BHIND: चंबल नदी में छोड़ा गया 2 लाख क्यूसेक पानी, बाढ़ जैसे हालात, दो दर्जन गांवों में अलर्ट, प्रशासन ने खाली कराने की कराई मुनादी

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Manoj Jain
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BHIND: चंबल नदी में छोड़ा गया 2 लाख क्यूसेक पानी, बाढ़ जैसे हालात, दो दर्जन गांवों में अलर्ट, प्रशासन ने खाली कराने की कराई मुनादी

Bhind. बीते सालों भिंड जिले में चंबल और सिंध नदी(Chambal and Sindh River) द्वारा मचाई गई बाढ़ तबाही को देखते हुए भिण्ड जिला प्रशासन(Bhind District Administration) अलर्ट मोड(alert mode) पर है। चंबल नदी में गांधी सागर डैम(Gandhi Sagar Dam) से 200 क्यूसेक पानी(200 cusecs water)  रिलीज करने से चंबल में अचानक बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए प्रशासन ने चंबल के किनारे बसे हुए दो दर्जन ग्रामों में अलर्ट जारी किया है। पुलिस वाहन गांव-गांव जाकर मुनादी(Munadi) कर रहे हैं कि संभावित बाढ़ ग्रस्त इलाके में आने वाले गांवों में खास करके निचली बस्तियों के लोग अपने घरों को खाली कर सुरक्षित अपने पशुधन और अनाज सहित ऊंचे स्थान पर चले जाएं। चंबल नदी का खतरे का निशान 119.80 उदी घाट पर है जबकि अभी चंबल 115.30 मीटर पर है। लगभग 4 मीटर खतरे के निशान से नीचे और आज 18 तारीख की शाम तक गांधी सागर डैम से रिलीज किया हुआ 200 क्यूसेक पानी पहुंचने की संभावना है जिसको देखते हुए प्रशासन अलर्ट है।





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चंबल नदी उफान पर





साथ ही भिंड कलेक्टर ने एसडीआरएफ और होमगार्ड की राहत बचाव टीमें भी इलाके में तैनात कर दी है, जिससे अचानक आने वाली किसी भी आपदा से निपटा जा सके। कोटा बैराज से पिछले 24 घंटे में 3.30 लाख 940 क्यूसेक पानी छोड़ने से चंबल नदी उफान पर है। ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे-92 पर बरही चंबल पुल पर पानी खतरे के निशान से 3.96 मीटर नीचे तक पहुंच गया। दूसरी ओर शिवपुरी जिले के मड़ीखेड़ा डैम से 49 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सिंध नदी में उफान आएगा। यहां नदी किनारे के 25 गांवों में अलर्ट करा दिया है। कलेक्टर डा. सतीश कुमार एस और एसपी शैलेंद्र सिंह कुशवाह ने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन की तैयारियां करने को कहा है।





एक मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी





केंद्रीय जल आयोग उदी उत्तरप्रदेश के स्थल प्रभारी अखिलेश यादव का कहना है कि कोटा बैराज से लगातार पानी छोड़ जाने से चंबल नदी में जल स्तर एकाएक बढ़ा है। यादव का कहना है कि बुधवार को दोपहर बाद से चंबल नदी में पानी एक मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। उनका कहना है कि कोटा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने से अभी नदी का जल स्तर कम होता नहीं दिख रहा है। यहां बता दें कि कोटा बैराज की ऊपरी नदियों के इलाके में लगातार बारिश से यह हालात बन रहे हैं। बुधवार शाम बजे 6 बजे कोटा बैराज में पानी 850.50 फीट है। लगातार बारिश से डैम में पानी बढ़ रहा है। इसी से चंबल नदी में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।





1996 में खतरे के निशान से 6.40 मीटर ऊपर था पानी





चंबल नदी के पुल की ऊंचाई 130 मीटर है। यानी यह ऊंचाई पुल पर लगे महाखतरे के निशान 122 मीटर से 8 मीटर ज्यादा है। बता दें कि अभी तक सिर्फ 1996 में चंबल नदी में पानी खतरे के निशान से 6.40 मीटर ज्यादा था। यानी तब पानी 128.40 मीटर तक पहुंच गया था। जिलेभर में बाढ़ के हालात थे। इसके बाद 1999 में चंबल नदी में पानी 120.75 मीटर तक पहुंचा, जो महा खतरे के निशान से 1.25 मीटर कम था। सिंध नदी के मेंहदा घाट पुल पर खतरे का निशान 10.1 मीटर पर है। मड़ीखेड़ा डैम से पानी छोड़े जाने से नदी में पानी 1 मीटर से बढ़कर 2.70 मीटर तक पहुंच गया है। गुरुवार सुबह तक जलस्तर 5 मीटर होने की संभावना है। पुल की ऊंचाई 30 मीटर है।





सिंध नदी में उफान से ये गांव प्रभावित





भिंड के 5 गांव मड़नई, जखमौली, खेरा श्यामपुरा, ककहारा, टेहनगुर में सिंध नदी में उफान से बाढ़ का खतरा रहता है। मेहगांव के 7 गांव सांदुरी, बझरौली, बछरेटा, बरैठी खुर्द, बरैठी राज, खेरिया सिंध, कछार। रौन के 9 गांव इंदुर्खी, कोंध की मढ़ैया, निवसाई, महायर, रेंवजा, मेंहदा, पढ़ौरा, दोहई, हिलगवां। मिहोना के 4 गांव धौहर, पर्रायच, बड़ेतर, मटियावली खुर्द। लहार के 8 गांव लिलवारी, लगदुआ, बरहा, केशवगढ़, अजनार, रोहानीसिंहपुरा, मड़ोरी, सिजरौली में बाढ़ का खतरा रहता है।



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