भोपाल-रीवा में काम आई बड़े नेताओं की गारंटी, इंदौर में भी इसी पैटर्न पर कवायद

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Praveen Sharma
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भोपाल-रीवा में काम आई बड़े नेताओं की गारंटी, इंदौर में भी इसी  पैटर्न पर कवायद

Bhopal. बीजेपी ने भोपाल के महापौर पद के लिए मालती का नाम तय कर लिया है। इंदौर और ग्वालियर महापौर पद के प्रत्याशी को लेकर बना विवाद भी लगभग खत्म हो गया है। कई दौर की बैठक के बाद इंदौर महापौर पद के लिए मधु वर्मा को बीजेपी का अधिकृत प्रत्याशी बनाया जाना तय हो गया है। फाइनल सूची बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा शाम तक घोषित कर सकते हैं। अंतिम दौर की बैठक के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व प्रदेशाध्यक्ष शर्मा प्रदेश कार्यालय पहुंच चुके हैं। इस बीच नया क्राइटेरिया सामने आया है, जिसमें बड़े नेताओं की गारंटी पर मेयर प्रत्याशी तय किए जा रहे हैं। भोपाल और रीवा के प्रत्याशी इसी क्राइटेरिया पर तय माने जा रहे हैं। जबकि इंदौर के लिए मधु वर्मा के नाम पर सहमति बनाने सभी पुराने नेताओं को भोपाल बुला लिया गया है। 





सोमवार को देर रात तक चिंतन—मंथन के बाद भी किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने के बाद बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता आज सुबह से फिर प्रत्याशियों के नाम लेकर बैठ गए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा सहित सभी दिग्गज कमरा बंद बैठक में जुट गए हैं। सूत्रों के मुताबिक भोपाल से मालती राय, इंदौर से मधु वर्मा, रीवा से प्रबोध व्यास, जबलपुर से डॉ. जितेंद्र जामदार के नामों पर भी सहमति बनती नजर आ रही है।  





प्रदेश में आगामी चुनाव के लिए पिछले कई दिनों से उम्मीदवारों की दावेदारी को लेकर पार्टियों की अंदर गहमागहमी की स्थिति बनी हुई है। इसी कड़ी में बीजेपी प्रदेश की 16 नगर निगमों में से किसी एक पर भी अपने प्रत्याशी तय नहीं कर सकी है। पिछले चार दिनों से बैठकों के दौर पर दौर चल रहे हैं, लेकिन किसी पर भी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। कहीं क्राइटेरिया आड़े आ रहा है तो कहीं स्थानीय नेताओं के विरोध के कारण पार्टी अपना निर्णय नहीं ले पा रही है। सूत्रों की मानें तो आज दोपहर में महापौर पदों के लिए सभी 16 प्रत्याशियों पर मोहर लग जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भोपाल से मालती राय, रीवा से प्रबोध व्यास, जबलपुर से डॉ. जितेंद्र जामदार के नामों पर सहमति बन गई है। रीवा में प्रबोध के साथ ही व्यंकट पांडेय का नाम भी बना हुआ था। वहीं इंदौर से मधु वर्मा और पुष्यमित्र भार्गव के नामों के बीच पार्टी उलझी हुई थी। मगर इसमें मधु वर्मा का नाम भारी पड़ा है। ग्वालियर में पूर्व मंत्री माया सिंह और सुमन शर्मा आमने-सामने है। अभी चल रही बैठक में यदि किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाती है तो शाम को बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेता एक बार फिर बैठक कर सकते हैं। बैठक में पार्टी के क्राइटेरिया पर चर्चा की जाएगी, ताकि प्रत्याशियों की सूची को फाइनल किया जा सके। अंतिम दौर की इस मंत्रणा के बाद रात तक प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के प्रत्याशियों की सूची घोषित की जा सकती है। बैठक में प्रत्याशियों को लेकर नए क्राइटेरिया पर चर्चा हुई, जिसके कारण सूची अटक गई।





