Alert on WFH: सावधान क्या वर्क फ्रॉम होम आपको बना रहा है बीमार?
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद वर्क फ्रॉम होम दोबारा चर्चा में आया है।
- घर से काम करने के कारण लोगों का सफर का समय और पैसा बच रहा है।
- एक्सपर्ट्स के अनुसार घर से काम करने से शारीरिक बीमारियां भी बढ़ सकती हैं।
- भविष्य के लिए हाइब्रिड मॉडल यानी कुछ दिन ऑफिस को बेहतर माना गया है।
WFH का बढ़ता ट्रेंड और नया लाइफस्टाइल
आजकल सुबह आंख खुलते ही लोग सीधे लैपटॉप के सामने बैठ जाते हैं। ऑफिस की मीटिंग्स खत्म होते ही उसी कमरे में खाना पीना होता है। इसके बाद देर रात तक लोग स्क्रीन से चिपके रहते हैं। कोरोना काल में शुरू हुआ यह ट्रेंड अब हमारा नया वर्क कल्चर बन चुका है।
दुनिया भर की लाखों कंपनियां अब इस मॉडल को अपना रही हैं। कर्मचारियों को भी शुरुआत में इसमें बहुत बड़ी राहत महसूस हो रही थी। हर दिन सड़क के भारी ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिल गई है। ऑफिस पहुंचने की जल्दबाजी और उसकी टेंशन भी अब पूरी तरह खत्म हो गई है।
लेकिन क्या घर से काम करना वाकई में इतना आसान और सुरक्षित है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके जो परिणाम सामने आए हैं वे काफी हैरान करने वाले हैं। यह आपकी सेहत से जुड़ा एक बड़ा मामला है।
हाईब्रिड मॉडल पर पीएम मोदी की अपील
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक खास अपील की थी। उन्होंने वक्त की नजाकत को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम शुरू करने को कहा था। पश्चिमी देशों के संकट को देखते हुए यह बात कही गई थी। इसके बाद से यह विषय चर्चा में आ गया।
एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिछले छह साल से घर से काम कर रहे हैं। वे सप्ताह में केवल एक दिन मीटिंग के लिए ऑफिस जाते हैं। अरनव का कहना है कि यह कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा है। इससे समय और पैसा दोनों की बहुत बड़ी बचत होती है।
हालांकि वे इसके नुकसान भी खुलकर बताते हैं। वे कहते हैं कि इस व्यवस्था के कारण वे अब सोशल नहीं रहे। बंद कमरे में अकेले काम करने से उनकी बातचीत करने की आदत छूट गई है। अब वे रिश्तेदारों के बीच असहज महसूस करते हैं।
निजी जिंदगी और काम के बीच कोई लाइन नहीं
इस कांसेप्ट पर एक पब्लिशिंग हाउस के एडिटर ने अपनी कहानी बताई है। उन्होंने कहा कि वर्क फ्रॉम होम से उनकी निजी जिंदगी बर्बाद हो गई है। घर और ऑफिस के बीच की दूरी अब पूरी तरह समाप्त हो गई है।
बाहर से देखने पर यह लाइफस्टाइल बहुत ही शानदार और आरामदायक लगती है। आने-जाने का किराया और मेहनत दोनों बच जाते हैं। अपने हिसाब से काम करने की थोड़ी आजादी भी मिल जाती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू बहुत डरावना है।
एडिटर के अनुसार अब उन्हें हर समय अलर्ट मोड पर रहना पड़ता है। बॉस का फोन कभी भी आ सकता है। काम खत्म होने के बाद भी दिमाग ऑफिस में ही अटका रहता है। इस वजह से मानसिक थकान और तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
मानसिक और पारिवारिक रिश्तों पर पड़ रहा बुरा असर
ऑफिस के माहौल में एक अलग तरह का अनुशासन और फोकस मिलता है। वहां आप सहकर्मियों से बात कर सकते हैं। चाय के बहाने थोड़ा मूड बदल जाता है। लेकिन घर पर लगातार काम करने से अकेलापन पैर पसारने लगता है।
