राज्य में GST फ्रॉड में सबसे आगे हैं इंदौरी, 90% टैक्स चोरी यहीं से, फर्जी टैक्स क्रेडिट में मध्यप्रदेश से आगे है छत्तीसगढ़!

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Ruchi Verma
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राज्य में GST फ्रॉड में सबसे आगे हैं इंदौरी, 90% टैक्स चोरी यहीं से,
फर्जी टैक्स क्रेडिट में मध्यप्रदेश से आगे है छत्तीसगढ़!

BHOPAL: देश में सेवा एंव वस्तु कर (GST) को लागू हुए करीब 6 साल हो चुके हैं। और सरकार लगातार इस कोशिश में है कि टैक्स चोरी को रोका जा सके। लेकिन आए दिन देश-प्रदेश के किसी-न-किसी कोने से टैक्स चोरी के भी मामले सामने आ रहे हैं। शातिर लोग तरह-तरह से टैक्स चोरी के हथकंडे अपना रहे हैं। इससे सरकार के कान खड़े हो गए हैं। GST सिस्टम को दुरुस्त करने की कवायद में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने देश के सभी राज्यों में GST सर्वे अभियान चलाया है। केंद्रीय जीएसटी भोपाल जोन के संयुक्त आयुक्त प्रणेश गुप्ता ने बताया कि फर्जी कंपनियों द्वारा जीएसटी नंबर लेकर कर चोरी करने पर रोक लगाने के लिए हाल ही में एक मुहिम शुरू की गई है। इस कार्यवाहीं के तहत ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की भी कई सरकारी-गैर सरकारी इकाइयां जांच के दायरे में हैं। 16 मई को शुरू हुआ ये अभियान 15 अगस्त तक जारी रहेगा।





मध्य प्रदेश में हुई 125 करोड़ की GST चोरी





अभियान के तहत मध्य प्रदेश में पिछले दो महीने के दौरान 1000 से भी ज्यादा डीलर्स/फर्म्स/रेजिस्ट्रेशन्स का वेरिफिकेशन हो चुका है। इनमे से 40 फीसदी यानी 400 फर्म्स नॉन-एक्सिस्टेंट थी, यानी ये फर्म्स सिर्फ कागज़ों में मौजूद थी असल में नहीं! अधिकारियों द्वारा दी गई जानकरी के अनुसार राज्य में इस दौरान 125 करोड़ की GST चोरी पकड़ी गई। जांचकर्ताओं ने 350 फर्म्स का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड/कैंसिल कर दिया है। अधिकारी ने द सूत्र को बताया कि अभी 600 फर्म्स का वेरिफिकेशन और किया जाएगा।





मध्य प्रदेश में 90 फीसदी GST चोरी आर्थिक राजधानी इंदौर से!





अधिकारियों के अनुसार MP में बाकी शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा GST की चोरी इंदौर में पकड़ी गई। इंदौर में 165 फर्म्स की जांच की गई तो 111 करोड़ रुपए की GST  चोरी पकड़ में आई। और ये मध्य प्रदेश की कुल GST चोरी 125 करोड़ का 90% है। जबकि बात राजधानी भोपाल की करें तो भोपाल में 520 फर्म्स का वेरिफिकेशन किया गया, जिसमें से 90 फर्म्स का रजिस्ट्रेशन कैंसिल या सस्पेंड कर दिया गया। हालाँकि, भोपाल में सिर्फ 5 करोड़ की GST चोरी पकड़ में आई है।





CG में 190 करोड़ की GST चोरी





इस तरह अगर छत्तीसगढ़ में पिछले दो महीने के अभियान के दौरान 350 से भी ज्यादा डीलर्स/फर्म्स/रेजिस्ट्रेशन्स का वेरिफिकेशन हो चुका है। इनमें से 35 फीसदी फर्म्स नॉन-एक्सिस्टेंट पाए गए। अधिकारीयों ने 110 फर्म्स का रजिस्ट्रेशन ससपेंड या कैंसिल कर दिया है। राज्य में इस दौरान 190 करोड़ की GST चोरी पकड़ी गई। इस हिसाब से देखें कि जहाँ MP में 1000 से ज्यादा फर्म्स के वेरिफिकेशन पर 125 करोड़ की GST चोरी पकड़ी गई तो वहीँ छत्तीसगढ़ में सिर्फ 350 फर्म्स के वेरिफिकेशन पर ही 190 करोड़ की GST चोरी पकड़ में आई। जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में GST चोरी की दर MP से ज्यादा है।





GST की चोरी बड़े टैक्स स्लैब में ज्यादा





अधिकारियों ने बताया कि GST चोरी 18% और 28 % के टैक्स स्लैब में सबसे ज्यादा होती है। बता दें कि गस्त के चार अलग-अलग - 0%, 5%, 12%, 18% और 28% के स्लेब तय हैं जिनके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगाया जाता है।





मोड ऑफ़ फोर्जरी: फर्जी बिल, फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन और गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट





सभी मामलों में दूसरे के आधार, रेंट एग्रीमेंट, बिजली बिल आदि दस्तावेज नाम बदलकर इस्तेमाल किए गए। इन फ़र्ज़ी कागज़ों की मदद से नॉन-एक्सिस्टेंट फर्म्स बनाई गई और फ़र्ज़ी इनवॉइस बनाए गए। उदाहरण के तौर पर मई में इंदौर में पंजीकृत मैसर्स धनराज ट्रेडर्स द्वारा फर्जी जीएसटी पंजीयन लेने का मामला पकड़ा गया। कंपनी के प्रोपराइटर दिनेश राठौर और उसके साथी आशीष अग्रवाल को 12 करोड रुपए की टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तार भी किया गया है। जांच के अनुसार गुजरात के एक इनपुट टैक्स क्रेडिट का हेरफेर करने वाले ब्रोकर का संपर्क आशीष अग्रवाल से हुआ, जिसने धनराज ट्रेडर के मालिक दिनेश राठौर से गुजरात के डीलर की मुलाकात करवाई। दोनों के बीच फर्जी इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट चोरी किए जाने को लेकर बात हुई।





डेटा एनालिटिक्स से हो रही फर्जी फर्मों की पहचान



फर्जी कंपनियों की पहचान करने के लिए सरकार डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रही है। इंदौर का मामला भी GST विभाग को मई में मिली 14 संदिग्ध फर्मों की जानकारी में से एक था।



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