बीजेपी ने लगाया उम्र और परिवार का बंधन 





पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के नए क्राइटेरिया के तहत पार्टी किसी ऐसे प्रत्याशी को नहीं उतारेगी, जिसकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो और जो दो बार कोई चुनाव हार चुका हो। इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी नड्डा परिवारवाद पर तस्वीर साफ कर चुके है, जहां उन्होंने कहा था कि पार्टी किसी पुत्र या परिवार के सदस्य को टिकट नहीं देगी। वहीं विधायकों को भी टिकट न देने का क्राइटेरिया पार्टी ने तय किया है। 





भोपाल में तीनों विधायकों की राय पर सीएम की मुहर 





राजधानी के महापौर के लिए बीजेपी पहले दिन से ही कुछ नया करने का मन बनाकर बैठी थी। विधायकों को टिकट न देने के क्राइटेरिया पर पार्टी अड़ी हुई है। इससे गोविंदपुरा से विधायक कृष्णा गौर का नाम पहले राउंड में ही कट गया था। श्रीमती गौर भी चुनाव लड़ने की ज्यादा इच्छुक नहीं थीं। ऐसे में ओबीसी चेहरे के रूप में राजधानी के तीनों बीजेपी विधायक विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा और गौर ने आम सहमति से मालती राय का नाम आगे बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री चौहान भी तीनों विधायकों की गारंटी को देखते हुए सहमत हो गए, लेकिन राय के साथ दो हार जुड़ी होने के कारण संगठन उनके नाम पर तैयार नहीं था। इस बीच एक चौंकाने वाला नाम भारती कुंभारे का आया तो 20 साल पहले प्रत्याशी रहीं राजो मालवीय भी पूरी ताकत से दावेदारी करती रहीं। संघ की पसंद बताते हुए भारती का नाम आगे बढ़ाया जाता रहा, ताकि किसी नए व युवा चेहरे को मैदान में उतारा जा सके, लेकिन विधायकों की घेराबंदी को संगठन भी नहीं तोड़ सका। लंबी खींचतान और उठापटक के बाद मालती रा​य के नाम पर मुहर लगना तय हो गया है। 





मालती राय।





ग्वालियर : मेयर के लिए पल-पल बदल रहे हैं बीजेपी में समीकरण 





एक सप्ताह बीत गया । अनेक दौर की औपचारिक और अनौपचारिक बैठकों के बावजूद ग्वालियर नगर निगम चुनावों के लिए बीजेपी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर पाई है। दरअसल इसमें एक नहीं कई रोड़े हैं। सबसे बड़ी दिक्कत कांग्रेस से बीजेपी में आए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर आ रही है। बीजेपी चाहती है इस परंपरागत और अपराजेय सीट पर मेयर शुद्ध बीजेपी का बने । जबकि सिंधिया कांग्रेस की तरह यहां भी प्रत्याशी चयन में एकाधिकार चाहते हैं । वे अपने किसी कट्टर समर्थक को टिकट देकर अपनी ताकत का संदेश देना चाहते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर और जयभान सिंह पवैया मानते है कि इससे संदेश गलत जाएगा। वस्तुतः इससे लगेगा मानो अब बीजेपी में सर्व शक्तिमान रहने वाले इन क्षत्रपों का कोई रसूख नही बचा। सिंधिया ने हालांकि सीधे कोई नाम नहीं दिया, लेकिन उनके यहां से जो नाम आगे बढ़ाए गए उसमे ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के बड़े भाई देवेंद्र तोमर की पत्नी, मधुलिका क्षीरसागर, पूर्व मेयर समीक्षा गुप्ता और माया सिंह। मधुलिका ने कल पार्षद पद के लिए अपना नामांकन पत्र खरीद लिया सो तय है वे दौड़ से बाहर हो गईं है। देवेंद्र तोमर की पत्नी के नाम पर भी बात नही बन पा रही। सोमवार को प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कृषिमंत्री नरेंद्र तोमर से मुलाकात की थी, लेकिन बात बनी नहीं। फिर कहा गया कि मामी जी यानी माया सिंह के नाम पर सहमति बन रही है क्योंकि वे बीजेपी की बड़ी नेता रहीं है और सिंधिया की रिश्तेदार भी हैं, लेकिन अंतिम क्षणों में वे भी रेस से बाहर हो गई। क्राइटेरिया आड़े आ गया, वे 70 वर्ष की उम्र पार कर चुकी हैं। पार्टी ने तय किया है कि 70 से ऊपर को टिकट नही देगी। समीक्षा गुप्ता के नाम पर दो दिक्कत हैं। एक तो 2018 के विधानसभा चुनाव में समीक्षा बागी होकर तत्कालीन मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के खिलाफ चुनाव लड़ गईं थी। वह स्वयं तो हारी ही, कुशवाह भी महज 121 वोट से हार गए। इसके बाद समीक्षा को पार्टी से निकाल दिया गया।अब उनकी पार्टी में तो वापसी हो गई लेकिन कुशवाह के विरोध के चलते और ओबीसी होने की वजह से वे भी रेस से बाहर हो गईं। 