पब्लिशिंग हाउस में काम करने वाली एक महिला पिछले चार साल से घर पर हैं। वे कहती हैं कि घर पर ऑफिस से भी ज्यादा काम करना पड़ता है। इस वजह से वे अपने बच्चों और पति को समय नहीं दे पाती हैं।
घर के काम और ऑफिस के बीच अंजना खुद को हारा हुआ महसूस करती हैं। बच्चों की शिकायतें सुनकर वे मानसिक रूप से बहुत थक जाती हैं। कई बार तो वे अपनी नौकरी बदलने के बारे में भी सोचने लगती हैं।
आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर की राय
आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु राय इस वर्क कल्चर के सख्त खिलाफ हैं। उनका कहना है कि कोविड के दौरान इसके बहुत बुरे सामाजिक परिणाम दिखे थे। घर में चौबीस घंटे साथ रहने से पति-पत्नी के झगड़े बढ़ गए थे।
हिमांशु राय के अनुसार घर वह जगह है जहां इंसान सुकून तलाशने आता है। लेकिन वर्क फ्रॉम होम ने घर को ही ऑफिस बना दिया है। ऐसे माहौल में मन की शांति पूरी तरह से गायब हो जाती है। डायरेक्टर का मानना है कि हर सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम लागू नहीं हो सकता। कंपनियों को पूरी तरह घर से काम कराने के बजाय हाइब्रिड मॉडल अपनाना चाहिए। तीन दिन ऑफिस और तीन दिन घर का फॉर्मूला ही सबसे बेस्ट है।
फिटनेस को लेकर एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
फिजिकल एक्सपर्ट का मानना कि लगातार बैठने से बीमारियां बढ़ रही हैं। लोग दिन भर एक ही जगह बैठे रहते हैं जिससे रीढ़ की हड्डी में दर्द शुरू हो जाता है। गर्दन का दर्द भी अब आम हो गया है।
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। शारीरिक एक्टिविटी न होने से युवाओं का वजन तेजी से बढ़ रहा है। घर में बंद रहने से लोगों को धूप नहीं मिल पा रही है।
धूप न मिलने से शरीर में विटामिन डी की भारी कमी हो रही है। कम उम्र में ही लोगहाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन का शिकार बन रहे हैं। हमारा शरीर इस तरह मशीनी काम के लिए नहीं बना है।
खुद को कैसे रखें फिट?
मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि भारतीय परिस्थितियों में संतुलन बनाना जरूरी है। पीएम मोदी की अपील का सम्मान करते हुए हमें अपनी जीवनशैली को भी सुधारना होगा। इसके लिए कुछ खास आदतों को अपनाना पड़ेगा।
घर से काम करने के दौरान मेडिटेशन और एक्सरसाइज का सहारा जरूर लें। काम के बीच-बीच में सीट से उठकर थोड़ा टहलना शुरू करें। अच्छी किताबें पढ़ें और परिवार के साथ बातचीत के लिए समय निकालें।
हाईब्रिड मॉडल ही है भविष्य
स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट निक ब्लूम का कहना है कि हाईब्रिड मॉडल ही भविष्य है। इससे कंपनियां अपने अच्छे कर्मचारियों को रोक कर रख सकती हैं। छोटे शहरों के लोगों को भी इससे बड़े अवसर मिल रहे हैं।
डाइट एक्सपर्ट विजेता शर्मा मानती हैं कि महिलाओं के लिए इसमें लचीलापन है। यात्रा का तनाव खत्म होने से उत्पादकता भी बढ़ती है। कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चरपर होने वाला खर्च भी अब सीधे बचत में बदल रहा है।
असली चुनौती खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने की है। आने वाले समय में हाइब्रिड वर्क कल्चर का चलन और ज्यादा बढ़ने वाला है। हमें तकनीक का गुलाम बनने से खुद को रोकना होगा।
ये भी पढ़ें...
वर्क फ्रॉम होम ठगी : घर बैठे कमाई का लालच और लग गई लाखों की चपत
कंपनी ने प्रेग्नेंट महिला को नहीं दिया वर्क फ्रॉम होम तो कोर्ट ने ठोका 200 करोड़ का जुर्माना
वर्क फ्रॉम होम फ्रॉड- काम दिलाने के नाम पर लगाया करोड़ों का चूना