REWA:' शपथ लेते ही 'नायक' के अंदाज में कांग्रेसी महापौर; पर परिषद के चक्रव्यूह से कैसे निकल पाएंगे!

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Sachin Tripathi
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REWA:'  शपथ लेते ही 'नायक' के अंदाज में कांग्रेसी महापौर; पर परिषद के चक्रव्यूह से कैसे निकल पाएंगे!

REWA. पद की शपथ लेते ही रीवा नगर निगम के कांग्रेसी महापौर अजय मिश्र बाबा ने फिल्म नायक के अंदाज में दिखे। ऐतिहासिक पद्मधर पार्क के सार्वजनिक समारोह में उनके साथ उन्नीस पार्षदों ने शपथ ली। इससे 28 अगस्त को 26 पार्षदों ने यह कहते हुए कलेक्ट्रेट में शपथ ली थी कि वे कांग्रेसियों के साथ नहीं खड़े होना चाहते। ये सभी भाजपा के पार्षद थे जो शपथ लेने के बाद चार्टर्ड बसों से ओरछा चले गए और अब 1अगस्त को परिषद अध्यक्ष के चुनाव में लौटने वाले हैं।





भाजपा पार्षदों ने कांग्रेसियों के साथ खड़ा होने से किया था इंकार 





यह कांग्रेस की चूक थी जिसने पहले से ही सार्वजनिक समारोह में शपथ लेने की घोषणा कर दी। भाजपा ने इसका फायदा उठाया और अपने पार्षदों को बटोर कर अचानक तीन दिन पहले ही शपथ ले ली। भाजपा महापौर की पराजय से खार खाए पूर्व मंत्री विधायक राजेन्द्र शुक्ल ने यह कदम उठाते हुए परिषद के अध्यक्ष की जीत सुनिश्चित कर ली। कैफियत देते हुए उन्होंने कहा- नोटिफिकेशन के बाद पार्षद अपनी सुविधा के हिसाब से कभी भी शपथ ले सकते हैं। हमारे पार्षद कांग्रेस के उस घोषित आयोजन में क्यों जाएं।





सरकारी वाहन में नहीं चढ़ेंगे बाबा, सरकारी घर में बनाएंगे जनता दफ्तर





बहरहाल आज का शपथ समारोह कांग्रेस का ही रहा। शपथ लेने के बाद महापौर अजय मिश्र बाबा ने घोषणा कर दी कि वे नगर निगम के वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। इससे जो 40 से 50 हजार रुपये बचेंगे उसे वे नगर हित में लगाएंगे। बाबा ने कहा कि वे मेयर हेल्पलाइन शुरू करने जा रहे हैं,यह नगर वासियों के लिए 24 घंटे खुली रहेगी, कोई भी कभी भी अपनी समस्या दर्ज करा सकता है, हम इस पर कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। महापौर बाबा ने कहा कि यदि सरकारी घर मिलता है तो उसे नगरनिगम का अपना कार्यालय बनाएंगे वह भी चौबीस घंटे नगरवासियों के लिए खुला रहेगा। वहा आने वालों के लिए चायपानी, भोजन की भी व्यवस्था रहेगी। बाबा ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता शहर की सड़कों को दुरुस्त कराना और घर-घर मीठा पानी पहुँचाना होगा। उत्साही महापौर के लिए यह सब कहना तो आसान है लेकिन कर पाना मुश्किल क्योंकि परिषद भाजपा की होगी जिसमें उसका अध्यक्ष बैठेगा व सरकार भाजपा की है ही सो यह नहीं लगता कि कोई भी काम कांग्रेस महापौर के मुताबिक होगा। शहर में कांग्रेस-भाजपा के बीच यह एक नए संघर्ष की शुरुआत भी है।





ऐसा पहले भी एक बार हुआ जब विपक्षी दल के मेयर की मुश्कें कशी गईं





विपक्षी पार्टी के महापौर व सत्ता पक्ष की परिषद यहाँ एक बार पहले भी रह चुकी है तब परिस्थितियों ने महापौर को महज नामचार का बना दिया था। 1998 में महापौर भाजपा की आशा सिंह बनीं थी और परिषद कांग्रेस की थी जिसके अध्यक्ष थे यदुनाथ तिवारी। सत्ता में कांग्रेस थी लिहाजा नगरनिगम और उसके अधिकारी परिषद अध्यक्ष का हुक्म बजाते थे। संघर्ष व टकराव की स्थिति यहाँ तक पहुँची कि महापौर सुविधाएं लेकर पूरे कार्यकाल घर में ही बैठी रहीं। इस बार संघर्ष और टकराव ज्यादा बढ़ेगा क्योंकि 14 महीने बाद विधानसभा के चुनाव हैं और कांग्रेस तथा भाजपा दोनों माइलेज लेने की कोशिशें करेंगी।



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