कल सक्रिय हो गए नए दावेदार 





कल शाम को सूचना आई कि ग्वालियर के लिए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को फ्री हैंड दे दिया है और उन्होंने हेमलता भदौरिया का नाम फाइनल कर दिया है। इसकी हवा फैलते ही उनके ही खेमे में कई दावेदार ताल ठोकने लगे। राकेश जादौन अपनी पत्नी का नाम ले आये तो शकुंतला सिंह परिहार ने भी दावेदारी कर दी। अब बीजेपी की तरफ से सबसे सशक्त नाम सुमन शर्मा का ही आ रहा है। उनका नाम शुरू से ही आगे था। एक अन्य नाम डॉ. वीरा लोहिया का है। आज ग्वालियर में पार्षद के टिकिटों का फैसला करने के लिए जिला स्तरीय चयन समिति की बैठक होना है। इसमें सिंधिया, तोमर,पवैया और शेजवलकर एक साथ बैठेंगे। संभव है इस बैठक में मेयर के टिकट को लेकर भी चर्चा हो।





मधु वर्मा।





इंदौर : मेंदोला को रोका, खड़े रह गए खरे, मधु आगे  





अभी तक मेयर टिकट की दौड़ में सबसे आगे चलने वाले डॉ. निशांत खरे मूलतः संघ से जुड़े हैं। कोविड कॉल में प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक लोगों की जो टीम बनाई गई थी, उसकी अगुवाई डॉ. खरे कर रहे थे। तब पहली बार यह नाम चर्चा में आया। उससे पहले तक यह नाम शहर के लिए अनजाना था। आज भी बड़े वर्ग में अनजाना है। हालांकि उस समय भी इनकी उपस्थिति को लेकर भाजपाई हलकों में विरोध के स्वर उठे थे। शिवराज ने समय-समय पर इनके कामों की सराहना की। कोविड टीम से चला नाम संघ ने योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया। शुरुआत में तो बड़े नेताओं ने भी इनके नाम को वैसे ही लिया, जैसे अन्य दावेदारों के चलते हैं लेकिन जैसे ही दावेदारी रफ्तार पकड़ने लगी तो समझ आया कि कोविड से मेयर की दावेदारी तक का सफर बहुत जल्दी पूरा हो रहा। संघ के कोटे का नाम था इसलिए नेताओं ने चलने तो दिया लेकिन अंतिम नहीं हो पा रहा है। दूसरा नाम पुष्यमित्र भार्गव का है, जिन्हें बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष शर्मा की पसंद बताया जा रहा है। पुष्यमित्र ने एबीवीपी में प्रदेशाध्यक्ष शर्मा के साथ काम किया है। उपमहाधिवक्ता हैं। बंद कमरों में संगठन के आयोजनों में सक्रिय रहते हैं। इसी आधार पर पार्टी ने नाम आगे बढ़ाया। कांग्रेस द्वारा ब्राह्मण चेहरा उतारने के कारण इनकी दावेदारी को बल मिला। मगर अब नए समीकरण बनने से नाम पीछे माना जा रहा है। इनके अलावा पूर्व उपमहाधिवक्ता मनोज द्विवेदी का भी है, जो स्वदेशी जागरण मंच और विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव से पारिवारिक रिश्ते हैं। वीडी शर्मा का साथ है। संघ में भी ठीक—ठाक