है। भक्ति और दान का यह पावन संगम हमें आने वाले पूरे साल के लिए नई शक्ति, असीम मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQ

  1. सूर्य देव के 12 स्वरूपों को सामूहिक रूप से क्या कहा जाता है?
    सूर्य देव के इन 12 रूपों को हिंदू शास्त्रों में द्वादश आदित्य कहा जाता है।
  2. मकर संक्रांति पर सूर्य देव किस राशि में प्रवेश करते हैं?
    मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
  3. सूर्य के 12 रूपों की पूजा करने से क्या विशेष लाभ होता है?
    इनकी पूजा से आरोग्य, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

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