कौन हैं केएल शर्मा जो सोनिया गांधी की सीट से बने कांग्रेस के उम्मीदवार
CHAKRESH | May 03, 2024, 09:01 IST
KL SHARMA
कांग्रेस ने अमेठी सीट से किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। शर्मा पहली बार चुनावी मैदान में होंगे। इससे पहले वो रायबरेली संसदीय क्षेत्र में सांसद प्रतिनिधि के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शर्मा को सोनिया गांधी का बेहद करीबी माना जाता है।
कांग्रेस ने लंबी चर्चा के बाद आखिरकार अमेठी सीट पर किशोरी लाल शर्मा पर भरोसा जताया है। गांधी परिवार की परंपरागत सीट से केएल शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा गया है। शर्मा का यह पहला चुनाव होगा। अब तक वह रायबरेली सांसद प्रतिनिधि के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शर्मा को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है।
केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है। वे गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। मूलत पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं। शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था। बाद में राजीव गांधी के अचानक निधन के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए और वो गांधी परिवार के ही होकर रह गए। 1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद शर्मा ने कभी शीला कौल के काम को संभाला तो कभी सतीश शर्मा के लिए मदद की। ऐसे में शर्मा का अक्सर रायबरेली और अमेठी में आना- जाना बना रहा। हालांकि, जब पहली बार सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं और अमेठी से चुनाव लड़ीं तो केएल शर्मा उनके साथ अमेठी आ गए। जब सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो केएल शर्मा ने रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
धीरे-धीरे वक्त बीता गया और शर्मा रायबरेली और अमेठी दोनों ही क्षेत्र के संसदीय कार्यों की देखरेख करने लगे। वक्त के साथ लोग कांग्रेस को छोड़ते गए, लेकिन केएल शर्मा की निष्ठा और वफादारी में कभी कोई कमी नहीं रही। शर्मा की विश्वसनीयता गांधी परिवार पर कायम रही। कभी केएल शर्मा बिहार के प्रभारी रहे तो कभी पंजाब कमेटी के सदस्य बने और आईसीसी के मेंबर भी रहे। कभी चुनावी बागडोर उनके हाथों में रही। उन्हें गांधी परिवार का करीबी होने का इनाम मिल गया है।
कौन हैं केएल शर्मा
केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है। वे गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। मूलत पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं। शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था। बाद में राजीव गांधी के अचानक निधन के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए और वो गांधी परिवार के ही होकर रह गए। 1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद शर्मा ने कभी शीला कौल के काम को संभाला तो कभी सतीश शर्मा के लिए मदद की। ऐसे में शर्मा का अक्सर रायबरेली और अमेठी में आना- जाना बना रहा। हालांकि, जब पहली बार सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं और अमेठी से चुनाव लड़ीं तो केएल शर्मा उनके साथ अमेठी आ गए। जब सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो केएल शर्मा ने रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
वफादरी का मिल गया इनाम
धीरे-धीरे वक्त बीता गया और शर्मा रायबरेली और अमेठी दोनों ही क्षेत्र के संसदीय कार्यों की देखरेख करने लगे। वक्त के साथ लोग कांग्रेस को छोड़ते गए, लेकिन केएल शर्मा की निष्ठा और वफादारी में कभी कोई कमी नहीं रही। शर्मा की विश्वसनीयता गांधी परिवार पर कायम रही। कभी केएल शर्मा बिहार के प्रभारी रहे तो कभी पंजाब कमेटी के सदस्य बने और आईसीसी के मेंबर भी रहे। कभी चुनावी बागडोर उनके हाथों में रही। उन्हें गांधी परिवार का करीबी होने का इनाम मिल गया है।
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