गुजरात का गरबा हो या बंगाल की पूजा, देशभर में दिखती है मां दुर्गा की भक्ति के अनोखे रंग, जानें देश में नवरात्रि की रस्में
Kaushiki | Oct 12, 2026, 13:37 IST
कन्याकुमारी से कश्मीर तक, जानें मां अंबा की भक्ति के अनोखे तरीके
शारदीय नवरात्रि में देश भर में भक्ति का अनोखा रूप दिखेगा। नवरात्रि में गुजरात का गरबा, बंगाल की दुर्गा पूजा और कुल्लू का दशहरा इस पर्व को खास बनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य में मां दुर्गा की पूजा अलग अंदाज में होती है। आइए देशभर की इन खूबसूरत परंपराओं के बारे में जानें।
भारत की खूबसूरती उसकी विविध संस्कृति में बसती है। जब त्योहार आते हैं, तो यह रंग और गहरा हो जाता है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो गया है। इसका समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ होगा।
नौ दिनों तक पूरा देश भक्ति में डूब जाता है। तो ऐसे में नवरात्रि के समय उत्तर के पहाड़ों से दक्षिण के समुद्र तटों तक खुशी छा जाती है। गुजरात के गरबा मैदान रौशन हो उठते हैं।
बंगाल में बड़े-बड़े पूजा पंडाल सज जाते हैं। हर राज्य की अपनी एक अनोखी कहानी है। पूजा का तरीका अलग है, लेकिन भक्ति भावना एक है। आइए जानते हैं देश भर की इन खूबसूरत परंपराओं के बारे में।
पहाड़ों के बीच बसे कश्मीर में नवरात्रि बेहद शांत और पवित्र तरीके से मनती है। कश्मीरी पंडितों के लिए यह समय बहुत खास होता है। यहां लोग माता खीर भवानी के मंदिर में जाकर प्रार्थना करते हैं। भक्त पूरे नौ दिन उपवास रखकर व्रत का पालन करते हैं। मंदिर का माहौल पूरी तरह भक्ति से भर जाता है।
हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि के बाद एक नया उत्सव शुरू होता है। इसे हम कुल्लू दशहरा के नाम से जानते हैं। यहां भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। अलग-अलग घाटियों से देवी-देवताओं की पालकियां आती हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन इस उत्सव को बेहद खास बनाती है।
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में नवरात्रि का रूप थोड़ा बदल जाता है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है। लोग शाम को परिवार के साथ रामलीला देखने निकलते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन नन्हीं कन्याओं को पूजा जाता है। उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया जाता है।
गुजरात में नवरात्रि का मतलब है संगीत, नृत्य और खुशियां। यहां की नौ रातें बहुत रंगीन और संगीतमय होती हैं। लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक चनिया-चोली और केडियू पहनते हैं। मां अंबा की आरती के बाद गरबा और डांडिया शुरू होता है। यह नृत्य देर रात तक लगातार चलता रहता है।
राजस्थान में नवरात्रि की अपनी अलग शाही परंपरा है। यहां पूर्व राजघरानों में कुलदेवी की विशेष पूजा की जाती है। जयपुर और जोधपुर के महलों में भव्य आयोजन होते हैं। लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर भक्ति गीतों पर झूमते हैं। शक्ति की उपासना के साथ यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
पूर्वी भारत में नवरात्रि को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। मां दुर्गा की विशाल और सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। ढाक की आवाज से पूरा शहर गूंज उठता है। विजयदशमी के दिन सुहागिन महिलाएं सिंदूर खेला की खास रस्म निभाती हैं।
असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में नवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। यहां तांत्रिक और साधक साधना करने आते हैं। ओडिशा में भी भव्य पंडाल सजाए जाते हैं। कटक शहर में चांदी के मेढ़ (चांदी की सजावट) वाले दुर्गा पंडाल पूरी दुनिया में मशहूर हैं।
महाराष्ट्र में नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। लोग अपने घरों और सोसायटियों में मिट्टी का कलश स्थापित करते हैं। मुंबई जैसे बड़े शहरों में डांडिया नाइट्स का आयोजन होता है। बॉलीवुड गानों और पारंपरिक धुनों पर लोग देर रात तक थिरकते हैं।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में नवरात्रि को 'बोम्मु गोलू' के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान घरों में लकड़ी की सीढ़ियों पर देवियों की रंग-बिरंगी मूर्तियां सजाई जाती हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर ये झांकियां देखते हैं। आने वाले मेहमानों को प्रसाद और उपहार दिए जाते हैं।
कर्नाटक के मैसूर शहर का 'दसराह' पूरी दुनिया में जाना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मैसूर महल को लाखों बल्बों से सजाया जाता है। विजयदशमी पर जंबो सवारी निकाली जाती है। इसमें सजाए गए हाथी पर सोने के हौदे में चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति रखी जाती है।
देश के दक्षिणी छोर पर बसे कन्याकुमारी में अलग ही रौनक होती है। यहां के प्रमुख मंदिरों से देवी की मूर्तियां निकाली जाती हैं। यह एक पारंपरिक शोभायात्रा के रूप में शहर में घूमती है। दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्रों की धुन वातावरण को पवित्र बनाती है। मंदिर की सजावट देखने लायक होती है।
तो संस्कृति और आस्था के विविध रंगों से सजा ये पर्व पूरे देश को एकता के अनूठे सूत्र में पिरोता है। पूजा-अर्चना के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन हर दिल में मां दुर्गा की भक्ति की एक ही ज्योत जलती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
नौ दिनों तक पूरा देश भक्ति में डूब जाता है। तो ऐसे में नवरात्रि के समय उत्तर के पहाड़ों से दक्षिण के समुद्र तटों तक खुशी छा जाती है। गुजरात के गरबा मैदान रौशन हो उठते हैं।
बंगाल में बड़े-बड़े पूजा पंडाल सज जाते हैं। हर राज्य की अपनी एक अनोखी कहानी है। पूजा का तरीका अलग है, लेकिन भक्ति भावना एक है। आइए जानते हैं देश भर की इन खूबसूरत परंपराओं के बारे में।
कश्मीर में माता खीर भवानी की पूजा
हिमाचल में सजता है कुल्लू का दशहरा
पंजाब और दिल्ली में रामलीला की धूम
गुजरात में गरबा और डांडिया की मस्ती
राजस्थान में राजपूती अंदाज में पूजा
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का आकर्षण
असम और ओडिशा में अनोखा उत्सव
महाराष्ट्र में घटस्थापना और गरबा की रंगत
दक्षिण भारत में बोम्मु गोलू की परंपरा
कर्नाटक में मैसूर मैसूर दसरा की शान
कन्याकुमारी में पारंपरिक धार्मिक यात्राएं
तो संस्कृति और आस्था के विविध रंगों से सजा ये पर्व पूरे देश को एकता के अनूठे सूत्र में पिरोता है। पूजा-अर्चना के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन हर दिल में मां दुर्गा की भक्ति की एक ही ज्योत जलती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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