त्रिदेवों के तेज से कैसे जन्मीं मां विजया और किया महिषासुर का वध, जानें क्या है विजयादशमी और महिषासुर वध का पौराणिक सच
Kaushiki | Oct 18, 2026, 11:02 IST
क्या है विजयादशमी महिषासुर मर्दिनी की कथा
विजयादशमी महिषासुर मर्दिनी का विजयोत्सव अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। देवी भागवत पुराण के मुताबिक त्रिमूर्ति के दिव्य तेज से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवी भागवत पुराण में मां की जीत की कथा दर्ज है। मां ने दशमी तिथि पर असुर महिषासुर का वध किया। विजयादशमी का दिन सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के बाद विजया देवी की विशेष पूजा होती है।
यह कथा ब्रह्मांड की रक्षक मां भगवती के महाअवतार से जुड़ी है। देवी भागवत पुराण में इसका बहुत सुंदर वर्णन मिलता है। जब पाप और अधर्म का अंधकार धरती पर छा गया था। तब देवता भी अपनी रक्षा के लिए असमर्थ हो गए थे।
तभी ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मिलकर एक दिव्य शक्ति रची। उसी तेज से अद्भुत मां दुर्गा का जन्म हुआ था। उन्होंने दस दिनों तक भयानक युद्ध लड़कर सृष्टि को बचाया। 10वें दिन महिषासुर का अंत करके धर्म की स्थापना की। इसलिए यह दिन सभी के लिए खास बनता है।
जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ा
उसने देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया था। सभी देवता अपनी जान बचाकर दर-दर भटकने लगे थे। महिषासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था। उसके डर से ऋषि और मुनि भी कांपने लगे थे। सृष्टि का संतुलन पूरी तरह बिगड़ने लगा था।
त्रिदेवों के तेज का चमत्कार
उस तेजोपुंज से एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। उनका रूप अत्यंत तेजस्वी और अलौकिक था। भगवान शिव के तेज से उनका मुख बना। विष्णु जी के तेज से उनकी भुजाएं बनीं। ब्रह्मा जी के तेज से उनके चरण प्रकट हुए। इस तरह मां का प्राकट्य हुआ।
मां दुर्गा को देखकर देवता बहुत प्रसन्न हुए। सभी ने मां को अपने श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र सौंप दिए। शिव जी ने मां को अपना त्रिशूल दिया। विष्णु जी ने अपना चक्र मां को समर्पित किया। वरुण देव ने शंख और अग्नि ने शक्ति प्रदान की। हिमालय पर्वत ने मां को सवारी के लिए सिंह दिया। इस तरह देवी पूरी तरह सज्जित हो गईं। मां की हुंकार से पूरी धरती कांपने लगी थी। असुरों के दिल में डर बैठ गया था।
नवरात्रि का नौ दिन और महिषासुर का वध
10वें दिन महिषासुर अपने असली भैंसे के रूप में आया। उसने मां पर आक्रमण करने की अंतिम कोशिश की। मां दुर्गा ने अपने पांव से उसे दबा दिया। फिर अपने त्रिशूल से उसकी छाती पर प्रहार किया। मां ने चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। महिषासुर का अंत होते ही स्वर्ग में खुशी छा गई। अधर्म पर धर्म की शानदार जीत हुई। इस विजय के कारण मां महिषासुर मर्दिनी कहलाईं। उसी दिन से विजयादशमी का पर्व शुरू हुआ।
विजया देवी की पूजा का विधान
राजा विक्रमादित्य भी इसी दिन यात्रा करते थे। आज के दिन अपराजिता पौधे की पूजा का रिवाज है। यह पूजा जीवन में सफलता और कीर्ति प्रदान करती है। सच्चे मन से प्रार्थना करने पर बाधाएं दूर होती हैं।
शमी वृक्ष और अस्त्र पूजा का सच
इसलिए लोग इस दिन अपने शस्त्रों और वाहनों की पूजा करते हैं। अपने काम के साधनों का सम्मान करना सिखाता है यह पर्व। यह परंपरा हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
विजयादशमी का पौराणिक संदेश
यह त्योहार समाज को एक सूत्र में पिरोता है। इस दिन शमी के पत्ते बांटकर और बड़ों का आशीर्वाद लेकर रिश्तों की कड़वाहट दूर की जाती है। देवी भागवत पुराण सिखाता है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं।
त्रिमूर्ति के तेज से जन्मी मां दुर्गा का यह विजयोत्सव हमें हर परिस्थिति में धैर्य और साहस बनाए रखने की सीख देता है। अपने भीतर की अच्छाई को जगाना और धर्म के रास्ते पर चलना ही इस पावन पर्व का असली संदेश है। तो आइए इस दशहरे पर बुराई छोड़कर सच्चाई का संकल्प लें।
FAQs:
- विजयादशमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
विजयादशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो महिषासुर के वध के दिन का स्मरण करता है। यह दिन मां दुर्गा की पूजा और उनकी शक्ति का सम्मान करने का पर्व है। - महिषासुर का वध कैसे हुआ था?
महिषासुर का वध देवी दुर्गा ने किया था, जिन्होंने दस दिन तक उसके साथ भीषण युद्ध किया और अंततः उसे अपने त्रिशूल से पराजित किया। - विजयादशमी के दिन कौन-कौन सी पूजा की जाती है?
विजयादशमी के दिन विजया देवी की विशेष पूजा की जाती है, साथ ही शमी के वृक्ष और अस्त्रों की पूजा का भी प्रचलन है। यह पूजा जीवन में सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए की जाती है।
भोपाल मास्टर प्लान पर बीजेपी में घमासान, अफसरों की कॉलोनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप, प्लान रद्द करने की मांग
By Amresh Kushwaha
रायपुर में मिठाइयों के बीच मिले मरे कॉकरोच और कीड़े, 4 दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड, 150 किलो मिठाई नष्ट
By Umeshwari Baghel
एमपी मेडिकल बिल घोटाला: 2.87 करोड़ के गबन में फंसे पुलिसकर्मी फिर प्रमोशन की दौड़ में
By Aman Vaishnav
जन्म प्रमाणपत्र के लिए अब कोर्ट जाना होगा, इंदौर-उज्जैन में नया जन्म प्रमाणपत्र का नियम लागू लेकिन व्यवस्था अधूरी
By Manya Jain
मदन राठौड़ के बयान के विरोध में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, अजमेर में BJP दफ्तर पर लिखे अमर्यादित नारे
By Jageshwar prasad
एमपी में देशी शराब की बोतलों में 21% तक कम मिला अल्कोहल, डिस्टिलरियों के खेल पर विभाग खामोश
By Aman Vaishnav
जल जीवन मिशन घोटाला: जेल से बाहर आए महेश जोशी, बोले- सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं
By Jageshwar prasad