दखल। ब्राह्मण हैं। पार्टी  हैं कार्यकर्ताओं के बीच भी पैठ रखते हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण के कानूनी सलाहकार भी रहे हैं। बस जनता के बीच पहचान का संकट है। इस सारी उठापटक में सबसे चौंकाने वाला नाम है विधायक रमेश मेंदोला का। पार्टी, जनता और ब्राह्मण वर्ग के बीच बड़ा चेहरा। जनता में गहरी पैठ। तीन बार के विधायक। सर्वाधिक वोटों से जीतने का श्रेय और पार्टी के अंदरूनी सर्वे में जनता की पहली पसंद। भाजपा तो ठीक कांग्रेस में भी बड़ा वर्ग प्रशंसक। जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर में स्वाभाविक उम्मीदवार। इसीलिए दावेदारी में सबसे आगे रहे, लेकिन पार्टी के मापदंडों के उलझने के कारण पिछड़ गए।इन सब पर भारी पड़ते दिख रहे हैं इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष मधु वर्मा। बैठकों के कई दौर में क्राइटेरिया और जातीय समीकरणों पर चर्चा के बाद मधु वर्मा का नाम आगे निकल गया है। 





प्रबोध व्यास





रीवा : प्रबोध व्यास लगभग तय! 





रीवा मेयर के लिए बीजेपी में मचे घमासान के बीच एक खबर उभरकर सामने आ रही है कि रीवा से प्रबोध व्यास का नाम लगभग तय हो गया है सिर्फ घोषणा बची है। पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक राजेंद्र शुक्ल पिछले दो दिनों से रीवा में ही हैं और अब पार्षद पद के प्रत्याशियों के चयन पर ध्यान दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार चुनाव समिति और कोर कमेटी की बैठकों में विचार मंथन और विमर्श के बीच यह तय किया गया कि बड़े नेता यदि जीत की जिम्मेदारी लें, तभी किसी एक नाम पर जोर दें। इसी क्राइटेरिया में भोपाल-जबलपुर-इंदौर-ग्वालियर के भी प्रत्याशी तय होने जा रहे हैं।चुनाव समिति में रीवा से कौन प्रत्याशी हो इसपर वीडी शर्मा ने प्रज्ञा त्रिपाठी का नाम चलाया था, लेकिन जब राजेन्द्र शुक्ल ने यह कहा कि यदि श्री शर्मा प्रत्याशी को जिताने की गारंटी लेते हों तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। वीडी बैकफुट पर आ गए और प्रत्याशी चयन में शुक्ल को फ्री हैंड मिल गया। सूत्रों की मानें तो भाजपा के रीवा नगर अध्यक्ष रह चुके प्रबोध व्यास के नाम पर जिला चयन समिति की सहमति बन गई है। प्रबोध का नाम जिला भाजपा अध्यक्ष के लिए भी चला था। यह संयोग ही है कि इससे पहले पुरुष महापौरों में वीरेन्द्र गुप्त व शिवेन्द्र सिंह दोनों भाजपा के नगर अध्यक्ष रह चुके हैं जबकि ममता गुप्ता महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष थीं।



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