वैशाख माह 2026: शुरू हुआ माधव मास, जानें क्यों कहते हैं इसे महीनों का राजा?

Kaushiki | Mar 31, 2026, 15:34 IST
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वैशाख माह 2026: वैशाख माह 2026 की शुरुआत आज 3 अप्रैल से हो रहा है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

वैशाख माह 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक, वैशाख साल का दूसरा सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे सभी 12 महीनों का राजा कहा गया है। स्कंद पुराण में नारद जी ने इस माह की बड़ी महिमा बताई है।



वैशाख माह को गंगा और स्वर्ण के समान श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। ये पवित्र महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। इस दौरान किए गए जप और तप का फल कभी खत्म नहीं होता। आइए जानें वैशाख महीने का महत्व...



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वैशाख माह की शुरुआत कब से होगी

साल 2026 में वैशाख माह की शुरुआत आज 3 अप्रैल, शुक्रवार से होगी। चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन से वैशाख कृष्ण पक्ष शुरू हो जाता है। पंचांग के मुताबिक, प्रतिपदा तिथि 2 अप्रैल की सुबह 7:41 बजे से प्रारंभ हो जाएगी।



उदयातिथि के मुताबिक,वैशाख माह का पहला दिन 3 अप्रैल को माना जाएगा। इस महीने का समापन 1 मई को वैशाख पूर्णिमा के साथ होगा। वैशाख के पहले दिन व्याघात योग और चित्रा नक्षत्र का संयोग रहेगा।



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विशाखा नक्षत्र से जुड़ा है इसका नामकरण

धार्मिक ग्रंथों में वैशाख माह का नामकरण विशाखा नक्षत्र के आधार पर किया गया है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होने के कारण ये वैशाख कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस समय सूर्य देव मेष राशि में होते हैं।



सूर्य का अपनी उच्च राशि में होना इस माह को शुभ बनाता है। चंद्रमा भी इस दौरान वृषभ राशि में उच्च के होकर फल देते हैं। ग्रहों का यह दुर्लभ संयोग पूरे वर्ष में केवल एक बार बनता है। वैशाख माह का एक नाम माधव मास भी है।



'मा' का अर्थ है लक्ष्मी और 'धवा' का अर्थ है पति। यानी लक्ष्मी जी के पति भगवान विष्णु का महीना। मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। इसलिए सुबह-सुबह जल में स्नान करने का इतना ज्यादा महत्व बताया गया है।



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वैशाख माह की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में धर्मांगद नाम के एक राजा थे। उन्होंने एक बार नारद जी से पूछा कि सभी महीनों में वैशाख ही इतना श्रेष्ठ क्यों है? नारद जी ने बताया कि भगवान विष्णु ने वैशाख मास को अपना स्वरूप माना है।



जो फल कठिन तपस्या और यज्ञों से नहीं मिलता, वह वैशाख में केवल जल दान और स्नान से मिल जाता है। एक अन्य कथा के मुताबिक, इसी महीने में त्रेता युग का आरंभ हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का प्राकट्य भी इसी महीने की अक्षय तृतीया को हुआ था।



देवताओं ने जब दानवों से त्रस्त होकर भगवान विष्णु की शरण ली, तब प्रभु ने वैशाख में ही उन्हें विजय का मार्ग बताया था। इसलिए इस महीने को माधो मास (विष्णु जी का महीना) भी कहा जाता है। जो व्यक्ति इस माह में राहगीरों को पानी पिलाता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है।



वैशाख माह में क्या-क्या करें

  • वैशाख के महीने में भीषण गर्मी अपनी चरम सीमा पर होती है।
  • इस समय प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना गया है।
  • शास्त्रों में जल दान करने वाले पर विष्णु जी प्रसन्न रहते हैं।
  • पक्षियों और पशुओं के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना बहुत शुभ है।
  • इस महीने में राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना अत्यंत फलदायी होता है।
  • जल दान के साथ ही पंखा और छाता दान करना चाहिए।

वैशाख माह में क्या न करें

  • देर तक न सोएं: इस महीने सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना गया है।
  • तेल मालिश से बचें: शास्त्रों के अनुसार वैशाख में शरीर पर तेल लगाना वर्जित है।
  • दोपहर में न सोएं: दिन के समय सोने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
  • तामसिक भोजन न करें: मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसी चीजों से दूर रहें।
  • कांस्य पात्र का त्याग: इस महीने कांसे के बर्तन में भोजन करना शुभ नहीं माना जाता।
  • दो बार भोजन न करें: वैशाख में केवल एक समय भोजन करने का विशेष महत्व बताया गया है।
  • परनिंदा न करें: किसी की बुराई या झूठ बोलने से बचें, मन को शांत और पवित्र रखें।

वैशाख माह के धार्मिक नियम

  • इस पवित्र महीने में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना जरूरी माना गया है।
  • विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं।
  • साधक को इस पूरे महीने सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
  • कांसे के बर्तन में भोजन करने की शास्त्रों में मनाही की गई है।
  • प्रतिदिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करनी चाहिए।
  • तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने से सुख-समृद्धि आती है।
  • नए मिट्टी के घड़े में पानी भरकर दान करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों प्रसन्न होते हैं।

पितरों का आशीर्वाद और अक्षय पुण्य

  • वैशाख के महीने में पितरों के तर्पण का भी विधान बताया गया है।
  • पितरों को जल अर्पित करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
  • अक्षय तृतीया जैसा बड़ा पर्व भी इसी पावन महीने में आता है।
  • इस दिन सोना खरीदना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है।
  • यह महीना हमें पर्यावरण और मानवता की सेवा का संदेश देता है।

यह महीना (Vaishakh Month) सिखाता है कि सेवा, विशेषकर गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना ईश्वर की सबसे बड़ी भक्ति है। इसी भक्ति के कारण वैशाख (Vaishakh Purnima) को सभी 12 महीनों का अधिपति माना गया है।



वैशाख महीने के व्रत-त्योहार

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